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इंदौर में जहरीला पानी कांड: नगर निगम कमिश्नर हटाए गए, 15 मौतों के बीच सरकार ने हाईकोर्ट में मानी सिर्फ 4 मौतें
इंदौर (म.प्र.)
दूषित पानी से हुई मौतों पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन, एडिशनल कमिश्नर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड, निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त
इंदौर में दूषित और जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। लगातार सामने आ रही मौतों और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई है, जब अस्पतालों और मृतकों के परिजनों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।
क्या है पूरा मामला
इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में बदबू और गंदगी की शिकायत की थी, लेकिन समय पर आपूर्ति बंद नहीं की गई।
हाईकोर्ट में सरकार की रिपोर्ट
राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में 39 पन्नों की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें स्वीकार किया गया कि दूषित पानी से केवल 4 मौतें हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है। मृतकों में उर्मिला (28 दिसंबर), तारा (60) और नंदा (70) की मौत 30 दिसंबर, जबकि हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई बताई गई है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी तय की है। इससे पहले अदालत ने 1 जनवरी को सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
जांच में क्या सामने आया
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। जांच में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। सूत्रों का कहना है कि हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी सैंपल में मिला, हालांकि सरकारी तंत्र इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताकर सार्वजनिक करने से बच रहा है। नगर निगम की लैब में भेजे गए करीब 80 सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।
प्रशासनिक बदलाव
घटना के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। खरगोन जिला पंचायत के सीईओ आकाश सिंह, आलीराजपुर जिला पंचायत के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में लोगों को पानी नहीं, जहर बांटा गया और प्रशासन सोता रहा। वहीं विभिन्न शहरों में कांग्रेस और अन्य संगठनों ने प्रदर्शन किए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रवैया भी विवादों में रहा, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
फिलहाल प्रभावित इलाकों में लोग टैंकर, बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है, लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़ों और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी कायम हैं।
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इंदौर (म.प्र.)
इंदौर में दूषित और जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। लगातार सामने आ रही मौतों और बढ़ते जनआक्रोश के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटा दिया। साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई है, जब अस्पतालों और मृतकों के परिजनों के अनुसार अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है।
क्या है पूरा मामला
इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में नर्मदा जल आपूर्ति से जुड़े पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़े। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने पहले ही पानी में बदबू और गंदगी की शिकायत की थी, लेकिन समय पर आपूर्ति बंद नहीं की गई।
हाईकोर्ट में सरकार की रिपोर्ट
राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में 39 पन्नों की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसमें स्वीकार किया गया कि दूषित पानी से केवल 4 मौतें हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है। मृतकों में उर्मिला (28 दिसंबर), तारा (60) और नंदा (70) की मौत 30 दिसंबर, जबकि हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई बताई गई है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी तय की है। इससे पहले अदालत ने 1 जनवरी को सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
जांच में क्या सामने आया
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी को पीने योग्य नहीं पाया गया। जांच में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। सूत्रों का कहना है कि हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी सैंपल में मिला, हालांकि सरकारी तंत्र इसे प्रारंभिक रिपोर्ट बताकर सार्वजनिक करने से बच रहा है। नगर निगम की लैब में भेजे गए करीब 80 सैंपल भी असंतोषजनक पाए गए।
प्रशासनिक बदलाव
घटना के बाद इंदौर नगर निगम में तीन नए अपर आयुक्त नियुक्त किए गए हैं। खरगोन जिला पंचायत के सीईओ आकाश सिंह, आलीराजपुर जिला पंचायत के सीईओ प्रखर सिंह और इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में लोगों को पानी नहीं, जहर बांटा गया और प्रशासन सोता रहा। वहीं विभिन्न शहरों में कांग्रेस और अन्य संगठनों ने प्रदर्शन किए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रवैया भी विवादों में रहा, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
फिलहाल प्रभावित इलाकों में लोग टैंकर, बोतलबंद पानी और बोरिंग पर निर्भर हैं। प्रशासन ने पानी की आपूर्ति की निगरानी और जांच तेज करने का दावा किया है, लेकिन मौतों के वास्तविक आंकड़ों और जिम्मेदारी तय होने पर सवाल अभी भी कायम हैं।
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