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“पराली जलाने पर सख्ती: राजधानी में पहली FIR, चार किसानों को 2,500–2,500 रुपये का जुर्माना”
BHOPAL, MP
राजधानी में पराली जलाने की समस्या को लेकर पहली बार सख्त कार्रवाई की गई है। चार किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। कलेक्टर द्वारा जारी धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है।
इस मामले में किसान जगन्नाथ पाल, नर्बदा प्रसाद और लहारपुर के सज्जन सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाया गया है ताकि पराली जलाने की समस्या पर काबू पाया जा सके। हालांकि, कुछ किसानों ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की है।
पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों और उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। इससे पहले दतिया जिले में भी पराली जलाने पर 15 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें 2 महिलाएं भी शामिल थीं।
सेटेलाइट रिपोर्ट और आसपास के किसानों की शिकायतों के आधार पर बिसौर हल्का के पटवारी पुष्पेंद्र यादव ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसके बाद वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 की धारा 5 के तहत किसानों पर मामला दर्ज किया गया।
यह कदम प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अहम पहल साबित हो सकता है, लेकिन किसानों को इस कार्रवाई से होने वाली परेशानियों पर भी विचार करना होगा।
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BHOPAL, MP
इस मामले में किसान जगन्नाथ पाल, नर्बदा प्रसाद और लहारपुर के सज्जन सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कदम प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाया गया है ताकि पराली जलाने की समस्या पर काबू पाया जा सके। हालांकि, कुछ किसानों ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की है।
पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों और उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। इससे पहले दतिया जिले में भी पराली जलाने पर 15 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें 2 महिलाएं भी शामिल थीं।
सेटेलाइट रिपोर्ट और आसपास के किसानों की शिकायतों के आधार पर बिसौर हल्का के पटवारी पुष्पेंद्र यादव ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसके बाद वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 की धारा 5 के तहत किसानों पर मामला दर्ज किया गया।
यह कदम प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अहम पहल साबित हो सकता है, लेकिन किसानों को इस कार्रवाई से होने वाली परेशानियों पर भी विचार करना होगा।
