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महाकाल भस्म आरती 22 मई: चांदी का बेलपत्र और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन महाकाल मंदिर में 22 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का चांदी के बेलपत्र और त्रिशूल से विशेष श्रृंगार किया गया।
Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े अदब से पूरी की गई। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए और इसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस दौरान भगवान महाकालेश्वर को चांदी का बेलपत्र, त्रिशूल और कई आभूषणों से सजाया गया। मंदिर के परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कहा जा रहा है कि आरती शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच चुके थे।
पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। शुरुआती जानकारी से पता चला है कि जलाभिषेक के बाद पंचामृत से अभिषेक हुआ, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस शामिल था। फिर भांग, चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का श्रंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंजती रही। बताया जा रहा है कि आरती के समय का माहौल बहुत भक्ति से भरा और शांत था, और श्रद्धालु लगातार ‘जय श्री महाकाल’ के नारे लगाते रहे।
भस्म अर्पण से पहले पहली घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित करके विधिवत पूजा की गई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस सुबह की आरती में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के पास जाकर कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहते नजर आए। सुबह होते-होते पूरा मंदिर भक्तों की भीड़ और जयकारों से गूंज उठा। उज्जैन में महाकाल आरती का ये नजारा देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, खासकर ज्येष्ठ माह में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
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महाकाल भस्म आरती 22 मई: चांदी का बेलपत्र और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार
उज्जैन (म.प्र.)
Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े अदब से पूरी की गई। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए और इसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस दौरान भगवान महाकालेश्वर को चांदी का बेलपत्र, त्रिशूल और कई आभूषणों से सजाया गया। मंदिर के परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कहा जा रहा है कि आरती शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच चुके थे।
पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। शुरुआती जानकारी से पता चला है कि जलाभिषेक के बाद पंचामृत से अभिषेक हुआ, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस शामिल था। फिर भांग, चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का श्रंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंजती रही। बताया जा रहा है कि आरती के समय का माहौल बहुत भक्ति से भरा और शांत था, और श्रद्धालु लगातार ‘जय श्री महाकाल’ के नारे लगाते रहे।
भस्म अर्पण से पहले पहली घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित करके विधिवत पूजा की गई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस सुबह की आरती में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के पास जाकर कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहते नजर आए। सुबह होते-होते पूरा मंदिर भक्तों की भीड़ और जयकारों से गूंज उठा। उज्जैन में महाकाल आरती का ये नजारा देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, खासकर ज्येष्ठ माह में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
