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एमपी का सबसे प्रदूषित शहर ग्वालियर, भोपाल मॉडरेट कैटेगिरी में
मध्यप्रदेश का जिला ग्वालियर इन दिनों खासी चर्चाओं में है। कभी राजनीति को लेकर तो कभी बढ़ते प्रदूषण को लेकर। एमपीपीसीबी द्वारा जारी रिपोर्ट ने ग्वालियर को एमपी का सबसे प्रदूषित शहर बताया है।
भोपाल मॉडरेट कैटेगिरी में
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2023–24 के लिए रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में भोपाल इंदौर जबलपुर मॉडरेट कैटेगरी में हैं। उज्जैन की स्थिति भी इस रिपोर्ट में ठीक-ठाक बताई गई है। सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने वाले पीएम 10 घटक काफी खतरनाक होते हैं, जो छोटे बच्चों और सीनियर सिटीजन के लिए बड़ा खतरा भी साबित हो सकते हैं। पीएम 10 कणों से सबसे ज्यादा नुकसान अस्थमा के मरीजों को होता है।
क्या है ग्वालियर में प्रदूषण बढ़ने की वजह
प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला अत्यधिक हानिकारक धुआं और टूटी-फूटी सड़कें हैं, जिन पर दिन भर धूल उड़ती रहती है। इतना ही नहीं शहर में चल रहे कंस्ट्रक्शन वर्क भी इस प्रदूषण के बड़े कारण हैं। अधिकांश स्थानों पर कंस्ट्रक्शन बिना किसी सुरक्षा इंतजाम और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने वाले नियमों को ताक पर रख कर किए जा रहे हैं। शहर में कई साल पुरानी गाड़ियां आज भी दौड़ रही हैं, जो प्रदूषण बढ़ाने में सहायक हैं।
गंभीर बीमारियों का कारक है पीएम 10
बताया जा रहा है कि पीएम 10 के तत्व सांस के जरिए हमारे ब्लड सर्कुलेशन में चले जाते हैं और कई गंभीर बीमारियों के लिए कारण बन जाते हैं, जिनका असर हमें बाहरी त्वचा पर भी कई बार देखने को मिलता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए होती है।
डॉक्टर्स की सलाह 'मास्क पहनें'
डॉक्टर्स की मानें तो इस तरह के प्रदूषण से जहां एक तरफ सांस लेने में तकलीफ होती है तो वहीं कई बार गाड़ियां चलाते हुए या पैदल चलते हुए आंखों में इरिटेशन भी होने लगता है। सड़कों पर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें ताकि ये हानिकारक तत्व आपके भीतर जाने से बच सकें।
क्या कह रहे एक्सपर्ट
एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरआर सिंह सेंगर की मानें तो प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भी ग्वालियर की ओर ध्यान देना चाहिए। उड़ती हुई धूल को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर छिड़काव होना चाहिए। निर्माण कार्यों को लेकर भी सतर्कता बरती जानी चाहिए।
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एमपी का सबसे प्रदूषित शहर ग्वालियर, भोपाल मॉडरेट कैटेगिरी में
भोपाल मॉडरेट कैटेगिरी में
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साल 2023–24 के लिए रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में भोपाल इंदौर जबलपुर मॉडरेट कैटेगरी में हैं। उज्जैन की स्थिति भी इस रिपोर्ट में ठीक-ठाक बताई गई है। सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने वाले पीएम 10 घटक काफी खतरनाक होते हैं, जो छोटे बच्चों और सीनियर सिटीजन के लिए बड़ा खतरा भी साबित हो सकते हैं। पीएम 10 कणों से सबसे ज्यादा नुकसान अस्थमा के मरीजों को होता है।
क्या है ग्वालियर में प्रदूषण बढ़ने की वजह
प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला अत्यधिक हानिकारक धुआं और टूटी-फूटी सड़कें हैं, जिन पर दिन भर धूल उड़ती रहती है। इतना ही नहीं शहर में चल रहे कंस्ट्रक्शन वर्क भी इस प्रदूषण के बड़े कारण हैं। अधिकांश स्थानों पर कंस्ट्रक्शन बिना किसी सुरक्षा इंतजाम और पर्यावरण प्रदूषण को रोकने वाले नियमों को ताक पर रख कर किए जा रहे हैं। शहर में कई साल पुरानी गाड़ियां आज भी दौड़ रही हैं, जो प्रदूषण बढ़ाने में सहायक हैं।
गंभीर बीमारियों का कारक है पीएम 10
बताया जा रहा है कि पीएम 10 के तत्व सांस के जरिए हमारे ब्लड सर्कुलेशन में चले जाते हैं और कई गंभीर बीमारियों के लिए कारण बन जाते हैं, जिनका असर हमें बाहरी त्वचा पर भी कई बार देखने को मिलता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए होती है।
डॉक्टर्स की सलाह 'मास्क पहनें'
डॉक्टर्स की मानें तो इस तरह के प्रदूषण से जहां एक तरफ सांस लेने में तकलीफ होती है तो वहीं कई बार गाड़ियां चलाते हुए या पैदल चलते हुए आंखों में इरिटेशन भी होने लगता है। सड़कों पर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें ताकि ये हानिकारक तत्व आपके भीतर जाने से बच सकें।
क्या कह रहे एक्सपर्ट
एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरआर सिंह सेंगर की मानें तो प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भी ग्वालियर की ओर ध्यान देना चाहिए। उड़ती हुई धूल को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर छिड़काव होना चाहिए। निर्माण कार्यों को लेकर भी सतर्कता बरती जानी चाहिए।
