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खंडवा हॉस्टल मौत मामला: परिजन हत्या का आरोप, अधीक्षिका निलंबित
Khandwa, MP
रजूर के माता शबरी कन्या आवासीय विद्यालय में 1 नवम्बर को चौथी मंजिल से गिरी नाबालिग पूजा की 9 नवम्बर को इंदौर में मौत; परिवार ने आरोप लगाया — “बेटी को धक्का देकर गिराया गया”
रजूर गांव के आदिवासी छात्रावास में 1 नवंबर को चौथी मंजिल से गिरने वाली कक्षा नौ की छात्रा पूजा किराड़े (15) की 9 नवंबर को इंदौर में इलाज के दौरान मौत के बाद परिजन और स्थानीय संगठनों ने हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने कहा कि पूजा ने होश में आकर बताया था कि उसे किसी ने धक्का देकर गिराया था। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल बनाया और हॉस्टल अधीक्षिका को निलंबित कर दिया है।
क्या हुआ — 1 नवम्बर को पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिरी। उसे पहले खंडवा जिला अस्पताल लाया गया और बाद में इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। आठ दिन चले उपचार के बाद 9 नवम्बर को उसकी मौत हो गई। परिवार ने कहा कि शव पर चोटों के निशान भी मिले हैं और उन्होंने कलेक्टर, एसपी व सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
कौन आरोप लगा रहा है और किस पर — छात्रा की मां और पिता का आरोप है कि हॉस्टल अधीक्षिका कोकिला बौरासी और उनकी बेटी प्राची पूजा का उत्पीड़न करती थीं। बड़ी बहन अर्चना ने बताया कि इलाज के दौरान पूजा ने कहा था कि उसने खुद नहीं गिरी, किसी ने उसे धक्का दिया है। परिजन और ग्रामीण संगठन कहते हैं कि प्राची ही हॉस्टल का कामकाज संभालती थी और वह छात्राओं से विवाद करती रहती थी।
जांच का दायरा और प्रशासनिक कदम — खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया। दल में मिट्टी परीक्षण अधिकारी और विभागीय अधिकारी शामिल हैं। जांच दल ने हॉस्टल स्टाफ और छात्राओं के बयान लिए; आज अधीक्षिका और उनकी बेटी के बयान लिए जाएंगे और शाम तक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी है। जनजातीय कार्य आयुक्त ने प्रारम्भिक रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षिका को निलंबित कर इंदौर के संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।
प्रतिक्रियाएँ व पृष्ठभूमि — टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने कहा कि आदिवासी हॉस्टलों में शोषण और प्रताड़ना की घटनाएँ अक्सर होती हैं और ऐसे मामलों को ‘हादसा’ बताकर दबा दिया जाता है। जांच दल ने पाया कि अधीक्षिका का 60% दिव्यांगता प्रमाणपत्र मौजूद है और हॉस्टल में जिम्मेदारियाँ उसकी बेटी द्वारा निभाई जा रही थीं — जो नियमों के विरुद्ध है, ऐसा परिवार का कहना है।
आगे क्या होगा — जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन फॉरेंसिक और कानूनी पहलुओं की पुष्टि कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। परिजन उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग पर कायम हैं। यह मामला स्थानीय और राज्य अधिकारीयों के संज्ञान में है और अगले कदम रिपोर्ट आने पर तय होंगे।
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रजूर गांव के आदिवासी छात्रावास में 1 नवंबर को चौथी मंजिल से गिरने वाली कक्षा नौ की छात्रा पूजा किराड़े (15) की 9 नवंबर को इंदौर में इलाज के दौरान मौत के बाद परिजन और स्थानीय संगठनों ने हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने कहा कि पूजा ने होश में आकर बताया था कि उसे किसी ने धक्का देकर गिराया था। प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय दल बनाया और हॉस्टल अधीक्षिका को निलंबित कर दिया है।
क्या हुआ — 1 नवम्बर को पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से नीचे गिरी। उसे पहले खंडवा जिला अस्पताल लाया गया और बाद में इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। आठ दिन चले उपचार के बाद 9 नवम्बर को उसकी मौत हो गई। परिवार ने कहा कि शव पर चोटों के निशान भी मिले हैं और उन्होंने कलेक्टर, एसपी व सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
कौन आरोप लगा रहा है और किस पर — छात्रा की मां और पिता का आरोप है कि हॉस्टल अधीक्षिका कोकिला बौरासी और उनकी बेटी प्राची पूजा का उत्पीड़न करती थीं। बड़ी बहन अर्चना ने बताया कि इलाज के दौरान पूजा ने कहा था कि उसने खुद नहीं गिरी, किसी ने उसे धक्का दिया है। परिजन और ग्रामीण संगठन कहते हैं कि प्राची ही हॉस्टल का कामकाज संभालती थी और वह छात्राओं से विवाद करती रहती थी।
जांच का दायरा और प्रशासनिक कदम — खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया। दल में मिट्टी परीक्षण अधिकारी और विभागीय अधिकारी शामिल हैं। जांच दल ने हॉस्टल स्टाफ और छात्राओं के बयान लिए; आज अधीक्षिका और उनकी बेटी के बयान लिए जाएंगे और शाम तक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी है। जनजातीय कार्य आयुक्त ने प्रारम्भिक रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षिका को निलंबित कर इंदौर के संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।
प्रतिक्रियाएँ व पृष्ठभूमि — टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने कहा कि आदिवासी हॉस्टलों में शोषण और प्रताड़ना की घटनाएँ अक्सर होती हैं और ऐसे मामलों को ‘हादसा’ बताकर दबा दिया जाता है। जांच दल ने पाया कि अधीक्षिका का 60% दिव्यांगता प्रमाणपत्र मौजूद है और हॉस्टल में जिम्मेदारियाँ उसकी बेटी द्वारा निभाई जा रही थीं — जो नियमों के विरुद्ध है, ऐसा परिवार का कहना है।
आगे क्या होगा — जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन फॉरेंसिक और कानूनी पहलुओं की पुष्टि कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। परिजन उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग पर कायम हैं। यह मामला स्थानीय और राज्य अधिकारीयों के संज्ञान में है और अगले कदम रिपोर्ट आने पर तय होंगे।
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