- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भोपाल में बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन: संविदा नियमितीकरण समेत 9 मांगों को लेकर सरकार से नाराज...
भोपाल में बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन: संविदा नियमितीकरण समेत 9 मांगों को लेकर सरकार से नाराजगी
Bhopal, MP
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित नीलम पार्क में शनिवार को बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
यह धरना यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्प्लाई एंड इंजीनियर्स के बैनर तले हो रहा है, जिसमें संविदा कर्मियों ने नियमितीकरण सहित 9 प्रमुख मांगों को लेकर सरकार की अनदेखी पर नाराजगी जताई है।
5 हजार संविदा कर्मियों का भविष्य अधर में
फोरम के अध्यक्ष वी.के.एस. परिहार ने बताया कि बिजली कंपनियों में 5 हजार से अधिक संविदा कर्मचारी वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित नहीं किया गया है। हाल ही में शासन द्वारा पास किए गए नए संगठन ढांचे में 50 हजार पद सृजित किए गए हैं। फोरम की मांग है कि पहले इन अनुभवी संविदा कर्मचारियों को इन पदों पर समायोजित किया जाए।
आउटसोर्स कर्मियों को 50% आरक्षण देने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बिजली विभाग में पहले से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को 50% आरक्षण मिलना चाहिए। इसके अलावा स्थानांतरण नीति, संविदा नीति 2023 में इंक्रीमेंट और डीए, और राष्ट्रीय अवकाशों में दोहरी मजदूरी जैसी मांगें भी उठाई गईं।
बार-बार आग्रह के बाद भी सरकार का कोई जवाब नहीं
फोरम ने कहा कि पिछले एक वर्ष से बार-बार शासन को ज्ञापन और मांगपत्र सौंपे गए, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। यदि अक्टूबर तक कोई निर्णय नहीं हुआ, तो फोरम बड़े राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दे चुका है।
वेतन विसंगति और प्रमोशन जैसे मुद्दे भी शामिल
प्रदर्शन में शामिल एक प्रवक्ता ने बताया कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में परीक्षण सहायक के वेतन में भारी विसंगति है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। साथ ही, संविदा कर्मियों को भी नियमित कर्मचारियों की तरह 9, 18, 35 वर्ष की सेवा पर उच्च वेतनमान और प्रमोशन दिया जाना चाहिए।
क्यों चिंतित हैं संविदा कर्मचारी?
प्रवक्ता के अनुसार, बिजली विभाग में नियुक्त अधिकांश संविदा कर्मचारी लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं, लेकिन नियमितीकरण न होने के कारण वे भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में 100 से अधिक संविदा कर्मचारी विभाग छोड़ चुके हैं। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
भोपाल में बिजली कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन: संविदा नियमितीकरण समेत 9 मांगों को लेकर सरकार से नाराजगी
Bhopal, MP
यह धरना यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्प्लाई एंड इंजीनियर्स के बैनर तले हो रहा है, जिसमें संविदा कर्मियों ने नियमितीकरण सहित 9 प्रमुख मांगों को लेकर सरकार की अनदेखी पर नाराजगी जताई है।
5 हजार संविदा कर्मियों का भविष्य अधर में
फोरम के अध्यक्ष वी.के.एस. परिहार ने बताया कि बिजली कंपनियों में 5 हजार से अधिक संविदा कर्मचारी वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित नहीं किया गया है। हाल ही में शासन द्वारा पास किए गए नए संगठन ढांचे में 50 हजार पद सृजित किए गए हैं। फोरम की मांग है कि पहले इन अनुभवी संविदा कर्मचारियों को इन पदों पर समायोजित किया जाए।
आउटसोर्स कर्मियों को 50% आरक्षण देने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बिजली विभाग में पहले से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को 50% आरक्षण मिलना चाहिए। इसके अलावा स्थानांतरण नीति, संविदा नीति 2023 में इंक्रीमेंट और डीए, और राष्ट्रीय अवकाशों में दोहरी मजदूरी जैसी मांगें भी उठाई गईं।
बार-बार आग्रह के बाद भी सरकार का कोई जवाब नहीं
फोरम ने कहा कि पिछले एक वर्ष से बार-बार शासन को ज्ञापन और मांगपत्र सौंपे गए, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। यदि अक्टूबर तक कोई निर्णय नहीं हुआ, तो फोरम बड़े राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दे चुका है।
वेतन विसंगति और प्रमोशन जैसे मुद्दे भी शामिल
प्रदर्शन में शामिल एक प्रवक्ता ने बताया कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में परीक्षण सहायक के वेतन में भारी विसंगति है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। साथ ही, संविदा कर्मियों को भी नियमित कर्मचारियों की तरह 9, 18, 35 वर्ष की सेवा पर उच्च वेतनमान और प्रमोशन दिया जाना चाहिए।
क्यों चिंतित हैं संविदा कर्मचारी?
प्रवक्ता के अनुसार, बिजली विभाग में नियुक्त अधिकांश संविदा कर्मचारी लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं, लेकिन नियमितीकरण न होने के कारण वे भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में 100 से अधिक संविदा कर्मचारी विभाग छोड़ चुके हैं। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
