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खतरे में आरिफ मसूद की विधायकी! पत्नी के नाम का कर्ज छिपा रहे थे नेताजी, हाईकोर्ट बोला- इतना बड़ा लोन...
BHOPAL, MP
भोपाल से चर्चित विधायक आरिफ मसूद की विधायकी खतरे में पड़ सकती है. उनका निर्वाचन रद्द करने को लेकर लगाई गई याचिका में मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें आरिफ के पत्नी के नाम पर लिए गए लोन को छिपाने की बात सही साबित हुई.
राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की मुश्किलें बढ़ गई हैं. चुनावी हलफनामे में लोन की जानकारी छिपाने के मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने माना कि लोन के दस्तावेज सही हैं. जबलपुर हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी के नाम पर इतना बड़ा लोन लेकर चुनावी हलफनामे में छिपाया गया. बता दें कि, बीजेपी कैंडिडेट ने कांग्रेस विधायक पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था. साथ ही कोर्ट ने कांग्रेस विधायक का निर्वाचन रद्द करने की मांग की थी.
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के चुनाव को भाजपा प्रत्याशी ध्रुव नारायण सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान आरिफ मसूद ने लोन की बात को गलत बताया और याचिका को निरस्त करने की मांग की थी. जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक डा पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट में भी आरिफ मसूद ने कहा था कि 50 लाख से ज्यादा के लोन की बात फर्जी है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेजा था.\
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सीनियर एडवोकेट अजय मिश्रा ने बताया कि जब मामले में अंतिम तर्क हुए दोनों पक्षों की सुनवाई हुई और कोर्ट ने लोन जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को बुलाकर उनसे पूछताछ की, तो पहले बैंक मैनेजर ने झूठ बोलने की कोशिश की. लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद उन्होंने सच बता दिया. जिसके बाद कोर्ट ने माना कि 50 लाख का लोन दिए जाने वाले दस्तावेज सही हैं. यानि लोन निकाला गया है जिसे आरिफ मसूद ने अपने चुनावी हलफनामे में छिपाया था.
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जनवरी तक के लिए टाल दी है. मामले को लेकर वकील का कहना है कि हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विधायक आरिफ मसूद की याचिका रद्द करने वाली बात को टाल दिया है. साथ ही मामले की सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं. ऐसें में अब आरिफ मसूद की विधायकी भी खतरे में पड़ सकती है. क्योंकि याचिकाकर्ता ने आरिफ मसूद का निर्वाचन शून्य करने की मांग की थी.
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राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की मुश्किलें बढ़ गई हैं. चुनावी हलफनामे में लोन की जानकारी छिपाने के मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने माना कि लोन के दस्तावेज सही हैं. जबलपुर हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी के नाम पर इतना बड़ा लोन लेकर चुनावी हलफनामे में छिपाया गया. बता दें कि, बीजेपी कैंडिडेट ने कांग्रेस विधायक पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था. साथ ही कोर्ट ने कांग्रेस विधायक का निर्वाचन रद्द करने की मांग की थी.
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के चुनाव को भाजपा प्रत्याशी ध्रुव नारायण सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान आरिफ मसूद ने लोन की बात को गलत बताया और याचिका को निरस्त करने की मांग की थी. जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक डा पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट में भी आरिफ मसूद ने कहा था कि 50 लाख से ज्यादा के लोन की बात फर्जी है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेजा था.\
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सीनियर एडवोकेट अजय मिश्रा ने बताया कि जब मामले में अंतिम तर्क हुए दोनों पक्षों की सुनवाई हुई और कोर्ट ने लोन जारी करने वाले बैंक अधिकारियों को बुलाकर उनसे पूछताछ की, तो पहले बैंक मैनेजर ने झूठ बोलने की कोशिश की. लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद उन्होंने सच बता दिया. जिसके बाद कोर्ट ने माना कि 50 लाख का लोन दिए जाने वाले दस्तावेज सही हैं. यानि लोन निकाला गया है जिसे आरिफ मसूद ने अपने चुनावी हलफनामे में छिपाया था.
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जनवरी तक के लिए टाल दी है. मामले को लेकर वकील का कहना है कि हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विधायक आरिफ मसूद की याचिका रद्द करने वाली बात को टाल दिया है. साथ ही मामले की सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं. ऐसें में अब आरिफ मसूद की विधायकी भी खतरे में पड़ सकती है. क्योंकि याचिकाकर्ता ने आरिफ मसूद का निर्वाचन शून्य करने की मांग की थी.
