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एमपी में अब हैवी रेन का अलर्ट नहीं: अगले 3 दिन हल्की बारिश का दौर, मानसून ने दिया कोटे से ज्यादा पानी
Bhopal, MP
मध्यप्रदेश में फिलहाल भारी बारिश का खतरा टल गया है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेशभर में केवल हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। सोमवार को भोपाल, रायसेन, सतना, मंडला, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर और सिवनी में बारिश दर्ज की गई। रायसेन में सबसे ज्यादा 2 इंच और सतना में सवा इंच पानी गिरा। भोपाल में दिनभर धूप के बाद शाम को तेज बारिश हुई।
मानसून लौटने की प्रक्रिया शुरू
राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और अगले दो-तीन दिनों में पंजाब व गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट सकता है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी मानसून की विदाई की शुरुआत होगी। हालांकि, सितंबर के आखिरी दिनों तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
अब तक 42.1 इंच बारिश
16 जून को आमद देने वाले मानसून ने अब तक मध्यप्रदेश को औसत से ज्यादा पानी दिया है। सामान्य तौर पर 35.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 42.1 इंच पानी गिर चुका है यानी 6.9 इंच ज्यादा। प्रदेश की सामान्य औसत 37 इंच बारिश का कोटा पिछले हफ्ते ही पूरा हो चुका है।
कहां ज्यादा और कहां कम बारिश
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कम बारिश वाले जिले – इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति कमजोर रही है। बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर सबसे कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।
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ज्यादा बारिश वाले इलाके – ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिरा। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। वहीं, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में भी मानसून ने जमकर बरसात की है।
बड़े शहरों का रिकॉर्ड
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भोपाल – पिछले 4 साल से सितंबर में कोटे से ज्यादा बारिश हो रही है। 1961 में यहां 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था, जबकि 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1947 में बना।
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इंदौर – सितंबर 1954 में 30 इंच का रिकॉर्ड है। इस बार औसत 8 दिन के बजाय 15 से ज्यादा दिन बारिश हो सकती है।
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ग्वालियर – सितंबर 1990 में 25 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। इस बार अगस्त में ही औसत कोटा पूरा हो चुका है, अब होने वाली बारिश बोनस मानी जा रही है।
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एमपी में अब हैवी रेन का अलर्ट नहीं: अगले 3 दिन हल्की बारिश का दौर, मानसून ने दिया कोटे से ज्यादा पानी
Bhopal, MP
मध्यप्रदेश में फिलहाल भारी बारिश का खतरा टल गया है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेशभर में केवल हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। सोमवार को भोपाल, रायसेन, सतना, मंडला, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर और सिवनी में बारिश दर्ज की गई। रायसेन में सबसे ज्यादा 2 इंच और सतना में सवा इंच पानी गिरा। भोपाल में दिनभर धूप के बाद शाम को तेज बारिश हुई।
मानसून लौटने की प्रक्रिया शुरू
राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है और अगले दो-तीन दिनों में पंजाब व गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट सकता है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी मानसून की विदाई की शुरुआत होगी। हालांकि, सितंबर के आखिरी दिनों तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
अब तक 42.1 इंच बारिश
16 जून को आमद देने वाले मानसून ने अब तक मध्यप्रदेश को औसत से ज्यादा पानी दिया है। सामान्य तौर पर 35.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 42.1 इंच पानी गिर चुका है यानी 6.9 इंच ज्यादा। प्रदेश की सामान्य औसत 37 इंच बारिश का कोटा पिछले हफ्ते ही पूरा हो चुका है।
कहां ज्यादा और कहां कम बारिश
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कम बारिश वाले जिले – इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति कमजोर रही है। बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर सबसे कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं।
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ज्यादा बारिश वाले इलाके – ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिरा। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। वहीं, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में भी मानसून ने जमकर बरसात की है।
बड़े शहरों का रिकॉर्ड
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भोपाल – पिछले 4 साल से सितंबर में कोटे से ज्यादा बारिश हो रही है। 1961 में यहां 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था, जबकि 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1947 में बना।
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इंदौर – सितंबर 1954 में 30 इंच का रिकॉर्ड है। इस बार औसत 8 दिन के बजाय 15 से ज्यादा दिन बारिश हो सकती है।
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ग्वालियर – सितंबर 1990 में 25 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। इस बार अगस्त में ही औसत कोटा पूरा हो चुका है, अब होने वाली बारिश बोनस मानी जा रही है।
