हिंदू मैरिज एक्ट के तहत जैनियों को तलाक नहीं, इंदौर फैमिली कोर्ट से याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

INDORE, MP

इंदौर फैमिली कोर्ट ने जैन समुदाय के एक कपल को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक देने से मना कर दिया। साथ ही ऐसी 28 मामलों को खारिज कर दिया। अब सभी लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मसले पर 18 मार्च को सुनवाई होगी। जैन समाज के लिए इस तरह के विवाद को लेकर अलग से कोई कानून नहीं है।

फैमिली कोर्ट ने जैन समुदाय के लोगों द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिकाओं को खारिज करना शुरू कर दिया था। इसके बाद एक जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 17 फरवरी को इस पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक परिवार न्यायालय सिर्फ धर्म के आधार पर याचिकाएं खारिज नहीं कर सकता। इस मामले में जैन धर्म को हिंदू धर्म से अलग मानने और हिंदू विवाह कानून के तहत राहत देने पर सवाल उठ रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दायर की थी याचिका

मामला 37 वर्षीय एक जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा अपनी पत्नी से आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दायर याचिका से शुरू हुआ। इंदौर के परिवार न्यायालय ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि जैन धर्म, हिंदू धर्म से अलग है। कोर्ट ने कहा कि 2014 में जैन धर्म को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा मिलने के बाद जैन लोग हिंदू विवाह अधिनियम के तहत राहत नहीं पा सकते। इस फैसले के बाद इसी तरह के 28 अन्य तलाक के मामलों को भी परिवार न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद वकीलों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।


18 मार्च को होगी अगली सुनवाई


हाई कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एके सेठी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता के वकील पंकज खंडेलवाल ने बताया कि कानूनी बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या जैन, अपनी अलग धार्मिक परंपराओं के बावजूद, अभी भी हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत आते हैं। फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जैन धर्म मूल रूप से हिंदू धर्म से अलग है, क्योंकि यह वैदिक परंपराओं का पालन नहीं करता है, जाति भेद को नहीं मानता है, और इसके अपने पवित्र ग्रंथ हैं।


हाईकोर्ट का यह है आदेश


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कुछ वकीलों ने बताया कि धारा 13-B के तहत दायर कम से कम 28 याचिकाएं इंदौर परिवार न्यायालय ने खारिज कर दी हैं, और कुछ मामलों में, पहले ही अपीलें दायर की जा चुकी हैं। जब तक इस अदालत द्वारा इस मुद्दे पर फैसला नहीं लिया जाता, तब तक परिवार न्यायालय को केवल इस आधार पर लंबित याचिकाओं को खारिज करने से रोक दिया जाता है।


जैन समाज के पास अलग से कानून नहीं


जैन समुदाय के लोगों का तर्क है कि उनके पास अपने अलग से व्यक्तिगत कानून नहीं हैं। इसलिए ऐतिहासिक रूप से वे हिंदू व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते रहे हैं। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2 में बौद्ध, जैन और सिखों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अगर जैन लोगों को इस कानून से बाहर रखा जाता है, तो उनके वैवाहिक विवादों के निपटारे के लिए कोई स्पष्ट कानूनी रास्ता नहीं बचेगा। अदालत ने यह भी कहा कि जैन लोगों पर हिंदू विवाह कानून लागू करना उनके धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

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07 Mar 2025 By दैनिक जागरण

हिंदू मैरिज एक्ट के तहत जैनियों को तलाक नहीं, इंदौर फैमिली कोर्ट से याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

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फैमिली कोर्ट ने जैन समुदाय के लोगों द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिकाओं को खारिज करना शुरू कर दिया था। इसके बाद एक जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 17 फरवरी को इस पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक परिवार न्यायालय सिर्फ धर्म के आधार पर याचिकाएं खारिज नहीं कर सकता। इस मामले में जैन धर्म को हिंदू धर्म से अलग मानने और हिंदू विवाह कानून के तहत राहत देने पर सवाल उठ रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दायर की थी याचिका

मामला 37 वर्षीय एक जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर द्वारा अपनी पत्नी से आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दायर याचिका से शुरू हुआ। इंदौर के परिवार न्यायालय ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि जैन धर्म, हिंदू धर्म से अलग है। कोर्ट ने कहा कि 2014 में जैन धर्म को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा मिलने के बाद जैन लोग हिंदू विवाह अधिनियम के तहत राहत नहीं पा सकते। इस फैसले के बाद इसी तरह के 28 अन्य तलाक के मामलों को भी परिवार न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद वकीलों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।


18 मार्च को होगी अगली सुनवाई


हाई कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एके सेठी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता के वकील पंकज खंडेलवाल ने बताया कि कानूनी बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या जैन, अपनी अलग धार्मिक परंपराओं के बावजूद, अभी भी हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत आते हैं। फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जैन धर्म मूल रूप से हिंदू धर्म से अलग है, क्योंकि यह वैदिक परंपराओं का पालन नहीं करता है, जाति भेद को नहीं मानता है, और इसके अपने पवित्र ग्रंथ हैं।


हाईकोर्ट का यह है आदेश


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कुछ वकीलों ने बताया कि धारा 13-B के तहत दायर कम से कम 28 याचिकाएं इंदौर परिवार न्यायालय ने खारिज कर दी हैं, और कुछ मामलों में, पहले ही अपीलें दायर की जा चुकी हैं। जब तक इस अदालत द्वारा इस मुद्दे पर फैसला नहीं लिया जाता, तब तक परिवार न्यायालय को केवल इस आधार पर लंबित याचिकाओं को खारिज करने से रोक दिया जाता है।


जैन समाज के पास अलग से कानून नहीं


जैन समुदाय के लोगों का तर्क है कि उनके पास अपने अलग से व्यक्तिगत कानून नहीं हैं। इसलिए ऐतिहासिक रूप से वे हिंदू व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते रहे हैं। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2 में बौद्ध, जैन और सिखों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अगर जैन लोगों को इस कानून से बाहर रखा जाता है, तो उनके वैवाहिक विवादों के निपटारे के लिए कोई स्पष्ट कानूनी रास्ता नहीं बचेगा। अदालत ने यह भी कहा कि जैन लोगों पर हिंदू विवाह कानून लागू करना उनके धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/jains-not-divorced-under-hindu-marriage-act/article-12987

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