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MP Weather: कहीं बाढ़ जैसे हालात, फिर भी मध्य प्रदेश में 15% कम बारिश; बांधों में पिछले साल से 26% कम पानी
Digital Desk
प्रदेश में 1 जून से 10 अगस्त तक सामान्य 571 मिमी के मुकाबले 483 मिमी वर्षा दर्ज हुई। बांध औसतन 49 प्रतिशत भरे हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय जलभराव 75 प्रतिशत था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कम बारिश और अतिवृष्टि—दोनों परिस्थितियों के लिए प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल: मध्य प्रदेश में कुछ जिलों में तेज बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पूरे प्रदेश की मानसूनी तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य में इस मानसून अब तक सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। प्रदेश के बांधों में भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम पानी जमा हुआ है। इसका असर आने वाले महीनों में सिंचाई, रबी फसलों और जलापूर्ति पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में वर्षा की स्थिति और उससे पैदा हुई चुनौतियों की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 1 जून से 10 अगस्त के बीच मध्य प्रदेश में सामान्यतः 571 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में 483 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। यानी प्रदेश को अब तक सामान्य से करीब 88 मिलीमीटर कम पानी मिला है। पूर्वी मध्य प्रदेश में इस अवधि में 513.20 मिलीमीटर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 459.80 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में धान की लगभग 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है, इसलिए आने वाले दिनों में बारिश का वितरण किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कहीं एक दिन में मूसलाधार बारिश, कहीं अब भी कमी
प्रदेश की मौजूदा स्थिति मानसून के असमान वितरण को भी दिखाती है। राजधानी भोपाल में पिछले 24 घंटों के दौरान करीब सात इंच बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम में पांच इंच, रायसेन में 4.9 इंच, राजगढ़ और शाजापुर में 4.5 इंच तथा सीहोर में चार इंच तक बारिश हुई। इससे कई स्थानों पर जलभराव, रास्ते बंद होने और निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी। भोपाल में भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए 11 अगस्त को नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखे गए। दूसरी ओर, राज्य के कई हिस्सों में मानसून की कुल बारिश अब भी सामान्य से कम बनी हुई है। इस विरोधाभासी स्थिति में प्रशासन को एक साथ बाढ़ और पानी की संभावित कमी—दोनों से निपटना पड़ रहा है।
बांधों में औसतन केवल 49 प्रतिशत पानी
सरकारी समीक्षा में बताया गया कि 10 अगस्त तक प्रदेश के बांधों में औसतन 49 प्रतिशत जलभराव हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इसी अवधि का औसत जलभराव करीब 59 प्रतिशत रहा है, जबकि पिछले वर्ष इस समय बांध 75 प्रतिशत तक भर चुके थे। प्रदेश के 36 जलाशयों में उनकी क्षमता का 50 प्रतिशत या उससे कम पानी है। अन्य 18 जलाशयों में जलभराव 50 से 90 प्रतिशत के बीच बताया गया है। इन आंकड़ों के कारण सरकार ने रबी सीजन की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों को कम पानी वाली फसलों की सलाह
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को किसानों को ऐसी फसलों के लिए प्रेरित करने को कहा है जिनमें सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है। विशेष रूप से चने की फसल के लिए पर्याप्त बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खाद और बीज की आपूर्ति, सिंचाई के दौरान निर्बाध बिजली तथा अधिक किसानों को फसल बीमा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। खाद या बीज की कालाबाजारी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
24 घंटे सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम
राज्य और जिला स्तर के आपदा नियंत्रण कक्षों को चौबीस घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। बांधों और तालाबों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाएगी। बांध से पानी छोड़ने की जरूरत पड़ने पर निचले क्षेत्रों के लोगों को पहले चेतावनी देने और आवश्यकता होने पर राहत शिविर तैयार रखने को कहा गया है। अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान होने की स्थिति में राजस्व विभाग को पारदर्शी सर्वे कर पात्र किसानों को आपदा राहत कोष से सहायता दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—जिन क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है वहां जनजीवन और फसलों को बचाना तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए पानी और रबी फसलों की समय रहते योजना बनाना।
MP Weather: कहीं बाढ़ जैसे हालात, फिर भी मध्य प्रदेश में 15% कम बारिश; बांधों में पिछले साल से 26% कम पानी
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भोपाल: मध्य प्रदेश में कुछ जिलों में तेज बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पूरे प्रदेश की मानसूनी तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य में इस मानसून अब तक सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। प्रदेश के बांधों में भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम पानी जमा हुआ है। इसका असर आने वाले महीनों में सिंचाई, रबी फसलों और जलापूर्ति पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में वर्षा की स्थिति और उससे पैदा हुई चुनौतियों की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 1 जून से 10 अगस्त के बीच मध्य प्रदेश में सामान्यतः 571 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में 483 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। यानी प्रदेश को अब तक सामान्य से करीब 88 मिलीमीटर कम पानी मिला है। पूर्वी मध्य प्रदेश में इस अवधि में 513.20 मिलीमीटर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 459.80 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में धान की लगभग 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है, इसलिए आने वाले दिनों में बारिश का वितरण किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कहीं एक दिन में मूसलाधार बारिश, कहीं अब भी कमी
प्रदेश की मौजूदा स्थिति मानसून के असमान वितरण को भी दिखाती है। राजधानी भोपाल में पिछले 24 घंटों के दौरान करीब सात इंच बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम में पांच इंच, रायसेन में 4.9 इंच, राजगढ़ और शाजापुर में 4.5 इंच तथा सीहोर में चार इंच तक बारिश हुई। इससे कई स्थानों पर जलभराव, रास्ते बंद होने और निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी। भोपाल में भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए 11 अगस्त को नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रखे गए। दूसरी ओर, राज्य के कई हिस्सों में मानसून की कुल बारिश अब भी सामान्य से कम बनी हुई है। इस विरोधाभासी स्थिति में प्रशासन को एक साथ बाढ़ और पानी की संभावित कमी—दोनों से निपटना पड़ रहा है।
बांधों में औसतन केवल 49 प्रतिशत पानी
सरकारी समीक्षा में बताया गया कि 10 अगस्त तक प्रदेश के बांधों में औसतन 49 प्रतिशत जलभराव हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इसी अवधि का औसत जलभराव करीब 59 प्रतिशत रहा है, जबकि पिछले वर्ष इस समय बांध 75 प्रतिशत तक भर चुके थे। प्रदेश के 36 जलाशयों में उनकी क्षमता का 50 प्रतिशत या उससे कम पानी है। अन्य 18 जलाशयों में जलभराव 50 से 90 प्रतिशत के बीच बताया गया है। इन आंकड़ों के कारण सरकार ने रबी सीजन की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों को कम पानी वाली फसलों की सलाह
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को किसानों को ऐसी फसलों के लिए प्रेरित करने को कहा है जिनमें सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है। विशेष रूप से चने की फसल के लिए पर्याप्त बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खाद और बीज की आपूर्ति, सिंचाई के दौरान निर्बाध बिजली तथा अधिक किसानों को फसल बीमा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। खाद या बीज की कालाबाजारी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
24 घंटे सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम
राज्य और जिला स्तर के आपदा नियंत्रण कक्षों को चौबीस घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। बांधों और तालाबों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाएगी। बांध से पानी छोड़ने की जरूरत पड़ने पर निचले क्षेत्रों के लोगों को पहले चेतावनी देने और आवश्यकता होने पर राहत शिविर तैयार रखने को कहा गया है। अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान होने की स्थिति में राजस्व विभाग को पारदर्शी सर्वे कर पात्र किसानों को आपदा राहत कोष से सहायता दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है—जिन क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है वहां जनजीवन और फसलों को बचाना तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए पानी और रबी फसलों की समय रहते योजना बनाना।
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