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रीवा में गहराता जल संकट: 3000 से अधिक हैंडपंप हुए ठप, ग्रामीण इलाकों में मवेशी भी हो रहे प्यासे
Rewa, MP
अप्रैल की शुरुआत के साथ ही सूरज ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं और गर्मी के शुरुआती झोंकों ने ही यह संकेत दे दिया है कि इस बार मौसम का मिजाज कुछ ज्यादा ही सख्त रहने वाला है। इसी के साथ रीवा जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है। जिले के 3000 से अधिक हैंडपंप अब हवा उगलने लगे हैं, जिनमें से 1000 से 1500 हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं और इन्हें ‘ड्राई’ घोषित किया जा चुका है।
ग्रामीण अंचलों में गंभीर हालात
सबसे चिंताजनक स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है, जहां जलस्तर 80 से लेकर 170 फीट तक नीचे चला गया है। सिरमौर, सेमरिया, जवा और रायपुर कर्चुलियान जैसे इलाकों में स्थिति और भी खराब है। रायपुर कर्चुलियान में जलस्तर 180 फीट तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई गांवों में हैंडपंप और मोटरपंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जिसके कारण लोग कई किलोमीटर दूर से पानी लाकर गुजारा कर रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई बार मवेशी तक कई दिन प्यासे रह जाते हैं।
कम वर्षा बनी संकट की वजह
अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल जिले में औसत से कम वर्षा हुई थी। जहां सामान्य बारिश 1000 मिमी होती है, वहीं इस बार सिर्फ 650 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसका सीधा असर जलस्तर पर पड़ा और गर्मी शुरू होते ही हालात बिगड़ने लगे।
प्रशासन कर रहा प्रयास
जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन सक्रिय हुआ है। पीएचई विभाग की टीम बंद पड़े हैंडपंपों को राइजर पाइप बढ़ाकर फिर से चालू करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 1500 से 2000 हैंडपंपों को फिर से चालू कर दिया गया है। रोजाना 5 से 6 हैंडपंपों की मरम्मत की जा रही है और पूरे अभियान की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है।
जनजीवन पर असर
जल संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटकते हैं। यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो गर्मी के आगामी महीनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
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रीवा में गहराता जल संकट: 3000 से अधिक हैंडपंप हुए ठप, ग्रामीण इलाकों में मवेशी भी हो रहे प्यासे
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ग्रामीण अंचलों में गंभीर हालात
सबसे चिंताजनक स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है, जहां जलस्तर 80 से लेकर 170 फीट तक नीचे चला गया है। सिरमौर, सेमरिया, जवा और रायपुर कर्चुलियान जैसे इलाकों में स्थिति और भी खराब है। रायपुर कर्चुलियान में जलस्तर 180 फीट तक पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई गांवों में हैंडपंप और मोटरपंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जिसके कारण लोग कई किलोमीटर दूर से पानी लाकर गुजारा कर रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई बार मवेशी तक कई दिन प्यासे रह जाते हैं।
कम वर्षा बनी संकट की वजह
अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल जिले में औसत से कम वर्षा हुई थी। जहां सामान्य बारिश 1000 मिमी होती है, वहीं इस बार सिर्फ 650 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसका सीधा असर जलस्तर पर पड़ा और गर्मी शुरू होते ही हालात बिगड़ने लगे।
प्रशासन कर रहा प्रयास
जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन सक्रिय हुआ है। पीएचई विभाग की टीम बंद पड़े हैंडपंपों को राइजर पाइप बढ़ाकर फिर से चालू करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 1500 से 2000 हैंडपंपों को फिर से चालू कर दिया गया है। रोजाना 5 से 6 हैंडपंपों की मरम्मत की जा रही है और पूरे अभियान की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है।
जनजीवन पर असर
जल संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटकते हैं। यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो गर्मी के आगामी महीनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
