- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- साल 2024 में भ्रष्टाचार की बहती गंगा में कइयों ने धोए हांथ.... देखिये अजब एमपी के गजब भ्रष्टाचारी
साल 2024 में भ्रष्टाचार की बहती गंगा में कइयों ने धोए हांथ.... देखिये अजब एमपी के गजब भ्रष्टाचारी
देवेन्द्र पटेल
नरसिंहपुर से लेकर उज्जैन तक, विदिशा से लेकर झाबुआ तक करप्शन.... 9 माह पहले पत्रकार ने पटवारी को रिश्वत लेते पकड़वाया तो नरसिंहपुर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार नहीं कर रहे जमीन का नामांतरण
यदि इस कार्यालय का कोई भी व्यक्ति रिश्वत मांगता है या फिर आप भ्रष्टाचार के शिकार हुए हैं तो आप विभागाध्यक्ष या सतर्कता अधिकारी को शिकायत कर सकते हैं। किसी भी सरकारी दफ्तर में लगे इस तरह के लिखे हुए बोर्ड अब तक रिश्वत पर लगाम नहीं लगा सके हैं। अकेले मध्य प्रदेश की बात करें तो क्या आम आदमी बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ यानी पत्रकार वो भी राज्यस्तरीय अधिमान्य पत्रकार तक से रिश्वत लेने का खेल मध्य प्रदेश में देखा गया है। आलम ये है कि रिश्वत दो तो काम आसानी हो जाएगा और रिश्वतखोर की शिकायत कर दी तो काम सालो तक नहीं होगा, कुछ न कुछ अटकलों के साथ विभाग के अन्य अफसर काम को लटकाए रहेंगे। फिर चाहे आप एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक ही शिकायत क्यों न कर दो।
जिस दिन भोपाल के जंगल में 52 किलो सोना मिला। उस दिन भी मध्य प्रदेश में तीन भ्रष्टाचारी पकड़े गए। मैहर में एक नगर पालिका सीएमओ को 20,000 रुपए लेते पकड़ा गया। धार में एक वनपाल को 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। जबलपुर में बिजली विभाग के इंजीनियर को 30,000 रुपए की राशि के साथ दबोचा गया।
ये कार्रवाई सिर्फ बानगी है जो सिर्फ दिखावे के लिए है। बेखौफ भ्रष्टाचारियों ने पावन महाकाल लोक को भी नहीं छोड़ा है, जिसका उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। एक साल के अंदर ही मूर्तियां टूटकर गिरने लगीं। लोकायुक्त में शिकायत पड़ी है लेकिन नतीजे सिफर हैं।
भ्रष्टाचार की बानगी गिनाने लगे तो शायद शब्द कम पड़ जाए लेकिन नाम खत्म नहीं होंगे। बीते कुछ महीनों की कार्रवाई को देखेंगे तो समझ में आ जाएगा कि 40-50 हजार की नौकरी करने वाले बाबू मध्य प्रदेश में जब करोड़पति हैं तो बाकियों का छोड़ दीजिए। शायद यही वजह है कि सत्ता के मठाधीशों के नाक के नीचे बनी सड़कें एक बारिश नहीं झेल पाती है।
मध्यप्रदेश के अधिकांश विभाग भ्रष्टाचार की गंगात्री में डूबे हैं। दो दिन पहले कैग की रिपोर्ट आई है। उसमें भी यही इषारा है। 38 मीट्रिक टन अमान्य राशन पोषण आहार के नाम पर बांट दिए। बाइक से राशन की ढुलान करवाकर ट्रांसपोर्टेशन की राशि निकलवा ली।
अजब एमपी के गजब भ्रष्टाचारी
झाबुआ : पंचायत सचिव ने मृतक का बना दिया संबल कार्ड
मामला पेटलावद जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली धोलीखाली का है, जहां 2 अगस्त 2024 को सुखराम पिता बालू निनामा की मृत्यु हो जाती, सुखराम धोलीखाली गांव का रहने वाला था] उसकी मृत्यु के बाद पंचायत ने उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया जाता है. लेकिन 2 अगस्त को सुखराम की मौत के बाद पंचायत सचिव अनारसिंह ने 14 अगस्त को उसका संबल पोर्टल पर पंजीयन कर दिया, 17 अगस्त को पंजीयन का सत्यापन भी कर दिया गया और 21 अगस्त को मृतक सुखराम का संबल कार्ड बनकर तैयार हो गया---
उज्जैन : महाकाल मंदिर में सालों से जारी था भ्रष्टाचार का अब हुआ पर्दाफाश
महाकाल की नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात हुआ है। मंदिर में सालों से जारी भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की जांच में दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके बैंक खातों में लाखों रुपए का अवैध ट्रांजैक्शन पाया गया है। महाकालेश्वर मंदिर हर साल करीब 100 करोड़ रुपए की आय अर्जित करता है] जिसमें दान] लड्डू प्रसाद] शीघ्र दर्शन और अभिषेक की राशि शामिल है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक] पिछले कुछ महीनों से मंदिर की आमदनी में गिरावट दर्ज हो रही थी] जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि मंदिर के दो कर्मचारी विनोद चौकसे और राकेश श्रीवास्तव श्रद्धालुओं से अवैध रूप से पैसा वसूल रहे थे। इनके बैंक खातों में लाखों रुपए का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन मिला है।
विदिशा : भ्रष्टाचार ऐसा कि खड़े-खड़े गायब हो गई नहर
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अलग ही अंदाज में होता है। जून 2024 में विदिशा जिले का एक मामला सामने आया जहां नहर बनाने के लिए ली गई जमीन ही गायब हो गई। न ही जमीन दिखी और न ही नहर, लेकिन कागजों में किसानों से जमीन अधिग्रहण भी हुआ और मुआवजा राशि भी वितरित की गई] लेकिन ग्रांउड पर जमीन गायब रही ओर नहर भी।
नरसिंहपुर : पटवारी ने पत्रकार से ली रिश्वत, पकड़ाया----- बदले में विभाग ने जमीन नामांतरण में पत्रकार को उलझाया
अप्रेल 2024 में मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार से नरसिंहपुर जिले की तहसील तेन्दूखेड़ा के पटवारी नंदकुमार कौरव ने जमीन नामांतरण के नाम पर रिश्वत ली थी] जिसके चलते पटवारी लोकायुक्त के शिकंजे में फंसा था। इसके बदले में राजस्व विभाग अब तक पत्रकार को उलझाए हुए है। एक साल बीतने को है लेकिन जमीन का नामांतरण आला अधिकारी अब तक नहीं कर सके। जबकि जिला कलेक्टर को भी पत्रकार कई बार फोन पर जमीन नामांतरण करने के गुजारिश कर चुके हैं।
कैग रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे
मध्य प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भारी अनियमितताएं और धोखाधड़ी हुई है। अप्रैल 2017 से मार्च 2021 तक के ऑडिट में बिटुमेन की खरीद में फर्जीवाड़ा] योजना बनाने में खामियां और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने जैसे कई मामले उजागर हुए हैं। इससे सरकार को 414.9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कैग ने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
मप्र में कमीशन की सरकार : मप्र में क्राइम, कर्ज, करप्शन और कमीशन की सरकार चल रही है। जिस प्रकार से कमीशनखोरी सरकार का मुख्य एजेंडा है उसी का परिणाम है कि मामूली लोगों के पास करोड़ो की चल अचल संपत्तियां अवैध रूप से बरामद हो रही है। ईडी और इनकम टैक्स को चाहिए कि वे बड़ी मछलियों पर कार्रवाई करें।
आनन्द जाट, मुख्य मीडिया समन्वयक, मप्र कांग्रेस
भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा रही सरकार : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीरों टॉलरेंस की नीति बनाई है, उसी पर प्रदेश सरकार काम कर रही है, जिसके चलते प्रदेश में भ्रष्टाचारी अफसर और कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे डाला जा रहा है।
मिलन भार्गव, प्रवक्ता, मप्र भाजपा
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
साल 2024 में भ्रष्टाचार की बहती गंगा में कइयों ने धोए हांथ.... देखिये अजब एमपी के गजब भ्रष्टाचारी
देवेन्द्र पटेल
यदि इस कार्यालय का कोई भी व्यक्ति रिश्वत मांगता है या फिर आप भ्रष्टाचार के शिकार हुए हैं तो आप विभागाध्यक्ष या सतर्कता अधिकारी को शिकायत कर सकते हैं। किसी भी सरकारी दफ्तर में लगे इस तरह के लिखे हुए बोर्ड अब तक रिश्वत पर लगाम नहीं लगा सके हैं। अकेले मध्य प्रदेश की बात करें तो क्या आम आदमी बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ यानी पत्रकार वो भी राज्यस्तरीय अधिमान्य पत्रकार तक से रिश्वत लेने का खेल मध्य प्रदेश में देखा गया है। आलम ये है कि रिश्वत दो तो काम आसानी हो जाएगा और रिश्वतखोर की शिकायत कर दी तो काम सालो तक नहीं होगा, कुछ न कुछ अटकलों के साथ विभाग के अन्य अफसर काम को लटकाए रहेंगे। फिर चाहे आप एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक ही शिकायत क्यों न कर दो।
जिस दिन भोपाल के जंगल में 52 किलो सोना मिला। उस दिन भी मध्य प्रदेश में तीन भ्रष्टाचारी पकड़े गए। मैहर में एक नगर पालिका सीएमओ को 20,000 रुपए लेते पकड़ा गया। धार में एक वनपाल को 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। जबलपुर में बिजली विभाग के इंजीनियर को 30,000 रुपए की राशि के साथ दबोचा गया।
ये कार्रवाई सिर्फ बानगी है जो सिर्फ दिखावे के लिए है। बेखौफ भ्रष्टाचारियों ने पावन महाकाल लोक को भी नहीं छोड़ा है, जिसका उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। एक साल के अंदर ही मूर्तियां टूटकर गिरने लगीं। लोकायुक्त में शिकायत पड़ी है लेकिन नतीजे सिफर हैं।
भ्रष्टाचार की बानगी गिनाने लगे तो शायद शब्द कम पड़ जाए लेकिन नाम खत्म नहीं होंगे। बीते कुछ महीनों की कार्रवाई को देखेंगे तो समझ में आ जाएगा कि 40-50 हजार की नौकरी करने वाले बाबू मध्य प्रदेश में जब करोड़पति हैं तो बाकियों का छोड़ दीजिए। शायद यही वजह है कि सत्ता के मठाधीशों के नाक के नीचे बनी सड़कें एक बारिश नहीं झेल पाती है।
मध्यप्रदेश के अधिकांश विभाग भ्रष्टाचार की गंगात्री में डूबे हैं। दो दिन पहले कैग की रिपोर्ट आई है। उसमें भी यही इषारा है। 38 मीट्रिक टन अमान्य राशन पोषण आहार के नाम पर बांट दिए। बाइक से राशन की ढुलान करवाकर ट्रांसपोर्टेशन की राशि निकलवा ली।
अजब एमपी के गजब भ्रष्टाचारी
झाबुआ : पंचायत सचिव ने मृतक का बना दिया संबल कार्ड
मामला पेटलावद जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली धोलीखाली का है, जहां 2 अगस्त 2024 को सुखराम पिता बालू निनामा की मृत्यु हो जाती, सुखराम धोलीखाली गांव का रहने वाला था] उसकी मृत्यु के बाद पंचायत ने उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया जाता है. लेकिन 2 अगस्त को सुखराम की मौत के बाद पंचायत सचिव अनारसिंह ने 14 अगस्त को उसका संबल पोर्टल पर पंजीयन कर दिया, 17 अगस्त को पंजीयन का सत्यापन भी कर दिया गया और 21 अगस्त को मृतक सुखराम का संबल कार्ड बनकर तैयार हो गया---
उज्जैन : महाकाल मंदिर में सालों से जारी था भ्रष्टाचार का अब हुआ पर्दाफाश
महाकाल की नगरी उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा आघात हुआ है। मंदिर में सालों से जारी भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की जांच में दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके बैंक खातों में लाखों रुपए का अवैध ट्रांजैक्शन पाया गया है। महाकालेश्वर मंदिर हर साल करीब 100 करोड़ रुपए की आय अर्जित करता है] जिसमें दान] लड्डू प्रसाद] शीघ्र दर्शन और अभिषेक की राशि शामिल है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक] पिछले कुछ महीनों से मंदिर की आमदनी में गिरावट दर्ज हो रही थी] जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि मंदिर के दो कर्मचारी विनोद चौकसे और राकेश श्रीवास्तव श्रद्धालुओं से अवैध रूप से पैसा वसूल रहे थे। इनके बैंक खातों में लाखों रुपए का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन मिला है।
विदिशा : भ्रष्टाचार ऐसा कि खड़े-खड़े गायब हो गई नहर
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अलग ही अंदाज में होता है। जून 2024 में विदिशा जिले का एक मामला सामने आया जहां नहर बनाने के लिए ली गई जमीन ही गायब हो गई। न ही जमीन दिखी और न ही नहर, लेकिन कागजों में किसानों से जमीन अधिग्रहण भी हुआ और मुआवजा राशि भी वितरित की गई] लेकिन ग्रांउड पर जमीन गायब रही ओर नहर भी।
नरसिंहपुर : पटवारी ने पत्रकार से ली रिश्वत, पकड़ाया----- बदले में विभाग ने जमीन नामांतरण में पत्रकार को उलझाया
अप्रेल 2024 में मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार से नरसिंहपुर जिले की तहसील तेन्दूखेड़ा के पटवारी नंदकुमार कौरव ने जमीन नामांतरण के नाम पर रिश्वत ली थी] जिसके चलते पटवारी लोकायुक्त के शिकंजे में फंसा था। इसके बदले में राजस्व विभाग अब तक पत्रकार को उलझाए हुए है। एक साल बीतने को है लेकिन जमीन का नामांतरण आला अधिकारी अब तक नहीं कर सके। जबकि जिला कलेक्टर को भी पत्रकार कई बार फोन पर जमीन नामांतरण करने के गुजारिश कर चुके हैं।
कैग रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे
मध्य प्रदेश में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भारी अनियमितताएं और धोखाधड़ी हुई है। अप्रैल 2017 से मार्च 2021 तक के ऑडिट में बिटुमेन की खरीद में फर्जीवाड़ा] योजना बनाने में खामियां और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने जैसे कई मामले उजागर हुए हैं। इससे सरकार को 414.9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कैग ने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
मप्र में कमीशन की सरकार : मप्र में क्राइम, कर्ज, करप्शन और कमीशन की सरकार चल रही है। जिस प्रकार से कमीशनखोरी सरकार का मुख्य एजेंडा है उसी का परिणाम है कि मामूली लोगों के पास करोड़ो की चल अचल संपत्तियां अवैध रूप से बरामद हो रही है। ईडी और इनकम टैक्स को चाहिए कि वे बड़ी मछलियों पर कार्रवाई करें।
आनन्द जाट, मुख्य मीडिया समन्वयक, मप्र कांग्रेस
भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा रही सरकार : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीरों टॉलरेंस की नीति बनाई है, उसी पर प्रदेश सरकार काम कर रही है, जिसके चलते प्रदेश में भ्रष्टाचारी अफसर और कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे डाला जा रहा है।
मिलन भार्गव, प्रवक्ता, मप्र भाजपा
