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चंद्रग्रहण आज भारत में दिखाई देगा: उज्जैन में मंदिर व्यवस्थाओं में बदलाव, महाकाल मंदिर के पट एक घंटे पहले बंद होंगे
Ujjain, MP
आज रात भारतीय समय अनुसार चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना होगी, जो 10:58 बजे से शुरू होकर करीब 3 घंटे 28 मिनट तक चलेगी। ग्रहण रात 1:26 बजे समाप्त होगा। साल का यह दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण इस बार पूरी तरह भारत में दिखाई देगा।
इससे पहले 14 मार्च को आए चंद्रग्रहण को भारत में नहीं देखा गया था। इस शुभ अवसर पर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में पूजा और दर्शन व्यवस्थाओं में विशेष बदलाव किए गए हैं।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में आज के लिए शयन आरती का समय पहले कर दिया गया है। आरती अब रात 10:30 बजे होगी, यानी एक घंटे पहले। साथ ही मंगलनाथ मंदिर में भात पूजन केवल सुबह 11 बजे तक किया जाएगा, उसके बाद बंद रहेगा। हरसिद्धि मंदिर में इस दौरान मूर्ति स्पर्श पर भी प्रतिबंध रहेगा।
नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी चंद्र ग्रहण के दौरान पूर्ण रूप से पूजा-अर्चना बंद रहेगी।
सलकनपुर के विजासन माता मंदिर के पट ग्रहण काल के लिए बंद रहेंगे।
इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में दोपहर 12:57 से दर्शन के लिए प्रवेश रोका जाएगा। लेकिन दतिया के पीतांबरा पीठ में ग्रहण के दौरान कोई बदलाव नहीं रहेगा, और सभी पूजा कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे। वहीं मां शारदा मंदिर मैहर में ग्रहण काल में भोग नहीं लगेगा, लेकिन दर्शन सुचारू रूप से जारी रहेंगे।
उज्जैन की जीवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि पूर्ण चंद्रग्रहण की मध्य स्थिति रात्रि 11:41 बजे होगी, जब चंद्रमा का करीब 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में ढका रहेगा।
महाकाल मंदिर में सूतक काल से पहले पूजा-अर्चना पूरी होगी, उसके बाद चांदी द्वार बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन सुबह मंदिर का शुद्धिकरण कर पुनः पूजा का क्रम शुरू किया जाएगा।
इसी प्रकार सांदीपनि आश्रम सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में भी ग्रहण से पहले पूजन आरती संपन्न कर दी जाएगी।
इस आयोजन से जुड़े नियमों का पालन श्रद्धालु भी करेंगे। सभी मंदिर अधिकारियों ने साफ किया है कि ग्रहण काल में विशेष ध्यान रखते हुए पूजा-अर्चना नहीं होगी, लेकिन श्रद्धालु बाहर से भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
चंद्र ग्रहण के पश्चात मंदिर परिसर का विशेष शुद्धिकरण कर नए वस्त्र धारण कराकर फिर से पूजा का क्रम आरंभ किया जाएगा। यह पवित्र अवसर धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए मनाया जाएगा।
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इससे पहले 14 मार्च को आए चंद्रग्रहण को भारत में नहीं देखा गया था। इस शुभ अवसर पर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में पूजा और दर्शन व्यवस्थाओं में विशेष बदलाव किए गए हैं।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में आज के लिए शयन आरती का समय पहले कर दिया गया है। आरती अब रात 10:30 बजे होगी, यानी एक घंटे पहले। साथ ही मंगलनाथ मंदिर में भात पूजन केवल सुबह 11 बजे तक किया जाएगा, उसके बाद बंद रहेगा। हरसिद्धि मंदिर में इस दौरान मूर्ति स्पर्श पर भी प्रतिबंध रहेगा।
नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी चंद्र ग्रहण के दौरान पूर्ण रूप से पूजा-अर्चना बंद रहेगी।
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इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में दोपहर 12:57 से दर्शन के लिए प्रवेश रोका जाएगा। लेकिन दतिया के पीतांबरा पीठ में ग्रहण के दौरान कोई बदलाव नहीं रहेगा, और सभी पूजा कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे। वहीं मां शारदा मंदिर मैहर में ग्रहण काल में भोग नहीं लगेगा, लेकिन दर्शन सुचारू रूप से जारी रहेंगे।
उज्जैन की जीवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि पूर्ण चंद्रग्रहण की मध्य स्थिति रात्रि 11:41 बजे होगी, जब चंद्रमा का करीब 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में ढका रहेगा।
महाकाल मंदिर में सूतक काल से पहले पूजा-अर्चना पूरी होगी, उसके बाद चांदी द्वार बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन सुबह मंदिर का शुद्धिकरण कर पुनः पूजा का क्रम शुरू किया जाएगा।
इसी प्रकार सांदीपनि आश्रम सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में भी ग्रहण से पहले पूजन आरती संपन्न कर दी जाएगी।
इस आयोजन से जुड़े नियमों का पालन श्रद्धालु भी करेंगे। सभी मंदिर अधिकारियों ने साफ किया है कि ग्रहण काल में विशेष ध्यान रखते हुए पूजा-अर्चना नहीं होगी, लेकिन श्रद्धालु बाहर से भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
चंद्र ग्रहण के पश्चात मंदिर परिसर का विशेष शुद्धिकरण कर नए वस्त्र धारण कराकर फिर से पूजा का क्रम आरंभ किया जाएगा। यह पवित्र अवसर धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए मनाया जाएगा।
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