एसिड अटैक पीड़ित मासूम के इलाज पर हाईकोर्ट सख्त, निजी अस्पताल में भर्ती के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार वर्षीय बच्ची के बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल में तत्काल भर्ती कराने का आदेश दिया, खर्च आयुष्मान योजना और जरूरत पड़ने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उठाएगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बड़वानी जिले में एसिड अटैक का शिकार हुई चार वर्षीय बच्ची के इलाज को लेकर अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने बच्ची को तत्काल इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कर समुचित इलाज शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उपचार के दौरान पीड़ित परिवार से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इलाज का खर्च पहले आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत वहन किया जाएगा और यदि किसी विशेष सर्जरी या अतिरिक्त चिकित्सा पर बीमा राशि से अधिक खर्च आता है तो उसकी व्यवस्था जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करेगा। यह मामला उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है जिसमें 29 मई को हुए एसिड अटैक में चार वर्षीय बच्ची, उसका छह वर्षीय भाई और उनकी मां गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्रारंभिक इलाज बड़वानी जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया, लेकिन वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार ने बेहतर उपचार की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया कि तीनों घायलों को लंबे समय तक विशेष बर्न ट्रीटमेंट की जरूरत है, जो इंदौर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपलब्ध है। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता शन्नो शगुफ्ता खान ने अस्पताल के बर्न वार्ड की तस्वीरें अदालत के सामने रखीं और वहां की साफ-सफाई तथा रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए। तस्वीरों में वार्ड की दीवारों पर फंगल संक्रमण के निशान और चूहों की मौजूदगी का दावा किया गया, जिस पर अदालत ने भी गंभीरता दिखाई। याचिकाकर्ता का कहना था कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए संक्रमण सबसे बड़ा खतरा होता है और यदि ऐसे वातावरण में उनका इलाज किया जाएगा तो उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है।

मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टरों की समिति की रिपोर्ट भी अदालत के सामने रखी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों बच्चों को गंभीर बर्न इंजरी हुई है और यदि उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तो सेप्सिस, सेप्टिक शॉक और अन्य जटिल मेडिकल समस्याएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। अदालत ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले 'लक्ष्मी बनाम भारत संघ' का भी उल्लेख किया। इस फैसले में सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया था कि एसिड अटैक पीड़ितों को निजी अस्पतालों में भी निशुल्क और संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसमें दवाइयां, ऑपरेशन, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, भोजन और अस्पताल में भर्ती रहने की सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत इस मामले में भी लागू होगा और किसी भी हालत में पीड़ित परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि पीड़ित परिवार के पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड उपलब्ध है, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कराया जा सकता है। कोर्ट ने अस्पताल को निर्देश दिया कि इलाज का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए। यदि इलाज की लागत बीमा सीमा से अधिक होती है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आवश्यक राशि उपलब्ध कराएगा।

हाईकोर्ट ने 24 जून को पारित अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्ची को उसी दिन अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया जाए और किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हर जरूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए। इस मामले में याचिका के जरिए मांगी गई अन्य राहतों पर भी अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कानूनी यह आदेश केवल एक पीड़ित परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में एसिड अटैक पीड़ितों के उपचार से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में इलाज की गुणवत्ता और समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए शुरुआती उपचार ही आगे की जिंदगी तय करता है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार सर्वोपरि है और यदि सरकारी व्यवस्था में किसी स्तर पर कमी दिखाई देती है तो न्यायालय आवश्यक हस्तक्षेप कर पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा कर सकता है। 

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26 Jun 2026 By Vaishnavi.J

एसिड अटैक पीड़ित मासूम के इलाज पर हाईकोर्ट सख्त, निजी अस्पताल में भर्ती के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बड़वानी जिले में एसिड अटैक का शिकार हुई चार वर्षीय बच्ची के इलाज को लेकर अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने बच्ची को तत्काल इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कर समुचित इलाज शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उपचार के दौरान पीड़ित परिवार से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इलाज का खर्च पहले आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत वहन किया जाएगा और यदि किसी विशेष सर्जरी या अतिरिक्त चिकित्सा पर बीमा राशि से अधिक खर्च आता है तो उसकी व्यवस्था जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करेगा। यह मामला उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है जिसमें 29 मई को हुए एसिड अटैक में चार वर्षीय बच्ची, उसका छह वर्षीय भाई और उनकी मां गंभीर रूप से झुलस गए थे। प्रारंभिक इलाज बड़वानी जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया, लेकिन वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार ने बेहतर उपचार की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश मेडिकल रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया कि तीनों घायलों को लंबे समय तक विशेष बर्न ट्रीटमेंट की जरूरत है, जो इंदौर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपलब्ध है। हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता शन्नो शगुफ्ता खान ने अस्पताल के बर्न वार्ड की तस्वीरें अदालत के सामने रखीं और वहां की साफ-सफाई तथा रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए। तस्वीरों में वार्ड की दीवारों पर फंगल संक्रमण के निशान और चूहों की मौजूदगी का दावा किया गया, जिस पर अदालत ने भी गंभीरता दिखाई। याचिकाकर्ता का कहना था कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए संक्रमण सबसे बड़ा खतरा होता है और यदि ऐसे वातावरण में उनका इलाज किया जाएगा तो उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है।

मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टरों की समिति की रिपोर्ट भी अदालत के सामने रखी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों बच्चों को गंभीर बर्न इंजरी हुई है और यदि उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तो सेप्सिस, सेप्टिक शॉक और अन्य जटिल मेडिकल समस्याएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। अदालत ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले 'लक्ष्मी बनाम भारत संघ' का भी उल्लेख किया। इस फैसले में सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया था कि एसिड अटैक पीड़ितों को निजी अस्पतालों में भी निशुल्क और संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसमें दवाइयां, ऑपरेशन, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, भोजन और अस्पताल में भर्ती रहने की सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत इस मामले में भी लागू होगा और किसी भी हालत में पीड़ित परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि पीड़ित परिवार के पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड उपलब्ध है, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कराया जा सकता है। कोर्ट ने अस्पताल को निर्देश दिया कि इलाज का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए। यदि इलाज की लागत बीमा सीमा से अधिक होती है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आवश्यक राशि उपलब्ध कराएगा।

हाईकोर्ट ने 24 जून को पारित अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्ची को उसी दिन अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया जाए और किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हर जरूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए। इस मामले में याचिका के जरिए मांगी गई अन्य राहतों पर भी अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कानूनी यह आदेश केवल एक पीड़ित परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में एसिड अटैक पीड़ितों के उपचार से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में इलाज की गुणवत्ता और समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए शुरुआती उपचार ही आगे की जिंदगी तय करता है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार सर्वोपरि है और यदि सरकारी व्यवस्था में किसी स्तर पर कमी दिखाई देती है तो न्यायालय आवश्यक हस्तक्षेप कर पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा कर सकता है। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/high-court-gave-strict-instructions-on-the-treatment-of-acid/article-56990

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