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10वीं-12वीं छात्रों के लिए नई ‘द्वितीय परीक्षा’: फेल और पास दोनों को मिलेगा दूसरा मौका
भोपाल (म.प्र.)
म.प्र. बोर्ड की नई व्यवस्था से नंबर सुधारने का भी अवसर; पारंपरिक पूरक परीक्षा खत्म
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने इस साल छात्रों के लिए बड़ी व्यवस्था बदलाव की घोषणा की है। अब पारंपरिक पूरक परीक्षा को समाप्त कर ‘द्वितीय परीक्षा’ शुरू की जा रही है, जिसमें फेल और पास दोनों छात्र शामिल हो सकेंगे।
क्या है नई व्यवस्था?
नई प्रणाली के तहत छात्र केवल फेल विषयों के लिए ही नहीं, बल्कि अच्छे अंक पाने के लिए भी किसी विषय में परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड के अनुसार, इससे छात्रों को अपने रिजल्ट सुधारने का बेहतर अवसर मिलेगा। हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) की द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।
कब और कहां होगी परीक्षा?
12वीं की द्वितीय परीक्षा: 7 मई से 25 मई 2026
10वीं की द्वितीय परीक्षा: 7 मई से 19 मई 2026
सभी परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होंगी।
कौन दे सकता है परीक्षा?
नई व्यवस्था के अनुसार:
फेल छात्र: जो विषय अनुत्तीर्ण हैं, उनकी परीक्षा देना अनिवार्य होगा।
पास छात्र: जिनके विषय पास हैं, वे अपनी इच्छानुसार अंक सुधारने के लिए परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
रिजल्ट और अंक सुधार
द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा की तरह मान्य होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा और द्वितीय परीक्षा में से जो भी बेहतर परिणाम होगा, वही अंतिम अंक के रूप में दर्ज होगा। इस व्यवस्था से छात्र अपनी प्रदर्शन सुधारने का सीधे लाभ उठा सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया
छात्रों को द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से किया जाएगा, जहां निर्धारित शुल्क जमा कर आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। अधिक जानकारी के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर विजिट कर सकते हैं।
पहले हाईस्कूल में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। नई द्वितीय परीक्षा व्यवस्था से सभी छात्रों को समान अवसर मिलेगा और यह पारंपरिक पूरक परीक्षा की तुलना में अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित प्रणाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे छात्र मानसिक दबाव कम करेंगे और अपनी प्रदर्शन सुधार सकेंगे।
छात्रों और अभिभावकों के लिए यह बदलाव राहत भरा कदम है। आगामी परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति और परिणाम पर इस नई व्यवस्था का सकारात्मक असर देखा जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि यह कदम शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्र-केंद्रित सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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10वीं-12वीं छात्रों के लिए नई ‘द्वितीय परीक्षा’: फेल और पास दोनों को मिलेगा दूसरा मौका
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने इस साल छात्रों के लिए बड़ी व्यवस्था बदलाव की घोषणा की है। अब पारंपरिक पूरक परीक्षा को समाप्त कर ‘द्वितीय परीक्षा’ शुरू की जा रही है, जिसमें फेल और पास दोनों छात्र शामिल हो सकेंगे।
क्या है नई व्यवस्था?
नई प्रणाली के तहत छात्र केवल फेल विषयों के लिए ही नहीं, बल्कि अच्छे अंक पाने के लिए भी किसी विषय में परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड के अनुसार, इससे छात्रों को अपने रिजल्ट सुधारने का बेहतर अवसर मिलेगा। हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) की द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।
कब और कहां होगी परीक्षा?
12वीं की द्वितीय परीक्षा: 7 मई से 25 मई 2026
10वीं की द्वितीय परीक्षा: 7 मई से 19 मई 2026
सभी परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होंगी।
कौन दे सकता है परीक्षा?
नई व्यवस्था के अनुसार:
फेल छात्र: जो विषय अनुत्तीर्ण हैं, उनकी परीक्षा देना अनिवार्य होगा।
पास छात्र: जिनके विषय पास हैं, वे अपनी इच्छानुसार अंक सुधारने के लिए परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
रिजल्ट और अंक सुधार
द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा की तरह मान्य होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा और द्वितीय परीक्षा में से जो भी बेहतर परिणाम होगा, वही अंतिम अंक के रूप में दर्ज होगा। इस व्यवस्था से छात्र अपनी प्रदर्शन सुधारने का सीधे लाभ उठा सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया
छात्रों को द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से किया जाएगा, जहां निर्धारित शुल्क जमा कर आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। अधिक जानकारी के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर विजिट कर सकते हैं।
पहले हाईस्कूल में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। नई द्वितीय परीक्षा व्यवस्था से सभी छात्रों को समान अवसर मिलेगा और यह पारंपरिक पूरक परीक्षा की तुलना में अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित प्रणाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे छात्र मानसिक दबाव कम करेंगे और अपनी प्रदर्शन सुधार सकेंगे।
छात्रों और अभिभावकों के लिए यह बदलाव राहत भरा कदम है। आगामी परीक्षा में छात्रों की उपस्थिति और परिणाम पर इस नई व्यवस्था का सकारात्मक असर देखा जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि यह कदम शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्र-केंद्रित सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है।
