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"सच बोलने की सज़ा मिली": कांग्रेस से निष्कासित लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, नई पार्टी बनाने के संकेत
Guna, MP
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और विधायक लक्ष्मण सिंह अब पार्टी की मुख्यधारा से बाहर हो चुके हैं, लेकिन उनका तेवर और विचारधारा कहीं अधिक स्पष्ट, मुखर और निर्णायक नज़र आ रही है।
कांग्रेस से निष्कासन के बाद पहली बार खुलकर मीडिया से संवाद करते हुए लक्ष्मण सिंह ने पार्टी नेतृत्व, राहुल गांधी की सोच, आतंकी घटनाओं पर पार्टी की प्रतिक्रिया, और अपने राजनीतिक भविष्य पर विस्तार से बात की।
❝राहुल गांधी को पीएम मानो, तभी रहो – ऐसी शर्त थी❞
बातचीत में लक्ष्मण सिंह ने साफ कहा कि उन्हें कांग्रेस से बाहर इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पार्टी के बयानों और शीर्ष नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाया था। उनका कहना है कि उनसे यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे – लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
"मैं पार्टी का नहीं, आतंकवाद का विरोध कर रहा था। मुझे सज़ा इसलिए मिली क्योंकि मैंने सच बोला।"
उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि निष्कासन से पहले एक वरिष्ठ नेता का फोन आया था और उन्होंने ‘राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार’ करने की शर्त रखी थी।
कांग्रेस की दिशा राष्ट्रविरोध की ओर मुड़ती दिख रही है
लक्ष्मण सिंह ने कहा कि आतंकी घटनाओं के समय कांग्रेस के बयानों से ऐसा लगता है मानो पार्टी राष्ट्रविरोधी ताक़तों के प्रति नरम रवैया अपना रही हो। उन्होंने कश्मीर में हो रही घटनाओं के लिए अब्दुल्ला परिवार को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि इस पर कांग्रेस की चुप्पी हैरान करने वाली है।
उन्होंने राहुल गांधी की संसद में की गई टिप्पणियों पर भी आलोचना की, जहां राहुल ने सेना की रणनीति पर सवाल उठाए थे। लक्ष्मण सिंह के अनुसार,
"संसद में सेना की रणनीति नहीं, केवल बजट पर चर्चा होती है। रणनीति पर सवाल करना राष्ट्रहित के खिलाफ है।"
राजनीतिक भविष्य: भाजपा नहीं जाएंगे, लेकिन नई पार्टी पर विचार
लक्ष्मण सिंह ने साफ किया कि वह भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं, न ही किसी मौजूदा दल के संपर्क में हैं। बल्कि वे प्रदेशव्यापी दौरे पर निकलेंगे और आम जनता एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत कर भविष्य की राह तय करेंगे।
"मैं ऐसी पार्टी बनाना चाहता हूं जिसमें हाईकमान की नहीं, कार्यकर्ताओं की चले।"
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा उन्हें लेगी भी नहीं, क्योंकि वहां पहले से कई कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले नेता मौजूद हैं।
दिग्विजय सिंह से राजनीतिक संवाद नहीं
अपने बड़े भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से रिश्ते पर लक्ष्मण सिंह ने स्पष्ट किया कि
"पारिवारिक रिश्ते पहले जैसे हैं, लेकिन राजनीतिक चर्चा बहुत समय से नहीं हुई। हम दोनों अपनी स्वतंत्र राय रखते हैं।"
कांग्रेस टूट रही है, कार्यकर्ताओं की आवाज़ नहीं सुनी जाती
लक्ष्मण सिंह का मानना है कि कांग्रेस आज कार्यकर्ताओं की नहीं, केवल चापलूसी की पार्टी बनकर रह गई है। यही कारण है कि कई राज्यों में कांग्रेस क्षेत्रीय इकाइयों में टूट चुकी है।
"कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की रीढ़ होते हैं, लेकिन कांग्रेस अब सिर्फ शीर्ष नेताओं की हां-में-हां वाली संस्था बन चुकी है।"
भाजपा को धन्यवाद, पर सरकार पर भी निशाना
जहां एक ओर लक्ष्मण सिंह ने अपने बयान का समर्थन करने के लिए भाजपा का आभार जताया, वहीं मध्यप्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भी तीखा प्रहार किया।
"ब्यूरोक्रेसी बेलगाम हो चुकी है। अगर मैं दो घंटे किसी तहसील में बैठ जाऊं तो असली हालात सामने आ जाएंगे। 20 साल हो गए भाजपा को सत्ता में, अब बदलाव ज़रूरी है।"
ड्रग्स पर जताई गहरी चिंता
उन्होंने राज्य में ड्रग्स के बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि थानों के पीछे नशे का कारोबार खुलेआम चल रहा है। इंदौर जैसी घटनाओं को उन्होंने इस खतरे का उदाहरण बताया।
"अगर यह नहीं रुका तो युवाओं और समाज दोनों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।"
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"सच बोलने की सज़ा मिली": कांग्रेस से निष्कासित लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, नई पार्टी बनाने के संकेत
Guna, MP
कांग्रेस से निष्कासन के बाद पहली बार खुलकर मीडिया से संवाद करते हुए लक्ष्मण सिंह ने पार्टी नेतृत्व, राहुल गांधी की सोच, आतंकी घटनाओं पर पार्टी की प्रतिक्रिया, और अपने राजनीतिक भविष्य पर विस्तार से बात की।
❝राहुल गांधी को पीएम मानो, तभी रहो – ऐसी शर्त थी❞
बातचीत में लक्ष्मण सिंह ने साफ कहा कि उन्हें कांग्रेस से बाहर इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पार्टी के बयानों और शीर्ष नेतृत्व के रुख पर सवाल उठाया था। उनका कहना है कि उनसे यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे – लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।
"मैं पार्टी का नहीं, आतंकवाद का विरोध कर रहा था। मुझे सज़ा इसलिए मिली क्योंकि मैंने सच बोला।"
उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि निष्कासन से पहले एक वरिष्ठ नेता का फोन आया था और उन्होंने ‘राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार’ करने की शर्त रखी थी।
कांग्रेस की दिशा राष्ट्रविरोध की ओर मुड़ती दिख रही है
लक्ष्मण सिंह ने कहा कि आतंकी घटनाओं के समय कांग्रेस के बयानों से ऐसा लगता है मानो पार्टी राष्ट्रविरोधी ताक़तों के प्रति नरम रवैया अपना रही हो। उन्होंने कश्मीर में हो रही घटनाओं के लिए अब्दुल्ला परिवार को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि इस पर कांग्रेस की चुप्पी हैरान करने वाली है।
उन्होंने राहुल गांधी की संसद में की गई टिप्पणियों पर भी आलोचना की, जहां राहुल ने सेना की रणनीति पर सवाल उठाए थे। लक्ष्मण सिंह के अनुसार,
"संसद में सेना की रणनीति नहीं, केवल बजट पर चर्चा होती है। रणनीति पर सवाल करना राष्ट्रहित के खिलाफ है।"
राजनीतिक भविष्य: भाजपा नहीं जाएंगे, लेकिन नई पार्टी पर विचार
लक्ष्मण सिंह ने साफ किया कि वह भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं, न ही किसी मौजूदा दल के संपर्क में हैं। बल्कि वे प्रदेशव्यापी दौरे पर निकलेंगे और आम जनता एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत कर भविष्य की राह तय करेंगे।
"मैं ऐसी पार्टी बनाना चाहता हूं जिसमें हाईकमान की नहीं, कार्यकर्ताओं की चले।"
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा उन्हें लेगी भी नहीं, क्योंकि वहां पहले से कई कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले नेता मौजूद हैं।
दिग्विजय सिंह से राजनीतिक संवाद नहीं
अपने बड़े भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से रिश्ते पर लक्ष्मण सिंह ने स्पष्ट किया कि
"पारिवारिक रिश्ते पहले जैसे हैं, लेकिन राजनीतिक चर्चा बहुत समय से नहीं हुई। हम दोनों अपनी स्वतंत्र राय रखते हैं।"
कांग्रेस टूट रही है, कार्यकर्ताओं की आवाज़ नहीं सुनी जाती
लक्ष्मण सिंह का मानना है कि कांग्रेस आज कार्यकर्ताओं की नहीं, केवल चापलूसी की पार्टी बनकर रह गई है। यही कारण है कि कई राज्यों में कांग्रेस क्षेत्रीय इकाइयों में टूट चुकी है।
"कार्यकर्ता किसी भी पार्टी की रीढ़ होते हैं, लेकिन कांग्रेस अब सिर्फ शीर्ष नेताओं की हां-में-हां वाली संस्था बन चुकी है।"
भाजपा को धन्यवाद, पर सरकार पर भी निशाना
जहां एक ओर लक्ष्मण सिंह ने अपने बयान का समर्थन करने के लिए भाजपा का आभार जताया, वहीं मध्यप्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भी तीखा प्रहार किया।
"ब्यूरोक्रेसी बेलगाम हो चुकी है। अगर मैं दो घंटे किसी तहसील में बैठ जाऊं तो असली हालात सामने आ जाएंगे। 20 साल हो गए भाजपा को सत्ता में, अब बदलाव ज़रूरी है।"
ड्रग्स पर जताई गहरी चिंता
उन्होंने राज्य में ड्रग्स के बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि थानों के पीछे नशे का कारोबार खुलेआम चल रहा है। इंदौर जैसी घटनाओं को उन्होंने इस खतरे का उदाहरण बताया।
"अगर यह नहीं रुका तो युवाओं और समाज दोनों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।"
