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मस्तक पर चंद्र अर्पित कर हुआ भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार
Ujjain, MP
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी की पावन तिथि पर भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार अल सुबह भक्तों को दर्शन लाभ देने वाला रहा। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही महाकाल के अभिषेक और श्रृंगार की विधि शुरू हुई।
🕉️ अभिषेक से श्रृंगार तक का क्रम:
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सबसे पहले गंगाजल से महाभिषेक, फिर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बना पंचामृत अर्पित किया गया।
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इसके बाद बाबा को भस्म चढ़ाई गई और रजत शेषनाग मुकुट उनके मस्तक पर सुशोभित हुआ।
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गले में रुद्राक्ष की माला, और सुगंधित गुलाब के फूलों की सुंदर माला पहनाई गई।
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अंत में फल, मिष्ठान्न और नैवेद्य का भोग अर्पित किया गया।
🔥 अल सुबह भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु:
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रातः भस्म आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।
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श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में मनोकामना कहने की परंपरा निभाते दिखे।
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मंदिर परिसर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज उठा।
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दर्शन के साथ भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव किया।
📸 दर्शन के लिए यहाँ जुड़ें:
महाकाल के इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन आप मंदिर की [आधिकारिक वेबसाइट] या [सोशल मीडिया लाइव] पर भी कर सकते हैं।
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सबसे पहले गंगाजल से महाभिषेक, फिर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बना पंचामृत अर्पित किया गया।
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इसके बाद बाबा को भस्म चढ़ाई गई और रजत शेषनाग मुकुट उनके मस्तक पर सुशोभित हुआ।
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गले में रुद्राक्ष की माला, और सुगंधित गुलाब के फूलों की सुंदर माला पहनाई गई।
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अंत में फल, मिष्ठान्न और नैवेद्य का भोग अर्पित किया गया।
🔥 अल सुबह भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु:
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रातः भस्म आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।
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श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में मनोकामना कहने की परंपरा निभाते दिखे।
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मंदिर परिसर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज उठा।
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दर्शन के साथ भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव किया।
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