- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- ग्वालियर: अज्ञात लाशों को महीनों बाद भी न्याय की आस, हत्यारे घूम रहे खुलेआम
ग्वालियर: अज्ञात लाशों को महीनों बाद भी न्याय की आस, हत्यारे घूम रहे खुलेआम
Gwalior, MP
ग्वालियर पुलिस ने भले ही क्राइम के कई बड़े मामलों का खुलासा करने के बाद वाहवाही लूटी हो लेकिन आज भी कई ऐसे केस हैं जिनके पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार है.
ग्वालियर में अपराध की घटनाओं का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है. आए दिन लोगों के साथ मारपीट, लूट और हत्या जैसी वारदातें घटित हो रही हैं. पिछले साल यहां लगभग 29 हत्या के मामले दर्ज किए गए. इनमें कुछ हत्याएं ऐसी हैं जो अभी भी पुलिस के लिए पहले बनी हुई हैं. इनमें चार साल के मासूम बच्चे और घाटीगांव की नदी में मिली युवती की लाश भी शामिल है. जो लगभग 8 महीने बाद भी शिनाख्त को लेकर कानून के लिए चुनौती बनी हुई हैं.
ग्वालियर पुलिस के समक्ष बीते साल लगभग 29 हत्याओं के मामले सामने आए थे
उल्लेखनीय है कि बीते साल लगभग 29 हत्याओं के मामले सामने आए थे. जिनमें कई मामलों में पुलिस को सफलता हाथ लगी लेकिन दो ऐसे मामले भी हैं जिनमें पुलिस के हाथ आज भी खाली हैं. ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी पुलिस मरने वालों की पहचान ही नहीं कर सकी है.
पहली घटना 19 जुलाई बहोड़ापुर थाना क्षेत्र की है. जहां मासूम की लाश को हत्यारे बैग में ठूंस कर यातायात नगर में फेंक कर फरार हो गए थे. सुबह दुकानें खुलीं तब बैग नजर में आया. लोगों को शक होने पर पुलिस को बुलाकर उसे खुलवाया तो अंदर बच्चे की लाश थी. हत्यारों ने उसे बैग में ठूंसने के लिए बच्चे का एक पैर और हाथ भी बांध दिया था. लेकिन इस दर्दनाक वारदात का पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है.
16 सितंबर को घैघोंली गांव के पास नदी किनारे बोरे में बंद एक युवती की मिली थी लाश
दूसरी घटना 16 सितंबर को घाटीगांव थाना क्षेत्र के घैघोंली गांव के पास नदी किनारे सुबह बोरे में बंद एक युवती की लाश मिली थी. जो आज भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है. हत्यारों ने लाश को बोरे में ठूंस कर दोनों तरफ से सिलकर नदी में फेंका था. बोरे पर लगे टैग को देखकर पुलिस ने इस मामले में काफी प्रयास कर इटावा मथुरा तक दौड़ लगाई, लेकिन उसका कुछ सुराग हाथ नहीं लगा.
इस मामले में रेंज के आईजी अरविंद सक्सेना का कहना है "कुछ मामलों में पुलिस की विवेचना इसलिए आगे नहीं बढ़ पाती क्योंकि मृतकों की पहचान नहीं हो पाती. पहचान के लिए पुलिस अपने स्तर पर हर तरह के प्रयास करती है लेकिन फिर भी कई बार मामले उलझ जाते हैं. लेकिन पुलिस नाउम्मीद नहीं है."
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
ग्वालियर: अज्ञात लाशों को महीनों बाद भी न्याय की आस, हत्यारे घूम रहे खुलेआम
Gwalior, MP
ग्वालियर में अपराध की घटनाओं का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है. आए दिन लोगों के साथ मारपीट, लूट और हत्या जैसी वारदातें घटित हो रही हैं. पिछले साल यहां लगभग 29 हत्या के मामले दर्ज किए गए. इनमें कुछ हत्याएं ऐसी हैं जो अभी भी पुलिस के लिए पहले बनी हुई हैं. इनमें चार साल के मासूम बच्चे और घाटीगांव की नदी में मिली युवती की लाश भी शामिल है. जो लगभग 8 महीने बाद भी शिनाख्त को लेकर कानून के लिए चुनौती बनी हुई हैं.
ग्वालियर पुलिस के समक्ष बीते साल लगभग 29 हत्याओं के मामले सामने आए थे
उल्लेखनीय है कि बीते साल लगभग 29 हत्याओं के मामले सामने आए थे. जिनमें कई मामलों में पुलिस को सफलता हाथ लगी लेकिन दो ऐसे मामले भी हैं जिनमें पुलिस के हाथ आज भी खाली हैं. ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी पुलिस मरने वालों की पहचान ही नहीं कर सकी है.
पहली घटना 19 जुलाई बहोड़ापुर थाना क्षेत्र की है. जहां मासूम की लाश को हत्यारे बैग में ठूंस कर यातायात नगर में फेंक कर फरार हो गए थे. सुबह दुकानें खुलीं तब बैग नजर में आया. लोगों को शक होने पर पुलिस को बुलाकर उसे खुलवाया तो अंदर बच्चे की लाश थी. हत्यारों ने उसे बैग में ठूंसने के लिए बच्चे का एक पैर और हाथ भी बांध दिया था. लेकिन इस दर्दनाक वारदात का पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है.
16 सितंबर को घैघोंली गांव के पास नदी किनारे बोरे में बंद एक युवती की मिली थी लाश
दूसरी घटना 16 सितंबर को घाटीगांव थाना क्षेत्र के घैघोंली गांव के पास नदी किनारे सुबह बोरे में बंद एक युवती की लाश मिली थी. जो आज भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है. हत्यारों ने लाश को बोरे में ठूंस कर दोनों तरफ से सिलकर नदी में फेंका था. बोरे पर लगे टैग को देखकर पुलिस ने इस मामले में काफी प्रयास कर इटावा मथुरा तक दौड़ लगाई, लेकिन उसका कुछ सुराग हाथ नहीं लगा.
इस मामले में रेंज के आईजी अरविंद सक्सेना का कहना है "कुछ मामलों में पुलिस की विवेचना इसलिए आगे नहीं बढ़ पाती क्योंकि मृतकों की पहचान नहीं हो पाती. पहचान के लिए पुलिस अपने स्तर पर हर तरह के प्रयास करती है लेकिन फिर भी कई बार मामले उलझ जाते हैं. लेकिन पुलिस नाउम्मीद नहीं है."
