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इंदौर के लॉ छात्र पर फर्जी NEET पेपर बेचने का आरोप, गिरफ्तार
Digital Desk
इंदौर पुलिस ने एक कानून के छात्र को गिरफ्तार किया है, जिस पर AI टूल्स की मदद से कथित फर्जी NEET-UG पेपर तैयार कर सोशल मीडिया के जरिए छात्रों को बेचने का आरोप है।
NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के एक नए मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच ने कानून की पढ़ाई कर रहे एक छात्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार किए और उन्हें NEET पेपर बताकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से बेचने की कोशिश की। मामले की जानकारी राजस्थान के कोटा साइबर सेल से मिलने के बाद कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने दर्जनों छात्रों से संपर्क कर उनसे पैसे लिए और फर्जी लिंक साझा किए।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जिसे 20 जून को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट डाले थे, जिन्हें देखकर बड़ी संख्या में छात्र उससे संपर्क करने लगे। जांच एजेंसियों का दावा है कि करीब 30 से 35 छात्र उसके झांसे में आए और कथित तौर पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने ChatGPT समेत अन्य AI आधारित एप्लिकेशन की मदद से प्रश्नपत्र जैसे दस्तावेज तैयार किए थे। शुरुआत में वह सामान्य प्रश्नपत्र साझा करता था, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उसने उन्हें NEET से जोड़कर प्रचारित करना शुरू किया। उस समय परीक्षा से जुड़े विवाद और पुनर्परीक्षा की चर्चाओं के कारण छात्रों में असमंजस का माहौल था, जिसका उसने कथित रूप से फायदा उठाने का प्रयास किया।
साइबर सेल का स्टिंग ऑपरेशन
मामले की भनक लगने पर कोटा साइबर सेल ने निगरानी शुरू की। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने खरीदार बनकर आरोपी से संपर्क किया और उसे भुगतान भी किया, ताकि उसकी गतिविधियों की पुष्टि की जा सके। इसके बाद तकनीकी जानकारी और लोकेशन के आधार पर इंदौर पुलिस को सूचना दी गई।
जानकारी मिलने पर क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी के निवास पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से उसे पहले चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसने अपनी गतिविधियां जारी रखीं। बाद में उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया।
AI के दुरुपयोग पर चिंता
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय होने और आसान कमाई के उद्देश्य से यह गतिविधि शुरू की थी। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी में AI तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग की ओर संकेत करता है। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े फर्जी दस्तावेज, भ्रामक सामग्री और ऑनलाइन ठगी के मामलों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया के बीच यह मामला शिक्षा व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और AI के जिम्मेदार उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
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इंदौर के लॉ छात्र पर फर्जी NEET पेपर बेचने का आरोप, गिरफ्तार
Digital Desk
NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के एक नए मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच ने कानून की पढ़ाई कर रहे एक छात्र को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार किए और उन्हें NEET पेपर बताकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से बेचने की कोशिश की। मामले की जानकारी राजस्थान के कोटा साइबर सेल से मिलने के बाद कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने दर्जनों छात्रों से संपर्क कर उनसे पैसे लिए और फर्जी लिंक साझा किए।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जिसे 20 जून को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट डाले थे, जिन्हें देखकर बड़ी संख्या में छात्र उससे संपर्क करने लगे। जांच एजेंसियों का दावा है कि करीब 30 से 35 छात्र उसके झांसे में आए और कथित तौर पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने ChatGPT समेत अन्य AI आधारित एप्लिकेशन की मदद से प्रश्नपत्र जैसे दस्तावेज तैयार किए थे। शुरुआत में वह सामान्य प्रश्नपत्र साझा करता था, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उसने उन्हें NEET से जोड़कर प्रचारित करना शुरू किया। उस समय परीक्षा से जुड़े विवाद और पुनर्परीक्षा की चर्चाओं के कारण छात्रों में असमंजस का माहौल था, जिसका उसने कथित रूप से फायदा उठाने का प्रयास किया।
साइबर सेल का स्टिंग ऑपरेशन
मामले की भनक लगने पर कोटा साइबर सेल ने निगरानी शुरू की। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने खरीदार बनकर आरोपी से संपर्क किया और उसे भुगतान भी किया, ताकि उसकी गतिविधियों की पुष्टि की जा सके। इसके बाद तकनीकी जानकारी और लोकेशन के आधार पर इंदौर पुलिस को सूचना दी गई।
जानकारी मिलने पर क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी के निवास पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से उसे पहले चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसने अपनी गतिविधियां जारी रखीं। बाद में उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया।
AI के दुरुपयोग पर चिंता
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय होने और आसान कमाई के उद्देश्य से यह गतिविधि शुरू की थी। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी में AI तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग की ओर संकेत करता है। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े फर्जी दस्तावेज, भ्रामक सामग्री और ऑनलाइन ठगी के मामलों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया के बीच यह मामला शिक्षा व्यवस्था, साइबर सुरक्षा और AI के जिम्मेदार उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
