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भोपाल नीति संवाद में बोले इंद्रेश कुमार – दंगामुक्त भारत संभव
Bhopal
मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की नीति संवाद श्रृंखला 2025 की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संस्थापक इंद्रेश कुमार ने शिक्षा, राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जिस शिक्षा में संस्कार नहीं होता, वह व्यक्ति को आतंकवादी या उग्रवादी बना सकती है।”
इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को विकारमुक्त बनाने के लिए हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जिसमें संस्कार और सद्भावना का समावेश हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि “मोदी जी एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं, जो विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
संस्कारों से ही बनता है सच्चा इंसान
इंद्रेश कुमार ने कहा, “मुझे इंजीनियर बनाने पर खर्च हुआ, लेकिन मुझे अच्छा इंसान बनाने के लिए कोई खर्च नहीं किया गया। यह सिर्फ सिस्टम के माध्यम से संभव हो सकता है।” उन्होंने राम और रावण का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक व्यक्ति को युगों-युगों तक पूजा जाता है, और दूसरे को हर वर्ष जलाया जाता है। यह अंतर संस्कारों का है।
“दंगामुक्त भारत संभव है”
इंद्रेश कुमार ने सवाल उठाया, “दंगामुक्त भारत क्यों नहीं हो सकता?” उन्होंने कहा कि अतिथि देवो भवः जैसी सभ्यता केवल भारत में है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की पहचान केवल जातियों से नहीं, बल्कि संवाद और समरसता से होती है।
इतिहास और संस्कृति की झलक
उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि “600-700 साल पहले सभी हिंदुस्तानी हिंदू थे। आज भी जो मुस्लिम अपने मूल को जानते हैं, वे इस सच्चाई को स्वीकार करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि रूसी, चीनी, ब्रिटीश जैसी संस्कृतियाँ जातियों के नाम से नहीं जानी जातीं, बल्कि उनके विचार और संवाद की ताकत उन्हें परिभाषित करती है।
भारत का विज्ञान और संस्कृति एक हैं
इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत ने समाज की रचना की है और यहां का विज्ञान भी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। सबकी अलग पहचान होते हुए भी एकता की भावना भारतीयता की सबसे बड़ी ताकत है।
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भोपाल नीति संवाद में बोले इंद्रेश कुमार – दंगामुक्त भारत संभव
Bhopal
इस अवसर पर राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संस्थापक इंद्रेश कुमार ने शिक्षा, राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जिस शिक्षा में संस्कार नहीं होता, वह व्यक्ति को आतंकवादी या उग्रवादी बना सकती है।”
इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को विकारमुक्त बनाने के लिए हमें ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जिसमें संस्कार और सद्भावना का समावेश हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि “मोदी जी एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं, जो विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”
संस्कारों से ही बनता है सच्चा इंसान
इंद्रेश कुमार ने कहा, “मुझे इंजीनियर बनाने पर खर्च हुआ, लेकिन मुझे अच्छा इंसान बनाने के लिए कोई खर्च नहीं किया गया। यह सिर्फ सिस्टम के माध्यम से संभव हो सकता है।” उन्होंने राम और रावण का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक व्यक्ति को युगों-युगों तक पूजा जाता है, और दूसरे को हर वर्ष जलाया जाता है। यह अंतर संस्कारों का है।
“दंगामुक्त भारत संभव है”
इंद्रेश कुमार ने सवाल उठाया, “दंगामुक्त भारत क्यों नहीं हो सकता?” उन्होंने कहा कि अतिथि देवो भवः जैसी सभ्यता केवल भारत में है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की पहचान केवल जातियों से नहीं, बल्कि संवाद और समरसता से होती है।
इतिहास और संस्कृति की झलक
उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि “600-700 साल पहले सभी हिंदुस्तानी हिंदू थे। आज भी जो मुस्लिम अपने मूल को जानते हैं, वे इस सच्चाई को स्वीकार करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि रूसी, चीनी, ब्रिटीश जैसी संस्कृतियाँ जातियों के नाम से नहीं जानी जातीं, बल्कि उनके विचार और संवाद की ताकत उन्हें परिभाषित करती है।
भारत का विज्ञान और संस्कृति एक हैं
इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत ने समाज की रचना की है और यहां का विज्ञान भी संस्कृति से जुड़ा हुआ है। सबकी अलग पहचान होते हुए भी एकता की भावना भारतीयता की सबसे बड़ी ताकत है।
