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घुटने के दर्द से अब मिलेगी जल्दी राहत: भोपाल में नई UKR तकनीक पर लाइव सर्जरी वर्कशॉप, विशेषज्ञों ने बताया- कम दर्द और तेज़ रिकवरी से मरीजों को बड़ा लाभ
Bhopal, MP
भोपाल में घुटने के दर्द से राहत देने वाली आधुनिक चिकित्सा तकनीक ‘यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR)’ पर रविवार को एक विशेष डे स्कूल और लाइव सर्जरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल द्वारा भोपाल ऑर्थोपेडिक सर्जन्स सोसाइटी (BOSS) के सहयोग से तथा एमपी आर्थ्रोप्लास्टी सोसाइटी (MPAS) और एमपीआईओए (MPIOA) के तत्वावधान में नूर-उस-सबह पैलेस में संपन्न हुआ।
इस वर्कशॉप में इंदौर के प्रसिद्ध जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने सर्जनों को नवीन UKR तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि UKR सर्जरी पारंपरिक नी रिप्लेसमेंट से अधिक सटीक और कम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें केवल घुटने के प्रभावित हिस्से को बदला जाता है, पूरा घुटना नहीं। इससे मरीज को न सिर्फ कम दर्द होता है, बल्कि रिकवरी का समय भी काफी कम हो जाता है।
वर्कशॉप की शुरुआत विशेषज्ञों के लेक्चर्स और पैनल डिस्कशन से हुई, जिसमें राज्यभर के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जनों ने भाग लिया। इसके बाद आयोजित लाइव सर्जरी सेशन में प्रतिभागियों ने ऑपरेशन की वास्तविक प्रक्रिया को देखा और सर्जिकल स्टेप्स को बारीकी से समझा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित हैंड्स-ऑन सॉ बोन ट्रेनिंग से डॉक्टरों को तकनीकी अभ्यास का भी अवसर मिला।

डॉ. हेमंत मंडोवरा ने बताया कि, “यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) तकनीक घुटने के केवल प्रभावित हिस्से को रिप्लेस करती है। इससे मरीजों को कम दर्द, तेज़ रिकवरी और अधिक प्राकृतिक मूवमेंट मिलता है। यह सर्जरी भविष्य की दिशा है, जो मरीज-केंद्रित और सटीक परिणाम देने वाली तकनीक के रूप में उभर रही है।”
गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक सर्जनों को नई तकनीक से प्रशिक्षित करना है। उन्होंने बताया कि “UKR सर्जरी से मरीज जल्द सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। जिन मरीजों को घुटने के शुरुआती या एक हिस्से में आर्थराइटिस की समस्या होती है, उनके लिए यह तकनीक वरदान साबित हो रही है।”
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इस अवसर पर उपस्थित डॉ. शीतल गुप्ता और डॉ. अनुराग तिवारी ने कहा कि इस तरह की शैक्षणिक वर्कशॉप्स डॉक्टरों के बीच ज्ञान-विनिमय और नवीन चिकित्सा तकनीकों के प्रसार में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इसे भारत में ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम में भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और अन्य शहरों से आए दर्जनों सर्जनों ने भाग लिया। वर्कशॉप ने न केवल चिकित्सकों को नवीनतम ऑर्थोपेडिक ट्रेंड्स की गहरी समझ दी, बल्कि मरीजों के हित में उन्नत सर्जिकल तकनीकों को अपनाने की दिशा भी मजबूत की।
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यह कार्यक्रम गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल द्वारा भोपाल ऑर्थोपेडिक सर्जन्स सोसाइटी (BOSS) के सहयोग से तथा एमपी आर्थ्रोप्लास्टी सोसाइटी (MPAS) और एमपीआईओए (MPIOA) के तत्वावधान में नूर-उस-सबह पैलेस में संपन्न हुआ।
इस वर्कशॉप में इंदौर के प्रसिद्ध जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने सर्जनों को नवीन UKR तकनीक की बारीकियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि UKR सर्जरी पारंपरिक नी रिप्लेसमेंट से अधिक सटीक और कम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें केवल घुटने के प्रभावित हिस्से को बदला जाता है, पूरा घुटना नहीं। इससे मरीज को न सिर्फ कम दर्द होता है, बल्कि रिकवरी का समय भी काफी कम हो जाता है।
वर्कशॉप की शुरुआत विशेषज्ञों के लेक्चर्स और पैनल डिस्कशन से हुई, जिसमें राज्यभर के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जनों ने भाग लिया। इसके बाद आयोजित लाइव सर्जरी सेशन में प्रतिभागियों ने ऑपरेशन की वास्तविक प्रक्रिया को देखा और सर्जिकल स्टेप्स को बारीकी से समझा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित हैंड्स-ऑन सॉ बोन ट्रेनिंग से डॉक्टरों को तकनीकी अभ्यास का भी अवसर मिला।

डॉ. हेमंत मंडोवरा ने बताया कि, “यूनिकॉम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट (UKR) तकनीक घुटने के केवल प्रभावित हिस्से को रिप्लेस करती है। इससे मरीजों को कम दर्द, तेज़ रिकवरी और अधिक प्राकृतिक मूवमेंट मिलता है। यह सर्जरी भविष्य की दिशा है, जो मरीज-केंद्रित और सटीक परिणाम देने वाली तकनीक के रूप में उभर रही है।”
गांधी मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष गोहिया ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक सर्जनों को नई तकनीक से प्रशिक्षित करना है। उन्होंने बताया कि “UKR सर्जरी से मरीज जल्द सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। जिन मरीजों को घुटने के शुरुआती या एक हिस्से में आर्थराइटिस की समस्या होती है, उनके लिए यह तकनीक वरदान साबित हो रही है।”
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इस अवसर पर उपस्थित डॉ. शीतल गुप्ता और डॉ. अनुराग तिवारी ने कहा कि इस तरह की शैक्षणिक वर्कशॉप्स डॉक्टरों के बीच ज्ञान-विनिमय और नवीन चिकित्सा तकनीकों के प्रसार में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इसे भारत में ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम में भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और अन्य शहरों से आए दर्जनों सर्जनों ने भाग लिया। वर्कशॉप ने न केवल चिकित्सकों को नवीनतम ऑर्थोपेडिक ट्रेंड्स की गहरी समझ दी, बल्कि मरीजों के हित में उन्नत सर्जिकल तकनीकों को अपनाने की दिशा भी मजबूत की।
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