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13 जिलों में अपात्र को दी 23.81 करोड़ की प्राकतिक आपदा राशि, कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में प्राकतिक आपदा में दी जाने वाली राहत राशि में भारी झोल झाल हुआ है। यह झोल झाल किसी और ने नहीं बल्कि संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने ही की है। वर्ष 2018 से 2022 तक पांच साल में 13 जिलों में कर्मचारियों उनके रिश्तेदारों समेत अपात्र को 23.81 करोड़ की राहत राशि दी गई है।
यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG) कैग की एक रिपोर्ट में हुआ है। कैग रिपोर्ट में सरकारी जमीन आवंटन में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। भोपाल में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को नियम विरुद्ध जमीन आवंटित की गई जिससे 65.5 करोड़ राजस्व का नुकसान हुआ है। संबल योजना में भी गड़बड़ी सामने आई है। 67 लाख 48 हजार श्रमिकों को अपात्र किया गया है। संबल योजना के कुल 31 फीसदी अपात्र किया गया। इसी तरह अंत्येष्टि सहायता राशि में भी गड़बड़ी की गई है। श्रमसेवा पोर्टल के डाटा का विश्लेषण किया गया जिसमें 142 मामलों में 52 खातों में 1.68 करोड़ की राशि जमा की गई, ये खाते पंजीकृत श्रमिकों के नहीं थे। विवाह सहायता के 86 मामलों में बिना पंजीकृत श्रमिकों के 41 बैंक खातों में 38.92 लाख की राशि जमा की गई। ‘


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13 जिलों में अपात्र को दी 23.81 करोड़ की प्राकतिक आपदा राशि, कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में प्राकतिक आपदा में दी जाने वाली राहत राशि में भारी झोल झाल हुआ है। यह झोल झाल किसी और ने नहीं बल्कि संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने ही की है। वर्ष 2018 से 2022 तक पांच साल में 13 जिलों में कर्मचारियों उनके रिश्तेदारों समेत अपात्र को 23.81 करोड़ की राहत राशि दी गई है।
यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG) कैग की एक रिपोर्ट में हुआ है। कैग रिपोर्ट में सरकारी जमीन आवंटन में भी गड़बड़ी की बात सामने आई है। भोपाल में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को नियम विरुद्ध जमीन आवंटित की गई जिससे 65.5 करोड़ राजस्व का नुकसान हुआ है। संबल योजना में भी गड़बड़ी सामने आई है। 67 लाख 48 हजार श्रमिकों को अपात्र किया गया है। संबल योजना के कुल 31 फीसदी अपात्र किया गया। इसी तरह अंत्येष्टि सहायता राशि में भी गड़बड़ी की गई है। श्रमसेवा पोर्टल के डाटा का विश्लेषण किया गया जिसमें 142 मामलों में 52 खातों में 1.68 करोड़ की राशि जमा की गई, ये खाते पंजीकृत श्रमिकों के नहीं थे। विवाह सहायता के 86 मामलों में बिना पंजीकृत श्रमिकों के 41 बैंक खातों में 38.92 लाख की राशि जमा की गई। ‘


