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सिंगरौली में भालू का हमला: टीचर समेत दो की मौत, घायल अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ रहा
Singrauli, MP
मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में खनुआ गांव के जंगलों में 16 सितंबर को हुए भालू हमले की दहशत अब भी लोगों के बीच बनी हुई है।
इस हमले में अतिथि शिक्षक गणेश बैस और ग्रामीण हीरा अगरिया की मौत हो गई थी, जबकि तीसरा शख्स शिवकुमार पटेल गंभीर रूप से घायल है। घटना के पांच दिन बाद भी वह बैढ़न के एक निजी अस्पताल में भर्ती है और बोलने की स्थिति में नहीं है।
हादसे का दिन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गणेश बैस जंगल से गुजर रहे थे, तभी भालू ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने आए हीरा अगरिया पर भी भालू टूट पड़ा। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, साथ मौजूद शिवकुमार पटेल पर भी हमला हुआ, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया। तीन महिलाएं किसी तरह पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचा सकीं।
घायल की मां की व्यथा
अस्पताल में बैठे घायल शिवकुमार की बुजुर्ग मां रिहुल देवी रोते हुए कहती हैं, “भालू ने मेरे बेटे के सिर पर पंजा मारा और जबड़े में उसका हाथ दबा लिया। जान तो बच गई, लेकिन अब हालत बहुत खराब है। वो मोबाइल तक नहीं पकड़ पा रहा। पता नहीं ठीक होगा या नहीं।”
“भालू पेट भरने के बाद सुस्ता रहा था”
ग्रामीणों का मानना है कि भालू ने पहले ही गणेश बैस को मारकर उनका कुछ हिस्सा खा लिया था और झाड़ियों में सुस्ता रहा था। आहट मिलने पर उसने बाकी लोगों पर हमला कर दिया।
टीचर के घर पसरा सन्नाटा
मृतक अतिथि शिक्षक गणेश बैस के घर मातम पसरा हुआ है। उनके भाई बताते हैं कि गणेश को जंगल में जाना पसंद था। वे अक्सर पहाड़ियों और हरियाली में समय बिताते थे। उनके परिवार की आजीविका सिर्फ उन्हीं पर निर्भर थी। गणेश अपने पीछे दो बेटों को छोड़ गए हैं, जिनकी पढ़ाई अभी जारी है।
मृतक हीरा अगरिया का परिवार बेसहारा
दूसरे मृतक हीरा अगरिया के बेटे श्रीमान कहते हैं, “पिताजी जंगल गए थे, सोचा नहीं था कि वे कभी लौटकर नहीं आएंगे। घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा।” वन विभाग ने फिलहाल 20-20 हजार की तत्काल राहत राशि दी है, जबकि मुआवजे के तौर पर 8 लाख रुपए देने का प्रावधान है।
भालू की भी मौत
घटना के चार दिन बाद हमले में शामिल भालू भी मृत पाया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संभव है उसने मानव मांस खाने के कारण बीमारी का शिकार होकर दम तोड़ा हो। असली कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा।
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इस हमले में अतिथि शिक्षक गणेश बैस और ग्रामीण हीरा अगरिया की मौत हो गई थी, जबकि तीसरा शख्स शिवकुमार पटेल गंभीर रूप से घायल है। घटना के पांच दिन बाद भी वह बैढ़न के एक निजी अस्पताल में भर्ती है और बोलने की स्थिति में नहीं है।
हादसे का दिन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गणेश बैस जंगल से गुजर रहे थे, तभी भालू ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने आए हीरा अगरिया पर भी भालू टूट पड़ा। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, साथ मौजूद शिवकुमार पटेल पर भी हमला हुआ, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया। तीन महिलाएं किसी तरह पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचा सकीं।
घायल की मां की व्यथा
अस्पताल में बैठे घायल शिवकुमार की बुजुर्ग मां रिहुल देवी रोते हुए कहती हैं, “भालू ने मेरे बेटे के सिर पर पंजा मारा और जबड़े में उसका हाथ दबा लिया। जान तो बच गई, लेकिन अब हालत बहुत खराब है। वो मोबाइल तक नहीं पकड़ पा रहा। पता नहीं ठीक होगा या नहीं।”
“भालू पेट भरने के बाद सुस्ता रहा था”
ग्रामीणों का मानना है कि भालू ने पहले ही गणेश बैस को मारकर उनका कुछ हिस्सा खा लिया था और झाड़ियों में सुस्ता रहा था। आहट मिलने पर उसने बाकी लोगों पर हमला कर दिया।
टीचर के घर पसरा सन्नाटा
मृतक अतिथि शिक्षक गणेश बैस के घर मातम पसरा हुआ है। उनके भाई बताते हैं कि गणेश को जंगल में जाना पसंद था। वे अक्सर पहाड़ियों और हरियाली में समय बिताते थे। उनके परिवार की आजीविका सिर्फ उन्हीं पर निर्भर थी। गणेश अपने पीछे दो बेटों को छोड़ गए हैं, जिनकी पढ़ाई अभी जारी है।
मृतक हीरा अगरिया का परिवार बेसहारा
दूसरे मृतक हीरा अगरिया के बेटे श्रीमान कहते हैं, “पिताजी जंगल गए थे, सोचा नहीं था कि वे कभी लौटकर नहीं आएंगे। घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा।” वन विभाग ने फिलहाल 20-20 हजार की तत्काल राहत राशि दी है, जबकि मुआवजे के तौर पर 8 लाख रुपए देने का प्रावधान है।
भालू की भी मौत
घटना के चार दिन बाद हमले में शामिल भालू भी मृत पाया गया। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संभव है उसने मानव मांस खाने के कारण बीमारी का शिकार होकर दम तोड़ा हो। असली कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा।
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