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NDPS केस में जांच पर ग्वालियर हाईकोर्ट सख्त: शिवपुरी के TI सहित पांच अफसर लाइन अटैच
ग्वालियर (म. प्र.)
1209 किलो पोस्त भूसी तस्करी मामले में 62 सैंपल बैग गायब; विभागीय जांच के आदेश, तीन माह में रिपोर्ट तलब
ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने शिवपुरी के एक एनडीपीएस मामले में पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट की टिप्पणी के बाद शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने तत्काल प्रभाव से देहात थाना प्रभारी समेत पांच अधिकारियों को लाइन अटैच कर दिया है। मामला 1209 किलोग्राम पोस्त भूसी की तस्करी से जुड़ा है, जिसमें थाने से 62 सैंपल बैग के गायब होने की बात सामने आई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जांच सच्चाई सामने लाने के बजाय उसे छिपाने जैसी प्रतीत होती है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में पुलिस केवल ड्राइवर या कैरियर तक कार्रवाई सीमित कर देती है, जबकि तस्करी के मुख्य सरगना तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया जाता। न्यायालय ने इसे गंभीर जांचीय कमी मानते हुए सख्त रुख अपनाया।
मामले के प्रमुख तथ्य
प्रकरण इंदौर से चंडीगढ़ भेजी जा रही 1209 किलो पोस्त भूसी की जब्ती से संबंधित है। अदालत ने पाया कि न तो माल भेजने वालों की समुचित जांच हुई और न ही प्राप्तकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट की गई। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि जब्त मादक पदार्थ से जुड़े 62 सैंपल बैग थाने से गायब पाए गए। पुलिस ने 17 जनवरी 2025 को सामग्री के निस्तारण का हवाला दिया, जबकि सैंपल बैग उपलब्ध नहीं थे और ट्रायल कोर्ट में जब्त सामग्री प्रस्तुत भी नहीं की गई।
विभागीय जांच और प्रशासनिक कदम
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि उस समय पदस्थ थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें किसी थाने का प्रभार न दिया जाए। कोर्ट ने तीन माह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही प्रमुख सचिव (गृह), डीजीपी भोपाल और एडीजी नारकोटिक्स इंदौर को निर्देशित किया गया है कि सभी जिलों में एनडीपीएस मामलों में ‘एपेक्स परपेरेटर्स’ की पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु सख्त परिपत्र जारी किया जाए। अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित है।
एसपी राठौड़ ने देहात थाना प्रभारी जितेंद्र मावई, उप निरीक्षक राघवेंद्र यादव और हरिशंकर शर्मा को लाइन अटैच किया है। इसके अतिरिक्त बालाघाट में पदस्थ उप निरीक्षक अंकित उपाध्याय और राजगढ़ में पदस्थ निरीक्षक मनीष शर्मा पर भी समान कार्रवाई की गई है। दो संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने 26 सितंबर 2025 को आरोपी जगशीर को धारा 8/15(सी) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा स्थगन संबंधी अर्जी बाद में वापस ले ली गई थी।
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