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शाजापुर में महिलाओं ने जताया विरोध, कहा- मशीनों से नहीं बच्चों को ताजा भोजन चाहिए
Shajapur,MP
राज्य सरकार की प्रस्तावित मैकेनाइज्ड केंद्रीकृत किचन योजना के विरोध में शाजापुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों ने जोरदार आवाज उठाई है।
मंगलवार को दर्जनों महिलाओं ने एसडीएम मनीषा वास्कले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए योजना को तत्काल रोकने की मांग की।
"मशीनों से बने खाने से बच्चों का पोषण प्रभावित होगा"
महिला समूहों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बना ताजा भोजन बच्चों के लिए अधिक पौष्टिक होता है, जबकि मशीनों से तैयार भोजन में पोषण और गुणवत्ता की कमी हो सकती है। उन्होंने चेताया कि इस नई प्रणाली के लागू होने से हजारों महिलाओं का रोजगार छिन सकता है, जो वर्षों से मिड-डे मील और पोषण आहार योजनाओं से जुड़ी हैं।
स्वरोजगार को खतरा, आत्मनिर्भरता पर सवाल
समूहों ने ज्ञापन में कहा कि मैकेनाइज्ड किचन योजना "आत्मनिर्भर भारत" की भावना के विरुद्ध है। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी कमजोर होगी।
पारदर्शिता और ठेकेदारी व्यवस्था पर जताई चिंता
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी रहेगी और ठेकेदारी व बिचौलियों का दखल बढ़ेगा, जिससे भोजन की गुणवत्ता और आपूर्ति दोनों प्रभावित होंगी।
तीन मुख्य मांगे रखीं
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मैकेनाइज्ड किचन योजना को तुरंत स्थगित किया जाए।
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वर्तमान महिला स्व-सहायता समूहों को ही भोजन बनाने का कार्य सौंपा जाए।
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समूहों को तकनीकी व वित्तीय सहयोग देकर सशक्त बनाया जाए।
क्या है मैकेनाइज्ड किचन प्रणाली?
यह एक ऐसी आधुनिक रसोई प्रणाली है जहां भोजन बनाने की हर प्रक्रिया – जैसे सब्जी काटना, आटा गूंथना, दाल-चावल पकाना और बर्तन धोना – मशीनों से की जाती है। एक बार में हजारों थालियों का भोजन तैयार किया जा सकता है। यह प्रणाली अक्षय पात्र, रेलवे बेस किचन और ईशा फाउंडेशन जैसे संगठनों द्वारा संचालित की जा रही है।
हालांकि, ग्रामीण महिलाओं का मानना है कि भले ही यह व्यवस्था आधुनिक हो, लेकिन यह स्थानीय रोजगार, गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिहाज से नुकसानदायक है।
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शाजापुर में महिलाओं ने जताया विरोध, कहा- मशीनों से नहीं बच्चों को ताजा भोजन चाहिए
Shajapur,MP
मंगलवार को दर्जनों महिलाओं ने एसडीएम मनीषा वास्कले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए योजना को तत्काल रोकने की मांग की।
"मशीनों से बने खाने से बच्चों का पोषण प्रभावित होगा"
महिला समूहों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बना ताजा भोजन बच्चों के लिए अधिक पौष्टिक होता है, जबकि मशीनों से तैयार भोजन में पोषण और गुणवत्ता की कमी हो सकती है। उन्होंने चेताया कि इस नई प्रणाली के लागू होने से हजारों महिलाओं का रोजगार छिन सकता है, जो वर्षों से मिड-डे मील और पोषण आहार योजनाओं से जुड़ी हैं।
स्वरोजगार को खतरा, आत्मनिर्भरता पर सवाल
समूहों ने ज्ञापन में कहा कि मैकेनाइज्ड किचन योजना "आत्मनिर्भर भारत" की भावना के विरुद्ध है। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी कमजोर होगी।
पारदर्शिता और ठेकेदारी व्यवस्था पर जताई चिंता
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी रहेगी और ठेकेदारी व बिचौलियों का दखल बढ़ेगा, जिससे भोजन की गुणवत्ता और आपूर्ति दोनों प्रभावित होंगी।
तीन मुख्य मांगे रखीं
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मैकेनाइज्ड किचन योजना को तुरंत स्थगित किया जाए।
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वर्तमान महिला स्व-सहायता समूहों को ही भोजन बनाने का कार्य सौंपा जाए।
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समूहों को तकनीकी व वित्तीय सहयोग देकर सशक्त बनाया जाए।
क्या है मैकेनाइज्ड किचन प्रणाली?
यह एक ऐसी आधुनिक रसोई प्रणाली है जहां भोजन बनाने की हर प्रक्रिया – जैसे सब्जी काटना, आटा गूंथना, दाल-चावल पकाना और बर्तन धोना – मशीनों से की जाती है। एक बार में हजारों थालियों का भोजन तैयार किया जा सकता है। यह प्रणाली अक्षय पात्र, रेलवे बेस किचन और ईशा फाउंडेशन जैसे संगठनों द्वारा संचालित की जा रही है।
हालांकि, ग्रामीण महिलाओं का मानना है कि भले ही यह व्यवस्था आधुनिक हो, लेकिन यह स्थानीय रोजगार, गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिहाज से नुकसानदायक है।
