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सीमांकन विवाद में किसान ने पीया ज़हर: अधिकारियों के सामने ज़मीन पर तड़पता रहा, प्रशासन बना रहा मूकदर्शक
vidisha, MP
मध्यप्रदेश के विदिशा ज़िले में ज़मीन सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद ने एक किसान को आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। सिरोंज तहसील के बेरखेड़ी गांव में शनिवार को किसान अरविंद शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के सामने ही ज़हरीला पदार्थ पी लिया।
हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद किसी भी अधिकारी या कर्मी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की, जिससे वह काफी देर तक ज़मीन पर तड़पता रहा।
सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान सामने आई घटना
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब गांव में नायब तहसीलदार ललित सक्सेना, पटवारी और राजस्व निरीक्षक पुलिस बल के साथ सीमांकन कार्य के लिए पहुंचे थे। किसान अरविंद शर्मा भी वहीं मौजूद थे। सीमांकन के तरीके से असंतुष्ट किसान ने अचानक ज़हर पी लिया। प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने रहे और जब तक कुछ किया जाता, उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी।
गंभीर हालत में किया गया रेफर
घटना के बाद किसान को तत्काल सिरोंज के शासकीय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में उसका इलाज जारी है।
फर्जी नक्शा तैयार करने का आरोप
पीड़ित के भाई प्रदीप शर्मा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले ज़मीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन और ऑफलाइन दस्तावेजों में स्पष्ट था, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से नक्शे में बदलाव कर उसे मिटा दिया गया। जब उन्होंने सीमांकन को लेकर सवाल किए, तो अधिकारियों ने कहा कि अरविंद शर्मा की कोई ज़मीन है ही नहीं।
प्रशासन ने दी सफाई
नायब तहसीलदार ललित सक्सेना का कहना है कि किसान का सीमांकन पूर्व में दो बार किया जा चुका है, लेकिन वह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके तहत दोबारा सीमांकन किया जा रहा था। अधिकारी ने दावा किया कि सीमांकन के दौरान किसान अचानक कहीं भागा और लौटकर आकर कोई पदार्थ पी लिया। नक्शे में गड़बड़ी के आरोप पर उनका कहना था कि किसान को उचित प्रक्रिया से आवेदन देने की सलाह दी गई थी।
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सीमांकन विवाद में किसान ने पीया ज़हर: अधिकारियों के सामने ज़मीन पर तड़पता रहा, प्रशासन बना रहा मूकदर्शक
vidisha, MP
हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद किसी भी अधिकारी या कर्मी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की, जिससे वह काफी देर तक ज़मीन पर तड़पता रहा।
सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान सामने आई घटना
मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब गांव में नायब तहसीलदार ललित सक्सेना, पटवारी और राजस्व निरीक्षक पुलिस बल के साथ सीमांकन कार्य के लिए पहुंचे थे। किसान अरविंद शर्मा भी वहीं मौजूद थे। सीमांकन के तरीके से असंतुष्ट किसान ने अचानक ज़हर पी लिया। प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने रहे और जब तक कुछ किया जाता, उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी।
गंभीर हालत में किया गया रेफर
घटना के बाद किसान को तत्काल सिरोंज के शासकीय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे विदिशा जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल में उसका इलाज जारी है।
फर्जी नक्शा तैयार करने का आरोप
पीड़ित के भाई प्रदीप शर्मा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले ज़मीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन और ऑफलाइन दस्तावेजों में स्पष्ट था, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से नक्शे में बदलाव कर उसे मिटा दिया गया। जब उन्होंने सीमांकन को लेकर सवाल किए, तो अधिकारियों ने कहा कि अरविंद शर्मा की कोई ज़मीन है ही नहीं।
प्रशासन ने दी सफाई
नायब तहसीलदार ललित सक्सेना का कहना है कि किसान का सीमांकन पूर्व में दो बार किया जा चुका है, लेकिन वह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके तहत दोबारा सीमांकन किया जा रहा था। अधिकारी ने दावा किया कि सीमांकन के दौरान किसान अचानक कहीं भागा और लौटकर आकर कोई पदार्थ पी लिया। नक्शे में गड़बड़ी के आरोप पर उनका कहना था कि किसान को उचित प्रक्रिया से आवेदन देने की सलाह दी गई थी।
