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बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव: धीरेंद्र शास्त्री ने की सन्यासी बाबा की पादुकाओं की शाही पूजा
Chhatarpur, MP
बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव की शुरुआत मंगलवार को सन्यासी बाबा की पवित्र पादुकाओं के पूजन से हुई।
धीरेंद्र शास्त्री ने पहले बागेश्वर बालाजी की पूजा कर आशीर्वाद लिया, इसके बाद सन्यासी बाबा की पादुकाएं सिर पर रखकर शाही सवारी के साथ पंडाल पहुंचे। वहां आचार्यों द्वारा पारंपरिक विधि से पूजन संपन्न कराया गया।
इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और पंडाल परिसर ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजता रहा।
धीरेंद्र शास्त्री बोले— आज भी बाबा का ही शिष्य हूं
मंच से संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा—
“मैं आज भी सन्यासी बाबा का शिष्य हूं। उन्हीं की कृपा से हर संकट मिटता है। गुरु की दीक्षा से ही जीवन में दिशा मिलती है और गुरु के वचन ही हमारे लिए मंत्र समान होते हैं।”
उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा आत्मचिंतन और कृतज्ञता का पर्व है, जिसे सभी को हृदय से मनाना चाहिए।
देशभर से आए सुंदरकांड मंडलों का हुआ भव्य पाठ
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में देशभर के 6 राज्यों – दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और तमिलनाडु से पहुंचे सुंदरकांड मंडलों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया। इस अद्भुत आयोजन में भक्ति और श्रद्धा का संगम देखने को मिला।
धीरेंद्र शास्त्री ने इन मंडलों की बैठक लेकर उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित सुंदरकांड पाठ आयोजित करने, सनातन धर्म के प्रचार और आगामी नवंबर में होने वाली पदयात्रा में भाग लेने का आह्वान किया।
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बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव: धीरेंद्र शास्त्री ने की सन्यासी बाबा की पादुकाओं की शाही पूजा
Chhatarpur, MP
धीरेंद्र शास्त्री ने पहले बागेश्वर बालाजी की पूजा कर आशीर्वाद लिया, इसके बाद सन्यासी बाबा की पादुकाएं सिर पर रखकर शाही सवारी के साथ पंडाल पहुंचे। वहां आचार्यों द्वारा पारंपरिक विधि से पूजन संपन्न कराया गया।
इस भव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और पंडाल परिसर ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजता रहा।
धीरेंद्र शास्त्री बोले— आज भी बाबा का ही शिष्य हूं
मंच से संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा—
“मैं आज भी सन्यासी बाबा का शिष्य हूं। उन्हीं की कृपा से हर संकट मिटता है। गुरु की दीक्षा से ही जीवन में दिशा मिलती है और गुरु के वचन ही हमारे लिए मंत्र समान होते हैं।”
उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा आत्मचिंतन और कृतज्ञता का पर्व है, जिसे सभी को हृदय से मनाना चाहिए।
देशभर से आए सुंदरकांड मंडलों का हुआ भव्य पाठ
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में देशभर के 6 राज्यों – दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और तमिलनाडु से पहुंचे सुंदरकांड मंडलों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया। इस अद्भुत आयोजन में भक्ति और श्रद्धा का संगम देखने को मिला।
धीरेंद्र शास्त्री ने इन मंडलों की बैठक लेकर उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित सुंदरकांड पाठ आयोजित करने, सनातन धर्म के प्रचार और आगामी नवंबर में होने वाली पदयात्रा में भाग लेने का आह्वान किया।
