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धान खरीदी में फर्जी रजिस्ट्रेशन के नाम पर होता था करोड़ों का खेल, सरकार ने बचाए 400 करोड़
Jabalpur, MP
जबलपुर में धान खरीदी में फर्जी रजिस्ट्रेशन के नाम पर हर साल करोड़ों का घोटाला हो रहा था. जबकि इस साल सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये की बचत की है.
जबलपुर में पिछले साल की तुलना में इस साल धान खरीदी में सरकार को 400 करोड़ रुपये की बचत हुई है. जबलपुर में पिछले साल 46 हजार किसानों से 5 लाख 46 हजार टन धान की खरीदी की गई थी. जबकि इस साल 51 हजार किसानों से मात्र 3 लाख 70 हजार टन धान की खरीदी की गई. इसके बावजूद पिछले साल की तुलना में एक लाख 70 हजार टन धान की कम खरीदी गई. जिला कलेक्टर का दावा है कि रजिस्ट्रेशन करवाने वाले हर किसान से धान खरीदी गई है.
किसान के नाम पर सक्रिय था माफ़िया
जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना का कहना है "जबलपुर में बड़े पैमाने पर जमीन को किराए पर लेकर पंजीयन किए जाते थे. और जबलपुर में एक हेक्टेयर में 125 क्विंटल तक धान का उत्पादन होने की बात कही जाती थी. जबकि पूरे प्रदेश में 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन माना जाता है, जो वास्तविक है. इस बार की पूरी धान खरीदी उत्पादन के इसी दर को मानते हुए की गई. वहीं दूसरी तरफ किराए से जमीन लेकर खेती करने वालों ने भी फर्जी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाए. इसलिए आंकड़ों में भारी फर्क आया और शासन को 400 करोड़ रुपये की बचत हुई."
जांच के आधार पर कई अधिकारी हटाए गए
पिछले साल जबलपुर के तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन को सरकार ने अचानक हटा दिया और उनकी जगह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रबंध निदेशक दीपक सक्सेना को जबलपुर कलेक्टर बनाया गया. राज्य सरकार में धान खरीदी के लिए 10 टीम बनाई थी. इन टीमों की जांच के आधार पर जबलपुर के फूड कंट्रोलर कमलेश दांडेकर को हटाया गया था. कई अधिकारियों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की गई. जांच के दौरान कई वेयरहाउस संचालक घेरे में आए जिन्होंने फर्जी खरीदी के आधार पर शासन से पैसा लिया. धान खरीदी के कई केंद्र बंद किए गए.
धान और गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीदी में कई सालों से चल रहा था यह घोटाला
फर्जी आंकड़ों की वजह से जबलपुर धान उत्पादन के मामले में बालाघाट से आगे निकल गया था जबकि बालाघाट को धान का कटोरा माना जाता था. इस साल एक बार फिर बालाघाट धान उत्पादन में प्रथम है और जबलपुर चौथे नंबर पर आ गया है. जबलपुर में धान और गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीदी में यह घोटाला कई सालों से चल रहा था.
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धान खरीदी में फर्जी रजिस्ट्रेशन के नाम पर होता था करोड़ों का खेल, सरकार ने बचाए 400 करोड़
Jabalpur, MP
जबलपुर में पिछले साल की तुलना में इस साल धान खरीदी में सरकार को 400 करोड़ रुपये की बचत हुई है. जबलपुर में पिछले साल 46 हजार किसानों से 5 लाख 46 हजार टन धान की खरीदी की गई थी. जबकि इस साल 51 हजार किसानों से मात्र 3 लाख 70 हजार टन धान की खरीदी की गई. इसके बावजूद पिछले साल की तुलना में एक लाख 70 हजार टन धान की कम खरीदी गई. जिला कलेक्टर का दावा है कि रजिस्ट्रेशन करवाने वाले हर किसान से धान खरीदी गई है.
किसान के नाम पर सक्रिय था माफ़िया
जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना का कहना है "जबलपुर में बड़े पैमाने पर जमीन को किराए पर लेकर पंजीयन किए जाते थे. और जबलपुर में एक हेक्टेयर में 125 क्विंटल तक धान का उत्पादन होने की बात कही जाती थी. जबकि पूरे प्रदेश में 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन माना जाता है, जो वास्तविक है. इस बार की पूरी धान खरीदी उत्पादन के इसी दर को मानते हुए की गई. वहीं दूसरी तरफ किराए से जमीन लेकर खेती करने वालों ने भी फर्जी रजिस्ट्रेशन नहीं करवाए. इसलिए आंकड़ों में भारी फर्क आया और शासन को 400 करोड़ रुपये की बचत हुई."
जांच के आधार पर कई अधिकारी हटाए गए
पिछले साल जबलपुर के तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन को सरकार ने अचानक हटा दिया और उनकी जगह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रबंध निदेशक दीपक सक्सेना को जबलपुर कलेक्टर बनाया गया. राज्य सरकार में धान खरीदी के लिए 10 टीम बनाई थी. इन टीमों की जांच के आधार पर जबलपुर के फूड कंट्रोलर कमलेश दांडेकर को हटाया गया था. कई अधिकारियों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की गई. जांच के दौरान कई वेयरहाउस संचालक घेरे में आए जिन्होंने फर्जी खरीदी के आधार पर शासन से पैसा लिया. धान खरीदी के कई केंद्र बंद किए गए.
धान और गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीदी में कई सालों से चल रहा था यह घोटाला
फर्जी आंकड़ों की वजह से जबलपुर धान उत्पादन के मामले में बालाघाट से आगे निकल गया था जबकि बालाघाट को धान का कटोरा माना जाता था. इस साल एक बार फिर बालाघाट धान उत्पादन में प्रथम है और जबलपुर चौथे नंबर पर आ गया है. जबलपुर में धान और गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीदी में यह घोटाला कई सालों से चल रहा था.
