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एमपी के 23 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 3 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी; 17 अगस्त तक तेज बरसात के आसार
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ने वाला है। मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 23 जिलों में भारी बारिश और देवास, खंडवा, बुरहानपुर में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। 17 अगस्त तक तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे स्वतंत्रता दिवस के बाद भी कई इलाकों में भीगते जश्न का नजारा देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, देवास, खंडवा और बुरहानपुर में अगले 24 घंटों के भीतर 8.5 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं, इंदौर, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, नीमच, मंदसौर, सीहोर, हरदा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में 4.5 इंच तक बारिश का अनुमान है। भोपाल, ग्वालियर समेत अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
गुरुवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। पचमढ़ी में 1.75 इंच, गुना में 1.5 इंच और इंदौर में आधा इंच पानी दर्ज हुआ। बैतूल, दतिया, नर्मदापुरम, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, टीकमगढ़, शाजापुर समेत कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश होती रही।
बारिश के पीछे के सिस्टम:
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, मध्यप्रदेश से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसके अलावा एक सक्रिय मानसून ट्रफ और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के साथ लो-प्रेशर एरिया का प्रभाव भी बना हुआ है। यही कारण है कि प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हैं।
अब तक का मानसून रिकॉर्ड:
प्रदेश में औसतन 37 इंच बारिश होती है, जबकि अब तक 30.3 इंच पानी गिर चुका है, जो 82% कोटा है। अभी कोटे से केवल 6.7 इंच की कमी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों की तेज झड़ी से यह अंतर भी पूरा हो जाएगा।
इस बार ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का कोटा पहले ही पूरा हो चुका है। पूर्वी एमपी (जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा) में औसत से 33% अधिक और पश्चिमी एमपी (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, नर्मदापुरम) में 21% अधिक वर्षा हुई है। कुल मिलाकर प्रदेश में 27% ज्यादा बारिश हो चुकी है।
कहां सबसे ज्यादा, कहां सबसे कम:
मंडला और गुना इस बार सबसे आगे हैं, जहां 46 इंच से अधिक पानी गिर चुका है। निवाड़ी में 45.6 इंच, टीकमगढ़ में 45.2 इंच और अशोकनगर में 42.9 इंच बारिश दर्ज हुई है। विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। वहीं, इंदौर संभाग सबसे पीछे है।
भोपाल का बारिश रिकॉर्ड:
भोपाल में अगस्त 2006 में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जिसमें सिर्फ 14 अगस्त को 12 इंच वर्षा हुई थी। सामान्यत: अगस्त में राजधानी में 14 दिन बारिश होती है, जबकि इस बार 13 दिन में पानी गिर चुका है।
अगले दिनों का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 17 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा और कई जिलों में तेज बारिश से जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। नागरिकों को सतर्क रहने, निचले इलाकों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
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एमपी के 23 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 3 जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी; 17 अगस्त तक तेज बरसात के आसार
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ने वाला है। मौसम विभाग ने इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत 23 जिलों में भारी बारिश और देवास, खंडवा, बुरहानपुर में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। 17 अगस्त तक तेज बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे स्वतंत्रता दिवस के बाद भी कई इलाकों में भीगते जश्न का नजारा देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, देवास, खंडवा और बुरहानपुर में अगले 24 घंटों के भीतर 8.5 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं, इंदौर, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, नीमच, मंदसौर, सीहोर, हरदा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, जबलपुर, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में 4.5 इंच तक बारिश का अनुमान है। भोपाल, ग्वालियर समेत अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
गुरुवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहा। पचमढ़ी में 1.75 इंच, गुना में 1.5 इंच और इंदौर में आधा इंच पानी दर्ज हुआ। बैतूल, दतिया, नर्मदापुरम, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, टीकमगढ़, शाजापुर समेत कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश होती रही।
बारिश के पीछे के सिस्टम:
सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, मध्यप्रदेश से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसके अलावा एक सक्रिय मानसून ट्रफ और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के साथ लो-प्रेशर एरिया का प्रभाव भी बना हुआ है। यही कारण है कि प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हैं।
अब तक का मानसून रिकॉर्ड:
प्रदेश में औसतन 37 इंच बारिश होती है, जबकि अब तक 30.3 इंच पानी गिर चुका है, जो 82% कोटा है। अभी कोटे से केवल 6.7 इंच की कमी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों की तेज झड़ी से यह अंतर भी पूरा हो जाएगा।
इस बार ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का कोटा पहले ही पूरा हो चुका है। पूर्वी एमपी (जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा) में औसत से 33% अधिक और पश्चिमी एमपी (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, नर्मदापुरम) में 21% अधिक वर्षा हुई है। कुल मिलाकर प्रदेश में 27% ज्यादा बारिश हो चुकी है।
कहां सबसे ज्यादा, कहां सबसे कम:
मंडला और गुना इस बार सबसे आगे हैं, जहां 46 इंच से अधिक पानी गिर चुका है। निवाड़ी में 45.6 इंच, टीकमगढ़ में 45.2 इंच और अशोकनगर में 42.9 इंच बारिश दर्ज हुई है। विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। वहीं, इंदौर संभाग सबसे पीछे है।
भोपाल का बारिश रिकॉर्ड:
भोपाल में अगस्त 2006 में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जिसमें सिर्फ 14 अगस्त को 12 इंच वर्षा हुई थी। सामान्यत: अगस्त में राजधानी में 14 दिन बारिश होती है, जबकि इस बार 13 दिन में पानी गिर चुका है।
अगले दिनों का पूर्वानुमान:
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 17 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा और कई जिलों में तेज बारिश से जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। नागरिकों को सतर्क रहने, निचले इलाकों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
