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मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में दो युवकों की सामूहिक आत्महत्या: समाज की कठोरता या प्रेम की सजा?
Khandwa, MP
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के इनपुन गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। महज 18 साल के दो युवकों ने समाजिक दबाव और शायद अपनी नादानी के चलते एक ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
ये आत्महत्या नहीं, एक समाज की चुप्पी, अपमान और संवेदनहीनता की मारक परिणति थी।
चार दिन पहले भागे थे दो लड़कियों के साथ
मृतकों की पहचान मनीष गिरी (निवासी इनपुन) और लकी गिरी (निवासी चोपड़ा, थाना कमलापुर) के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों युवक चार-पांच दिन पहले गांव की दो युवतियों को भगाकर चेन्नई चले गए थे। वहां से भोपाल पहुंचे और फिर परिजनों की सहमति के बाद शिप्रा बुलाया गया, जहाँ से उन्हें सुबह-सुबह कार द्वारा ओंकारेश्वर के इनपुन गांव लाया गया।
कमरे में बंद कर दिए गए युवक, बाहर बैठे रहे समाज के लोग
स्थानीय समाज के हस्तक्षेप से चारों को गांव लाने के बाद जितेंद्र गिरी के घर में अलग-अलग कमरों में बंद कर दिया गया। घर के बाहर परिजन और समाज के लोग मौजूद थे। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि युवक अपने जीवन का इतना खौफनाक फैसला ले चुके हैं। करीब आधे घंटे बाद जब कमरा खोला गया तो दोनों युवक रोशनदान में फंदे से लटके मिले।
समाज की कठोरता या संवाद की कमी?
यह सिर्फ आत्महत्या नहीं थी, बल्कि उन सवालों की चीख थी जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं—
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क्या प्रेम करना इतना बड़ा अपराध था?
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क्या समाज में आज भी युवा अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर सकते?
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क्या संवाद के बिना दबाव बनाना अब सामान्य होता जा रहा है?
आत्महत्या नहीं, एक सामाजिक चेतावनी
इन मासूम उम्रों का अंत समाज के रवैये पर गहरी चोट करता है। यदि उन्हें समझाया गया होता, सुना गया होता, तो शायद आज ये दोनों ज़िंदा होते। यह घटना सिर्फ दो युवकों की मौत नहीं, बल्कि पूरे समाज को आइना दिखाने वाली त्रासदी है।
पुलिस कर रही जांच, मर्ग कायम
पुलिस ने घटना के बाद मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मोरटक्का चौकी प्रभारी द्वारा जांच जारी है। साथ ही युवतियों के बयान भी लिए जा रहे हैं।
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मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में दो युवकों की सामूहिक आत्महत्या: समाज की कठोरता या प्रेम की सजा?
Khandwa, MP
ये आत्महत्या नहीं, एक समाज की चुप्पी, अपमान और संवेदनहीनता की मारक परिणति थी।
चार दिन पहले भागे थे दो लड़कियों के साथ
मृतकों की पहचान मनीष गिरी (निवासी इनपुन) और लकी गिरी (निवासी चोपड़ा, थाना कमलापुर) के रूप में हुई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों युवक चार-पांच दिन पहले गांव की दो युवतियों को भगाकर चेन्नई चले गए थे। वहां से भोपाल पहुंचे और फिर परिजनों की सहमति के बाद शिप्रा बुलाया गया, जहाँ से उन्हें सुबह-सुबह कार द्वारा ओंकारेश्वर के इनपुन गांव लाया गया।
कमरे में बंद कर दिए गए युवक, बाहर बैठे रहे समाज के लोग
स्थानीय समाज के हस्तक्षेप से चारों को गांव लाने के बाद जितेंद्र गिरी के घर में अलग-अलग कमरों में बंद कर दिया गया। घर के बाहर परिजन और समाज के लोग मौजूद थे। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि युवक अपने जीवन का इतना खौफनाक फैसला ले चुके हैं। करीब आधे घंटे बाद जब कमरा खोला गया तो दोनों युवक रोशनदान में फंदे से लटके मिले।
समाज की कठोरता या संवाद की कमी?
यह सिर्फ आत्महत्या नहीं थी, बल्कि उन सवालों की चीख थी जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं—
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क्या प्रेम करना इतना बड़ा अपराध था?
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क्या समाज में आज भी युवा अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर सकते?
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क्या संवाद के बिना दबाव बनाना अब सामान्य होता जा रहा है?
आत्महत्या नहीं, एक सामाजिक चेतावनी
इन मासूम उम्रों का अंत समाज के रवैये पर गहरी चोट करता है। यदि उन्हें समझाया गया होता, सुना गया होता, तो शायद आज ये दोनों ज़िंदा होते। यह घटना सिर्फ दो युवकों की मौत नहीं, बल्कि पूरे समाज को आइना दिखाने वाली त्रासदी है।
पुलिस कर रही जांच, मर्ग कायम
पुलिस ने घटना के बाद मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मोरटक्का चौकी प्रभारी द्वारा जांच जारी है। साथ ही युवतियों के बयान भी लिए जा रहे हैं।
