2 से ज्यादा बच्चों पर नहीं जाएगी सरकारी नौकरी, MP सरकार बदलेगी 25 साल पुराना नियम, 30 हजार शिक्षकों को राहत

भोपाल (म.प्र.)

By Rohit.P
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मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में लागू दो बच्चों की शर्त जल्द हट सकती है। प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दो से ज्यादा बच्चों वाले कर्मचारियों पर लागू प्रतिबंध को हटाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इस फैसले के लागू होने के बाद तीसरी संतान होने पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।

2001 में लागू हुआ था नियम

यह नियम साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान लागू किया गया था। उस समय सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा गया था, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता था या नौकरी में रहते हुए तीसरी संतान होने पर कार्रवाई की जाती थी।

मुख्यमंत्री स्तर पर मिली सहमति

सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री स्तर पर सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे औपचारिक रूप से कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही यह नियम समाप्त हो जाएगा और हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

हजारों शिक्षकों को मिलेगा सीधा लाभ

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर शिक्षा विभाग पर पड़ेगा। अनुमान है कि करीब 30 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें इस नियम के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में हजारों मामले लंबित हैं, जिनमें अब राहत मिलने की उम्मीद है।

लंबित मामलों पर भी होगा फैसला

सरकार कैबिनेट के माध्यम से यह तय करेगी कि कोर्ट और विभागों में चल रहे मामलों का क्या किया जाएगा। संभावना है कि पुराने मामलों में भी कर्मचारियों को राहत दी जा सकती है। इससे कई लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई से छुटकारा मिलेगा।

नियम पर क्यों उठे सवाल

पिछले कुछ वर्षों में इस नियम की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे थे। कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या संतुलन को लेकर तीन बच्चों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घटती प्रजनन दर को समाज के लिए चिंता का विषय बताया, जिसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हुई।

अन्य राज्यों में पहले ही हट चुका है नियम

राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने पहले ही इस पाबंदी को खत्म कर दिया है। इन राज्यों में तीन बच्चों वाले कर्मचारी बिना किसी रोक-टोक के नौकरी कर रहे हैं। वहीं आंध्र प्रदेश ने तो तीसरे बच्चे पर प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की है।

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27 Mar 2026 By Rohit.P

2 से ज्यादा बच्चों पर नहीं जाएगी सरकारी नौकरी, MP सरकार बदलेगी 25 साल पुराना नियम, 30 हजार शिक्षकों को राहत

भोपाल (म.प्र.)

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दो से ज्यादा बच्चों वाले कर्मचारियों पर लागू प्रतिबंध को हटाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इस फैसले के लागू होने के बाद तीसरी संतान होने पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।

2001 में लागू हुआ था नियम

यह नियम साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान लागू किया गया था। उस समय सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा गया था, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता था या नौकरी में रहते हुए तीसरी संतान होने पर कार्रवाई की जाती थी।

मुख्यमंत्री स्तर पर मिली सहमति

सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री स्तर पर सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे औपचारिक रूप से कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही यह नियम समाप्त हो जाएगा और हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

हजारों शिक्षकों को मिलेगा सीधा लाभ

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर शिक्षा विभाग पर पड़ेगा। अनुमान है कि करीब 30 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें इस नियम के कारण परेशानी झेलनी पड़ी। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में हजारों मामले लंबित हैं, जिनमें अब राहत मिलने की उम्मीद है।

लंबित मामलों पर भी होगा फैसला

सरकार कैबिनेट के माध्यम से यह तय करेगी कि कोर्ट और विभागों में चल रहे मामलों का क्या किया जाएगा। संभावना है कि पुराने मामलों में भी कर्मचारियों को राहत दी जा सकती है। इससे कई लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई से छुटकारा मिलेगा।

नियम पर क्यों उठे सवाल

पिछले कुछ वर्षों में इस नियम की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे थे। कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या संतुलन को लेकर तीन बच्चों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घटती प्रजनन दर को समाज के लिए चिंता का विषय बताया, जिसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हुई।

अन्य राज्यों में पहले ही हट चुका है नियम

राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने पहले ही इस पाबंदी को खत्म कर दिया है। इन राज्यों में तीन बच्चों वाले कर्मचारी बिना किसी रोक-टोक के नौकरी कर रहे हैं। वहीं आंध्र प्रदेश ने तो तीसरे बच्चे पर प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/government-job-will-not-go-to-more-than-2-children/article-49278

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