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मध्यावर्त लिटरेचर फेस्टिवल की महफ़िल में मची साहित्यिक और सांस्कृतिक धूम
BHOPAL, MP
By दैनिक जागरण
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भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित रंगश्री लिटिल बैलेट ट्रूप के सभागार में मध्यावर्त लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें देश भर से पधारे सुप्रसिद्ध कलाकारों ने अपने फ़न का जादू बिखेरा। शब्द, संगीत और नृत्य की इस मोहक शाम ने कला-प्रेमियों को एक यादगार अनुभव प्रदान किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ देश-विदेश में कथक के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर का परचम लहराने वाली प्रख्यात नृत्यांगना डॉ. श्यामा पंडित के मनमोहक कथक नृत्य से हुआ। 'ठुमक चलत रामचंद्र' पर अपनी प्रस्तुति देकर श्यामा जी ने श्री राम की स्तुति की। इसके उपरांत, उस्ताद सलीम अल्लावाले और उनकी टीम की दिल को छू लेने वाली गायकी ने महफ़िल में सुरों की मिठास घोल दी। उन्होंने ने न सिर्फ़ ग़ज़लें प्रस्तुत कीं, अपितु श्री राम चरित मानस की चौपाइयाँ गाकर भोपाल और देश की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल क़ायम की। ग्रैंड मुशायरे में साहित्य का रंग और निखर के आया, जब देश के कोने-कोने से आए रचनाकारों ने अपने जज़्बात और ख़यालात शायरी के ज़रिए पेश किए.
मेरठ से आए अज़हर इक़बाल ने कहा: "पाप पर अब पश्चाताप कौन करे..."
सम्भल से आए अमीर इमाम ने पढ़ा: "मत बताना कि बिखर जाएं तो क्या होता है, नई नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना.."
लखीमपुर के चर्चित गीतकार ज्ञान प्रकाश आकुल ने सुनाया: "हम सोने के हिरण नहीं हैं, हम पर तीर ना ताना जाए.."
दिल्ली से आए पल्लव मिश्रा ने युवा संवेदनाओं को आवाज़ देते हुए कहा: "मैं उससे मिलने समय से पहले पहुँच गया था, सो उसके दर के क़रीब आकर भटक रहा हूँ.."
चेन्नई से आए राज तिवारी के ‘राम-गीत’ ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। साथ ही इंदौर के गीतकार महेंद्र सिंह पवार, भोपाल की ममता तिवारी और आमिर अज़हर ने भी अपनी रचनाओं से मन मोह लिया इस अवसर पर ज्ञान प्रकाश आकुल को ‘गीत-सुधाकर सम्मान’ से सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में शहर के युवा कलाकारों की चित्रकला प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी। शुभम कुशवाहा द्वारा थ्रेड आर्ट से बनाई गई दुष्यंत कुमार की चित्रकृति और अंकित बागड़े द्वारा मध्यप्रदेश के चर्चित कलाकारों की तस्वीरों ने कला-प्रेमियों का मन जीत लिया। इस कार्यक्रम में महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ पर आधारित मध्यावर्त द्वारा निर्मित शॉर्ट फ़िल्म की विशेष स्क्रीनिंग हुई, जिसे दर्शकों ने अपार सराहना दी।
हमारी फ़िल्म की इस आराधना को बल दिया अशोक निर्मल और आरिन ने.. हमारी इस सेना में साथ रहे कैमरा डिपार्टमेंट में आकाश और अमित। प्रोडक्शन डिज़ाइन गिरीश श्रीवास्तव ने किया, प्रोडक्शन मैनेजमेंट रहा आशीष, अमन और सन्नी के ज़िम्मे। मेकअप और हेयर काजल पाण्डेय और निशिका वर्मा का है। देवी दुर्गा के रूप में सौम्या पाण्डेय उनकी भुजाएं काजल पांडेय, इरा सक्सेना, तनुष्का सोनी, राम के रूप में डायमंड सोनी, सरस्वती मांडवी, लक्ष्मी कशक, गणेश पार्थ अरौंकर, कार्तिकेय अंकित बागड़े भूमिका निभा रहे हैँ। सेट को पूजा के वातावरण में ढालने में पंडित दीपक शर्मा का सहयोग रहा।
यह शाम, कला, साहित्य और संस्कृति के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। एक ऐसा आयोजन जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है।
Edited By: दैनिक जागरण
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07 Apr 2025 By दैनिक जागरण
मध्यावर्त लिटरेचर फेस्टिवल की महफ़िल में मची साहित्यिक और सांस्कृतिक धूम
BHOPAL, MP
भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित रंगश्री लिटिल बैलेट ट्रूप के सभागार में मध्यावर्त लिटरेचर फेस्टिवल का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें देश भर से पधारे सुप्रसिद्ध कलाकारों ने अपने फ़न का जादू बिखेरा। शब्द, संगीत और नृत्य की इस मोहक शाम ने कला-प्रेमियों को एक यादगार अनुभव प्रदान किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ देश-विदेश में कथक के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर का परचम लहराने वाली प्रख्यात नृत्यांगना डॉ. श्यामा पंडित के मनमोहक कथक नृत्य से हुआ। 'ठुमक चलत रामचंद्र' पर अपनी प्रस्तुति देकर श्यामा जी ने श्री राम की स्तुति की। इसके उपरांत, उस्ताद सलीम अल्लावाले और उनकी टीम की दिल को छू लेने वाली गायकी ने महफ़िल में सुरों की मिठास घोल दी। उन्होंने ने न सिर्फ़ ग़ज़लें प्रस्तुत कीं, अपितु श्री राम चरित मानस की चौपाइयाँ गाकर भोपाल और देश की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल क़ायम की। ग्रैंड मुशायरे में साहित्य का रंग और निखर के आया, जब देश के कोने-कोने से आए रचनाकारों ने अपने जज़्बात और ख़यालात शायरी के ज़रिए पेश किए.
मेरठ से आए अज़हर इक़बाल ने कहा: "पाप पर अब पश्चाताप कौन करे..."
सम्भल से आए अमीर इमाम ने पढ़ा: "मत बताना कि बिखर जाएं तो क्या होता है, नई नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना.."
लखीमपुर के चर्चित गीतकार ज्ञान प्रकाश आकुल ने सुनाया: "हम सोने के हिरण नहीं हैं, हम पर तीर ना ताना जाए.."
दिल्ली से आए पल्लव मिश्रा ने युवा संवेदनाओं को आवाज़ देते हुए कहा: "मैं उससे मिलने समय से पहले पहुँच गया था, सो उसके दर के क़रीब आकर भटक रहा हूँ.."
चेन्नई से आए राज तिवारी के ‘राम-गीत’ ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। साथ ही इंदौर के गीतकार महेंद्र सिंह पवार, भोपाल की ममता तिवारी और आमिर अज़हर ने भी अपनी रचनाओं से मन मोह लिया इस अवसर पर ज्ञान प्रकाश आकुल को ‘गीत-सुधाकर सम्मान’ से सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में शहर के युवा कलाकारों की चित्रकला प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी। शुभम कुशवाहा द्वारा थ्रेड आर्ट से बनाई गई दुष्यंत कुमार की चित्रकृति और अंकित बागड़े द्वारा मध्यप्रदेश के चर्चित कलाकारों की तस्वीरों ने कला-प्रेमियों का मन जीत लिया। इस कार्यक्रम में महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ पर आधारित मध्यावर्त द्वारा निर्मित शॉर्ट फ़िल्म की विशेष स्क्रीनिंग हुई, जिसे दर्शकों ने अपार सराहना दी।
हमारी फ़िल्म की इस आराधना को बल दिया अशोक निर्मल और आरिन ने.. हमारी इस सेना में साथ रहे कैमरा डिपार्टमेंट में आकाश और अमित। प्रोडक्शन डिज़ाइन गिरीश श्रीवास्तव ने किया, प्रोडक्शन मैनेजमेंट रहा आशीष, अमन और सन्नी के ज़िम्मे। मेकअप और हेयर काजल पाण्डेय और निशिका वर्मा का है। देवी दुर्गा के रूप में सौम्या पाण्डेय उनकी भुजाएं काजल पांडेय, इरा सक्सेना, तनुष्का सोनी, राम के रूप में डायमंड सोनी, सरस्वती मांडवी, लक्ष्मी कशक, गणेश पार्थ अरौंकर, कार्तिकेय अंकित बागड़े भूमिका निभा रहे हैँ। सेट को पूजा के वातावरण में ढालने में पंडित दीपक शर्मा का सहयोग रहा।
यह शाम, कला, साहित्य और संस्कृति के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। एक ऐसा आयोजन जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है।
https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/literary-and-cultural-celebrations-in-the-mahfil-of-madhyavat-literature/article-17081
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