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पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना का बड़ा कदम: श्योपुर में स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म की पहली सफल उड़ान
Gwalior
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा तैयारियों को और मज़बूत करने के उद्देश्य से भारतीय सेना और डीआरडीओ ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
मध्यप्रदेश के श्योपुर में 3 मई 2025 को स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया। यह एयरशिप रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, आगरा द्वारा विकसित किया गया है।
इस अत्याधुनिक एयरशिप को लगभग 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया, जहां इसने इंस्ट्रूमेंटल पेलोड के साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी। onboard सेंसरों से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य में उन्नत सिमुलेशन मॉडल विकसित करने और उच्च ऊंचाई पर दीर्घकालिक निगरानी प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए किया जाएगा। उड़ान के दौरान लिफाफा दबाव नियंत्रण और इमरजेंसी अपस्फीति जैसे सुरक्षा तंत्रों का भी परीक्षण किया गया। कुल उड़ान अवधि 62 मिनट रही और परीक्षण के बाद सिस्टम को सुरक्षित रूप से पुनः प्राप्त कर लिया गया।
भारत की निगरानी क्षमताओं को मिलेगा नया आयाम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी और कहा कि यह सिस्टम भारत की खुफिया, निगरानी और टोही क्षमताओं को नए आयाम देगा। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है, जो स्वदेशी तकनीक से स्ट्रेटोस्फेरिक प्लेटफॉर्म विकसित करने में सक्षम हैं।
डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने इसे एक "मील का पत्थर" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रोटोटाइप उड़ान भारत के लिए एक रणनीतिक सफलता है जो हवा से हल्के, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले निगरानी प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
पहलगाम हमले के बाद सतर्क हुई एजेंसियां
गौरतलब है कि हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। ऐसे में श्योपुर में हुए इस सफल परीक्षण को एक रणनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। यह एयरशिप सिस्टम सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और आतंकी गतिविधियों को पहले ही भांपने की दिशा में बेहद उपयोगी साबित होगा।
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पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना का बड़ा कदम: श्योपुर में स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म की पहली सफल उड़ान
Gwalior
मध्यप्रदेश के श्योपुर में 3 मई 2025 को स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया। यह एयरशिप रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, आगरा द्वारा विकसित किया गया है।
इस अत्याधुनिक एयरशिप को लगभग 17 किलोमीटर की ऊंचाई तक ले जाया गया, जहां इसने इंस्ट्रूमेंटल पेलोड के साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी। onboard सेंसरों से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य में उन्नत सिमुलेशन मॉडल विकसित करने और उच्च ऊंचाई पर दीर्घकालिक निगरानी प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए किया जाएगा। उड़ान के दौरान लिफाफा दबाव नियंत्रण और इमरजेंसी अपस्फीति जैसे सुरक्षा तंत्रों का भी परीक्षण किया गया। कुल उड़ान अवधि 62 मिनट रही और परीक्षण के बाद सिस्टम को सुरक्षित रूप से पुनः प्राप्त कर लिया गया।
भारत की निगरानी क्षमताओं को मिलेगा नया आयाम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी और कहा कि यह सिस्टम भारत की खुफिया, निगरानी और टोही क्षमताओं को नए आयाम देगा। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है, जो स्वदेशी तकनीक से स्ट्रेटोस्फेरिक प्लेटफॉर्म विकसित करने में सक्षम हैं।
डीआरडीओ के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने इसे एक "मील का पत्थर" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रोटोटाइप उड़ान भारत के लिए एक रणनीतिक सफलता है जो हवा से हल्के, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले निगरानी प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
पहलगाम हमले के बाद सतर्क हुई एजेंसियां
गौरतलब है कि हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। ऐसे में श्योपुर में हुए इस सफल परीक्षण को एक रणनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। यह एयरशिप सिस्टम सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने, खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और आतंकी गतिविधियों को पहले ही भांपने की दिशा में बेहद उपयोगी साबित होगा।
