एमपी बजट 2026-27: जबलपुर को सीधी घोषणा नहीं, योजनाओं से अप्रत्यक्ष लाभ की उम्मीद

जबलपुर (म.प्र.)

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4.65 लाख करोड़ के बजट में शहर का नाम नहीं, सड़क व सिंचाई परियोजनाओं से मिल सकता है फायदा

मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। सरकार के तीसरे रोलिंग बजट में तीन वर्षों का रोडमैप रखा गया है, लेकिन जबलपुर शहर के लिए कोई अलग या नामित परियोजना घोषित नहीं की गई। लगातार दूसरे वर्ष बजट भाषण में शहर का उल्लेख सीधे तौर पर नहीं हुआ।

हालांकि राज्यस्तरीय कई बड़ी योजनाओं से जबलपुर संभाग को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार ने सड़क, पुल और एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण के लिए 12,690 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे प्रमुख शहरी केंद्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण अंचलों के लिए 21,360 करोड़ रुपये की मजरा-टोला सड़क योजना से आसपास के गांवों को बेहतर संपर्क मिलेगा, जिससे व्यापार और परिवहन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

सिंचाई और जल संसाधन विभाग के लिए 14,742 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नर्मदा बेसिन क्षेत्र में आने वाले जबलपुर को इसका लाभ मिल सकता है। बरगी व्यपवर्तन योजना पर 355 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है, जिससे पेयजल आपूर्ति और कृषि सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होने की संभावना है। नई नहरों और पाइपलाइन परियोजनाओं से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।

नगरीय अधोसंरचना पर भी फोकस किया गया है। पेयजल, बिजली और सड़क सुधार योजनाओं के साथ छह जिलों में ई-बस सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसमें जबलपुर के शामिल होने की संभावना है। ऊर्जा क्षेत्र में सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना भी रखी गई है, जिससे शहरी बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाने का लक्ष्य है।

उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय को ब्लॉक ग्रांट प्रदान की जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 23,747 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों की सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। जनजातीय विकास मद में 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे संभाग के आदिवासी क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कुल बजट आकार 4.21 लाख करोड़ रुपये था। उस समय भी जबलपुर के लिए अलग से कोई प्रमुख घोषणा नहीं हुई थी। इस बार बजट का आकार बढ़ा है, लेकिन शहर-विशेष परियोजना का अभाव बना हुआ है।

व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने जबलपुर के लिए बड़े और नामित प्रोजेक्ट की मांग दोहराई है। सरकार ने वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित करते हुए 5,500 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री कृषक उन्नति योजना की घोषणा की है। फिलहाल स्थिति यही है कि बजट में जबलपुर का नाम नहीं है, पर राज्य स्तरीय योजनाओं से अप्रत्यक्ष लाभ की उम्मीद कायम है। अब ध्यान इस पर रहेगा कि घोषित योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होती हैं।

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