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ओल्ड अशोका गार्डन 'राम बाग' बनेगा :नाम बदलने की तैयारी, फैसला 24 जुलाई को
Bhopal,M.P
राजधानी भोपाल के पुराने इलाके में स्थित प्रसिद्ध 'ओल्ड अशोका गार्डन' अब एक नए नाम से जाना जाएगा। नगर निगम परिषद की आगामी बैठक में इस पार्क का नाम बदलकर 'राम बाग' रखने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। यह बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि शहर की पहचान और सांस्कृतिक जुड़ाव से भी जुड़ा हुआ है।
वार्ड-69 के पार्षद ने ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर ‘राम बाग’ रखने का प्रस्ताव निगम को सौंपा था। यह मांग 26 मई 2024 को आयोजित पुराना अशोका गार्डन सुधार समिति की साधारण सभा में उठी थी और सर्वसम्मति से पास भी हुई थी। इसी प्रकार, विवेकानंद पार्क के निकट 80 फीट रोड पर स्थित चौराहे को ‘विवेकानंद चौक’ नाम देने की सिफारिश भी की गई है। स्थानीय रहवासियों ने लंबे समय से इन क्षेत्रों के नाम बदलने की मांग की थी, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को नई दिशा मिल सके।
नाम बदलना क्यों जरूरी माना जा रहा है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि 'राम बाग' नाम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अधिक उपयुक्त है। कई लोग लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे। नए नाम से क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी, जो उसकी आस्था और संस्कृति से जुड़ी होगी।
6 नए विसर्जन कुंडों के निर्माण पर ₹25 करोड़ खर्च होंगे
शहर में धार्मिक आयोजनों के बाद मूर्ति विसर्जन को सुव्यवस्थित करने के लिए कुल 6 नए विसर्जन कुंड बनाए जाएंगे, जिन पर करीब ₹25 करोड़ की लागत आएगी। प्रमुख कुंड बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर में ₹4.45 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा, जिसमें शेड, मॉनिटरिंग टॉवर, पाथ-वे, रिटेनिंग वॉल, बाउंड्रीवॉल, इलेक्ट्रिफिकेशन और एंट्री गेट जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।
इसके अलावा:
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नीलबड़: ₹6.01 करोड़
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संजीव नगर: ₹4.77 करोड़
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मालीखेड़ा: ₹2.49 करोड़
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प्रेमपुरा: ₹7.34 करोड़
इन सभी स्थलों पर स्थायी व आधुनिक विसर्जन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष का घेराव, बैठक में सड़कों और पानी का मुद्दा गरमाएगा
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता ज़की ने बताया कि आगामी निगम परिषद बैठक में ‘शहर सरकार’ को विकास कार्यों की धीमी गति, जल संकट, सड़क निर्माण और समय पर बैठक न होने जैसे मुद्दों पर घेरा जाएगा। कांग्रेस की योजना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को ज़ोरदार ढंग से उठाया जाए।
नाम के साथ ज़रूरी हैं सुविधाएं भी
नाम बदलना एक कदम है, लेकिन इलाके में विकास भी उतना ही जरूरी है। लोग चाहते हैं कि पार्क की साफ-सफाई, लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए। अगर नाम के साथ सुविधाएं भी बढ़ें, तभी यह फैसला पूरी तरह सफल माना जाएगा।
‘ओल्ड अशोका गार्डन’ का ‘राम बाग’ बनना सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि स्थानीय जनभावना का सम्मान है। 24 जुलाई की बैठक में अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो भोपाल की एक और जगह अपनी नई पहचान के साथ सामने आएगी।
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<span class="t-green">ओल्ड अशोका गार्डन 'राम बाग' बनेगा :</span><span class="t-red">नाम बदलने की तैयारी, फैसला 24 जुलाई को</span>
Bhopal,M.P
वार्ड-69 के पार्षद ने ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर ‘राम बाग’ रखने का प्रस्ताव निगम को सौंपा था। यह मांग 26 मई 2024 को आयोजित पुराना अशोका गार्डन सुधार समिति की साधारण सभा में उठी थी और सर्वसम्मति से पास भी हुई थी। इसी प्रकार, विवेकानंद पार्क के निकट 80 फीट रोड पर स्थित चौराहे को ‘विवेकानंद चौक’ नाम देने की सिफारिश भी की गई है। स्थानीय रहवासियों ने लंबे समय से इन क्षेत्रों के नाम बदलने की मांग की थी, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को नई दिशा मिल सके।
नाम बदलना क्यों जरूरी माना जा रहा है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि 'राम बाग' नाम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अधिक उपयुक्त है। कई लोग लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे। नए नाम से क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी, जो उसकी आस्था और संस्कृति से जुड़ी होगी।
6 नए विसर्जन कुंडों के निर्माण पर ₹25 करोड़ खर्च होंगे
शहर में धार्मिक आयोजनों के बाद मूर्ति विसर्जन को सुव्यवस्थित करने के लिए कुल 6 नए विसर्जन कुंड बनाए जाएंगे, जिन पर करीब ₹25 करोड़ की लागत आएगी। प्रमुख कुंड बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर में ₹4.45 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा, जिसमें शेड, मॉनिटरिंग टॉवर, पाथ-वे, रिटेनिंग वॉल, बाउंड्रीवॉल, इलेक्ट्रिफिकेशन और एंट्री गेट जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।
इसके अलावा:
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नीलबड़: ₹6.01 करोड़
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संजीव नगर: ₹4.77 करोड़
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मालीखेड़ा: ₹2.49 करोड़
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प्रेमपुरा: ₹7.34 करोड़
इन सभी स्थलों पर स्थायी व आधुनिक विसर्जन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष का घेराव, बैठक में सड़कों और पानी का मुद्दा गरमाएगा
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता ज़की ने बताया कि आगामी निगम परिषद बैठक में ‘शहर सरकार’ को विकास कार्यों की धीमी गति, जल संकट, सड़क निर्माण और समय पर बैठक न होने जैसे मुद्दों पर घेरा जाएगा। कांग्रेस की योजना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को ज़ोरदार ढंग से उठाया जाए।
नाम के साथ ज़रूरी हैं सुविधाएं भी
नाम बदलना एक कदम है, लेकिन इलाके में विकास भी उतना ही जरूरी है। लोग चाहते हैं कि पार्क की साफ-सफाई, लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए। अगर नाम के साथ सुविधाएं भी बढ़ें, तभी यह फैसला पूरी तरह सफल माना जाएगा।
‘ओल्ड अशोका गार्डन’ का ‘राम बाग’ बनना सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि स्थानीय जनभावना का सम्मान है। 24 जुलाई की बैठक में अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो भोपाल की एक और जगह अपनी नई पहचान के साथ सामने आएगी।
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