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मंडला में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने क्लोरीनेशन अभियान शुरू किया
Mandla, MP
मध्यप्रदेश के मंडला जिले में कोना टोला गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।
पिछले एक हफ्ते के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों की अचानक मौत हो गई। तीन सदस्यों की मौत दो दिनों के अंदर हुई। स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक रूप से इसे उल्टी-दस्त (डायरिया) से जोड़ा है, लेकिन मासूम बच्चे की मौत के कारण अभी भी जांच का रहस्य बना हुआ है।
घटना का पूरा मंजर
मंडला से करीब 55 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल कोना टोला गांव में रहने वाले यह परिवार सामान्य जीवन जी रहा था। 8 सितंबर को 18 महीने के मासूम आदित्य केराम की मौत हुई थी। उसके दो घंटे पहले उसे झटके महसूस हुए थे, उल्टी-दस्त नहीं। इसके बाद 13 सितंबर को परिवार के दो अन्य सदस्य—मुन्ना केराम (48) और उनकी मां नरबदिया केराम (68) की मृत्यु हो गई। 14 सितंबर को मुन्ना के छोटे भाई देव सिंह केराम ने भी दम तोड़ दिया।
परिवार में छाया मातम
मृतकों के परिजनों और पूरे गांव में भारी शोक और खौफ का माहौल है। बड़ी बेटी राजेश्वरी केराम ने बताया कि पूरे परिवार का जीवन कुएं के दूषित पानी पर निर्भर था। मृतक बड़े पापा दूसरे कुएं का पानी इस्तेमाल करते थे, जबकि बाकी परिवार एक ही कुएं के पानी का सेवन करते थे। मासूम आदित्य की मौत की वजह उल्टी-दस्त नहीं बताई जा रही है, जिससे गांववासियों में असमंजस बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुएं के पानी के सैंपल लिए हैं और गांव में क्लोरीनेशन अभियान शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर घर-घर जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं, साथ ही ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने और क्लोरीन की गोलियां लेने की सलाह दी जा रही है। बीएमओ डॉ. नीरज राज ने स्पष्ट किया कि इस समय तीन मौतें उल्टी-दस्त से मानी जा रही हैं, जबकि मासूम बच्चे की मौत का कारण अलग है। इसके लिए ब्लड सैंपल और अन्य जांचें की जा रही हैं।
एसडीएम हुनेंद्र घोरमारे ने भी बताया कि फिलहाल कोई संक्रामक बीमारी का कोई प्रसार नहीं दिख रहा है, सिर्फ यही परिवार इस स्थिति से जूझ रहा है। जांच जारी है।
गांव का माहौल
हरियाली से ढंकी पहाड़ियों के बीच बसा यह गांव अब एक सन्नाटे में बदल चुका है। मृतकों के परिजनों की आंखें पथरा गई हैं और गांव के अन्य लोग खौफ से भर गए हैं। प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन पीड़ित परिवार की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
यह घटना अब सवाल खड़ा करती है कि क्या यह सिर्फ दूषित पानी की वजह से हुई मौतें हैं या कुछ और गहरे रहस्य छिपे हैं। स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम जांच में जुटी हुई है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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पिछले एक हफ्ते के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों की अचानक मौत हो गई। तीन सदस्यों की मौत दो दिनों के अंदर हुई। स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक रूप से इसे उल्टी-दस्त (डायरिया) से जोड़ा है, लेकिन मासूम बच्चे की मौत के कारण अभी भी जांच का रहस्य बना हुआ है।
घटना का पूरा मंजर
मंडला से करीब 55 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल कोना टोला गांव में रहने वाले यह परिवार सामान्य जीवन जी रहा था। 8 सितंबर को 18 महीने के मासूम आदित्य केराम की मौत हुई थी। उसके दो घंटे पहले उसे झटके महसूस हुए थे, उल्टी-दस्त नहीं। इसके बाद 13 सितंबर को परिवार के दो अन्य सदस्य—मुन्ना केराम (48) और उनकी मां नरबदिया केराम (68) की मृत्यु हो गई। 14 सितंबर को मुन्ना के छोटे भाई देव सिंह केराम ने भी दम तोड़ दिया।
परिवार में छाया मातम
मृतकों के परिजनों और पूरे गांव में भारी शोक और खौफ का माहौल है। बड़ी बेटी राजेश्वरी केराम ने बताया कि पूरे परिवार का जीवन कुएं के दूषित पानी पर निर्भर था। मृतक बड़े पापा दूसरे कुएं का पानी इस्तेमाल करते थे, जबकि बाकी परिवार एक ही कुएं के पानी का सेवन करते थे। मासूम आदित्य की मौत की वजह उल्टी-दस्त नहीं बताई जा रही है, जिससे गांववासियों में असमंजस बना हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुएं के पानी के सैंपल लिए हैं और गांव में क्लोरीनेशन अभियान शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर घर-घर जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं, साथ ही ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने और क्लोरीन की गोलियां लेने की सलाह दी जा रही है। बीएमओ डॉ. नीरज राज ने स्पष्ट किया कि इस समय तीन मौतें उल्टी-दस्त से मानी जा रही हैं, जबकि मासूम बच्चे की मौत का कारण अलग है। इसके लिए ब्लड सैंपल और अन्य जांचें की जा रही हैं।
एसडीएम हुनेंद्र घोरमारे ने भी बताया कि फिलहाल कोई संक्रामक बीमारी का कोई प्रसार नहीं दिख रहा है, सिर्फ यही परिवार इस स्थिति से जूझ रहा है। जांच जारी है।
गांव का माहौल
हरियाली से ढंकी पहाड़ियों के बीच बसा यह गांव अब एक सन्नाटे में बदल चुका है। मृतकों के परिजनों की आंखें पथरा गई हैं और गांव के अन्य लोग खौफ से भर गए हैं। प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन पीड़ित परिवार की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
यह घटना अब सवाल खड़ा करती है कि क्या यह सिर्फ दूषित पानी की वजह से हुई मौतें हैं या कुछ और गहरे रहस्य छिपे हैं। स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम जांच में जुटी हुई है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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