न दिल्ली में जगह, न प्रदेश में पूछ… कांग्रेस में क्यों परेशान हैं कमलनाथ?

JAGRAN DESK

कमलनाथ भोपाल में कांग्रेस बैठक में उस वक्त भड़क गए, जब उनसे संगठन मजबूत को लेकर सुझाव मांगा गया. कमलनाथ का कहना था कि कांग्रेस की मीटिंग की खबर भी मुझे अखबार से मिलती है. संगठन में जो नियुक्तियां हो रही है, उसकी जानकारी मुझे नहीं दी जाती है.

मध्य प्रदेश चुनाव के बाद से ही कांग्रेस में अलग-थलग पड़े कमलनाथ की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. सोमवार को भोपाल में आयोजित एक बैठक में कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को जमकर सुनाया. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बैठक में यहां तक कह दिया कि प्रदेश कांग्रेस में मेरी कोई पूछ-परख नहीं है.

उनकी नाराजगी यहीं नहीं रुकी. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं पर मनमाने तरीके से मीटिंग बुलाने और फैसला लेने का आरोप लगाया. भोपाल में कमलनाथ के भड़कने की चर्चा दिल्ली के सियाली गलियारों तक में है.

क्यों नाराज हैं कमलनाथ?

78 साल के कमलनाथ साल 2023 के मध्य प्रदेश चुनाव तक कांग्रेस के सर्वे-सर्वा थे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ इस चुनाव में सीएम पद के भी दावेदार थे. पूरे चुनाव में बीजेपी सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की चर्चा थी. इसके बावजूद चुनाव के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए.

कांग्रेस 2023 के चुनाव में बुरी तरह हार गई. कमलनाथ इसके बाद से ही साइड लाइन चल रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में छिंदवाड़ा सीट से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को कांग्रेस ने टिकट भी दिया, लेकिन नकुल चुनाव जीत नहीं पाए. छिंदवाड़ा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है.

दिल्ली संगठन में जगह नहीं

कमलनाथ पिछले 40 साल से कांग्रेस में किसी न किसी बड़े पद पर रहे हैं. चाहे वो पद संगठन का हो, चाहे सरकार का. कमलनाथ मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं.

2023 में हार के बाद उन्हें कांग्रेस में कोई भी बड़ा पद नहीं मिला. लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कामलनाथ को राष्ट्रीय कांग्रेस में कोषाध्यक्ष और महासचिव बनाए जाने की चर्चा शुरू हुई इन चर्चाओं को बल तब और ज्यादा मिला, जब राहुल गांधी ने कमलनाथ से लंच पर मुलाकात की थी, लेकिन कांग्रेस की तरफ से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई.

कमलनाथ मध्य प्रदेश कांग्रेस में भी किसी पद पर नहीं हैं. वर्तमान में वे सिर्फ छिंदवाड़ा से विधायक हैं. अप्रैल 2024 में कमलनाथ के राज्यसभा जाने की भी चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह दिग्विजय सिंह के करीबी अशोक सिंह को उच्च सदन भेज दिया.

प्रदेश संगठन में पूछ-परख नहीं

कमलनाथ करीब 6 साल से मध्य प्रदेश कांग्रेस के सर्वे-सर्वा थे, लेकिन 2023 के बाद से उनकी पूछ-परख ना के बराबर है. मध्य प्रदेश में अभी जीतू पटवारी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. उनकी टीम में दिग्विजय सिंह और दिवंगत सुभाष यादव के बेटे शामिल हैं, लेकिन कमलनाथ के बेटे को जगह नहीं दी गई है.

इतना ही नहीं, कमलनाथ के वक्त में मध्य प्रदेश कांग्रेस में पावरफुल रहे नेता अभी संगठन से काफी दूर हैं. कमलनाथ को भी संगठन से जुड़े बैठकों की जानकारी कई बार नहीं दी जाती है.

कमलनाथ की नाराजगी की एक वजह यह भी है. संगठन में कमजोर स्थिति की वजह से कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में ही बीजेपी ने सेंध लगा दिया.

इतना ही नहीं, कमलनाथ 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में गए कुछ बड़े नेताओं की वापसी कराना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की वर्तमान इकाई से उनकी बात नहीं बन पा रही है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में वापसी की कवायद में जुटे ये दिग्गज कमलनाथ के करीबी रहे हैं.

कमलनाथ क्यों हुए साइड लाइन?

मध्य प्रदेश कांग्रेस से कमलनाथ के साइड लाइन होने की 3 बड़ी वजहें हैं. पहली वजह कमलनाथ का उम्रदराज होना है. कमलनाथ अभी 78 साल के हैं. 2028 में जब विधानसभा के चुनाव मध्य प्रदेश में होंगे, तब कमलनाथ की उम्र 82 हो जाएगी. यही वजह है कि कांग्रेस अभी से नए चेहरे को आगे कर 2028 का मैदान तैयार कर रही है.

साइड लाइन होने की दूसरी वजह कमलनाथ का कार्यकाल रहा है. 2018 में कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्य प्रदेश की बागडोर सौंप दी, लेकिन कमलनाथ न तो पार्टी में टूट रोक पाए और न ही 2023 में वापसी करा पाए. कांग्रेस ने इसके बाद कमलनाथ से मुंह मोड़ लिया.

तीसरी वजह कमलनाथ का एक्शन है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कमलनाथ के बीजेपी में जाने की चर्चा हुई. इस दौरान कमनलाथ के दिल्ली स्थित आवास से कांग्रेस का झंडा भी उतारा गया था. कई बार कमलनाथ से इसको लेकर सवाल पूछा गया, लेकिन वे स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बोले.

इस घटना के बाद कांग्रेस ने कमलनाथ से दूरी ही बना ली. लोकसभा चुनाव में कमलनाथ छिंदवाड़ा में ही अटके रहे. इसके बावजूद उनके बेटे को जीत नहीं मिल पाई.

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08 Jan 2025 By दैनिक जागरण

न दिल्ली में जगह, न प्रदेश में पूछ… कांग्रेस में क्यों परेशान हैं कमलनाथ?

JAGRAN DESK

मध्य प्रदेश चुनाव के बाद से ही कांग्रेस में अलग-थलग पड़े कमलनाथ की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है. सोमवार को भोपाल में आयोजित एक बैठक में कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को जमकर सुनाया. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बैठक में यहां तक कह दिया कि प्रदेश कांग्रेस में मेरी कोई पूछ-परख नहीं है.

उनकी नाराजगी यहीं नहीं रुकी. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं पर मनमाने तरीके से मीटिंग बुलाने और फैसला लेने का आरोप लगाया. भोपाल में कमलनाथ के भड़कने की चर्चा दिल्ली के सियाली गलियारों तक में है.

क्यों नाराज हैं कमलनाथ?

78 साल के कमलनाथ साल 2023 के मध्य प्रदेश चुनाव तक कांग्रेस के सर्वे-सर्वा थे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ इस चुनाव में सीएम पद के भी दावेदार थे. पूरे चुनाव में बीजेपी सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की चर्चा थी. इसके बावजूद चुनाव के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए.

कांग्रेस 2023 के चुनाव में बुरी तरह हार गई. कमलनाथ इसके बाद से ही साइड लाइन चल रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में छिंदवाड़ा सीट से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को कांग्रेस ने टिकट भी दिया, लेकिन नकुल चुनाव जीत नहीं पाए. छिंदवाड़ा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है.

दिल्ली संगठन में जगह नहीं

कमलनाथ पिछले 40 साल से कांग्रेस में किसी न किसी बड़े पद पर रहे हैं. चाहे वो पद संगठन का हो, चाहे सरकार का. कमलनाथ मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं.

2023 में हार के बाद उन्हें कांग्रेस में कोई भी बड़ा पद नहीं मिला. लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कामलनाथ को राष्ट्रीय कांग्रेस में कोषाध्यक्ष और महासचिव बनाए जाने की चर्चा शुरू हुई इन चर्चाओं को बल तब और ज्यादा मिला, जब राहुल गांधी ने कमलनाथ से लंच पर मुलाकात की थी, लेकिन कांग्रेस की तरफ से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई.

कमलनाथ मध्य प्रदेश कांग्रेस में भी किसी पद पर नहीं हैं. वर्तमान में वे सिर्फ छिंदवाड़ा से विधायक हैं. अप्रैल 2024 में कमलनाथ के राज्यसभा जाने की भी चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह दिग्विजय सिंह के करीबी अशोक सिंह को उच्च सदन भेज दिया.

प्रदेश संगठन में पूछ-परख नहीं

कमलनाथ करीब 6 साल से मध्य प्रदेश कांग्रेस के सर्वे-सर्वा थे, लेकिन 2023 के बाद से उनकी पूछ-परख ना के बराबर है. मध्य प्रदेश में अभी जीतू पटवारी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. उनकी टीम में दिग्विजय सिंह और दिवंगत सुभाष यादव के बेटे शामिल हैं, लेकिन कमलनाथ के बेटे को जगह नहीं दी गई है.

इतना ही नहीं, कमलनाथ के वक्त में मध्य प्रदेश कांग्रेस में पावरफुल रहे नेता अभी संगठन से काफी दूर हैं. कमलनाथ को भी संगठन से जुड़े बैठकों की जानकारी कई बार नहीं दी जाती है.

कमलनाथ की नाराजगी की एक वजह यह भी है. संगठन में कमजोर स्थिति की वजह से कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में ही बीजेपी ने सेंध लगा दिया.

इतना ही नहीं, कमलनाथ 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में गए कुछ बड़े नेताओं की वापसी कराना चाह रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की वर्तमान इकाई से उनकी बात नहीं बन पा रही है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में वापसी की कवायद में जुटे ये दिग्गज कमलनाथ के करीबी रहे हैं.

कमलनाथ क्यों हुए साइड लाइन?

मध्य प्रदेश कांग्रेस से कमलनाथ के साइड लाइन होने की 3 बड़ी वजहें हैं. पहली वजह कमलनाथ का उम्रदराज होना है. कमलनाथ अभी 78 साल के हैं. 2028 में जब विधानसभा के चुनाव मध्य प्रदेश में होंगे, तब कमलनाथ की उम्र 82 हो जाएगी. यही वजह है कि कांग्रेस अभी से नए चेहरे को आगे कर 2028 का मैदान तैयार कर रही है.

साइड लाइन होने की दूसरी वजह कमलनाथ का कार्यकाल रहा है. 2018 में कांग्रेस ने कमलनाथ को मध्य प्रदेश की बागडोर सौंप दी, लेकिन कमलनाथ न तो पार्टी में टूट रोक पाए और न ही 2023 में वापसी करा पाए. कांग्रेस ने इसके बाद कमलनाथ से मुंह मोड़ लिया.

तीसरी वजह कमलनाथ का एक्शन है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कमलनाथ के बीजेपी में जाने की चर्चा हुई. इस दौरान कमनलाथ के दिल्ली स्थित आवास से कांग्रेस का झंडा भी उतारा गया था. कई बार कमलनाथ से इसको लेकर सवाल पूछा गया, लेकिन वे स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बोले.

इस घटना के बाद कांग्रेस ने कमलनाथ से दूरी ही बना ली. लोकसभा चुनाव में कमलनाथ छिंदवाड़ा में ही अटके रहे. इसके बावजूद उनके बेटे को जीत नहीं मिल पाई.

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/neither-place-in-delhi-nor-in-the-state-ask%E2%80%A6-why/article-7256

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