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जीएमसी भोपाल में पेन डाउन आंदोलन, डॉक्टरों का सीधी भर्ती पर विरोध
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में आंतरिक सीधी भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के खिलाफ मेडिकल टीचर्स ने...
भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) एक बार फिर आंतरिक भर्ती नीति को लेकर चर्चा में है। संस्थान में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर निकाली गई आंतरिक सीधी भर्ती को लेकर मेडिकल शिक्षकों ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। इस फैसले के खिलाफ शिक्षकों ने सामूहिक रूप से पेन डाउन आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
सीधी भर्ती नीति पर शिक्षकों की आपत्ति
मेडिकल टीचर्स का कहना है कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति का तरीका पदोन्नति आधारित होना चाहिए, न कि सीधी भर्ती। उनका दावा है कि मौजूदा प्रक्रिया नियमों के विपरीत है और इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित होंगे। शिक्षकों ने इसे सेवा सुरक्षा और करियर प्रगति के लिए खतरा बताया है।
एक अप्रैल को पेन डाउन आंदोलन का ऐलान
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (पीएमटीए) के अनुसार एक अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक जीएमसी के एडमिशन ब्लॉक में पेन डाउन आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान सभी मेडिकल टीचर्स काम बंद रखकर विरोध दर्ज कराएंगे। संगठन का कहना है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
संस्थान के भीतर पहली बार खुला विरोध
जीएमसी के इतिहास में यह पहली बार है जब संस्थान के भीतर से ही पात्र अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ खुला मोर्चा खोला है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमडीए) की बैठक में 42 पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से सीधी भर्ती का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बैठक में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति केवल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के माध्यम से ही होनी चाहिए।
न्यायिक उदाहरणों का हवाला
शिक्षकों ने अपने पक्ष में विभिन्न अदालतों के निर्णयों का भी उल्लेख किया है। ग्वालियर स्थित मेडिकल कॉलेज में इसी तरह की सीधी भर्ती को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने का उदाहरण दिया गया। खंडवा मेडिकल कॉलेज मामले में भी न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया था, जबकि रतलाम मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मामला अभी विचाराधीन है। इन उदाहरणों के आधार पर शिक्षकों ने वर्तमान प्रक्रिया को अवैध बताया है।
डीन को सौंपा गया बहिष्कार पत्र
बैठक के बाद शिक्षकों ने डीन कार्यालय पहुंचकर औपचारिक रूप से बहिष्कार पत्र सौंपा। कई शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई। उनका कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया लागू होने पर प्रमोशन व्यवस्था प्रभावित होगी और वेतन एवं सेवा लाभों में असमानता पैदा होगी।
सरकार तक पहुंचने की तैयारी
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को जल्द ही राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। एक अप्रैल को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें शिक्षक अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
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जीएमसी भोपाल में पेन डाउन आंदोलन, डॉक्टरों का सीधी भर्ती पर विरोध
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) एक बार फिर आंतरिक भर्ती नीति को लेकर चर्चा में है। संस्थान में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर निकाली गई आंतरिक सीधी भर्ती को लेकर मेडिकल शिक्षकों ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। इस फैसले के खिलाफ शिक्षकों ने सामूहिक रूप से पेन डाउन आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
सीधी भर्ती नीति पर शिक्षकों की आपत्ति
मेडिकल टीचर्स का कहना है कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति का तरीका पदोन्नति आधारित होना चाहिए, न कि सीधी भर्ती। उनका दावा है कि मौजूदा प्रक्रिया नियमों के विपरीत है और इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के अधिकार प्रभावित होंगे। शिक्षकों ने इसे सेवा सुरक्षा और करियर प्रगति के लिए खतरा बताया है।
एक अप्रैल को पेन डाउन आंदोलन का ऐलान
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (पीएमटीए) के अनुसार एक अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक जीएमसी के एडमिशन ब्लॉक में पेन डाउन आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान सभी मेडिकल टीचर्स काम बंद रखकर विरोध दर्ज कराएंगे। संगठन का कहना है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
संस्थान के भीतर पहली बार खुला विरोध
जीएमसी के इतिहास में यह पहली बार है जब संस्थान के भीतर से ही पात्र अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ खुला मोर्चा खोला है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमडीए) की बैठक में 42 पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से सीधी भर्ती का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बैठक में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति केवल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के माध्यम से ही होनी चाहिए।
न्यायिक उदाहरणों का हवाला
शिक्षकों ने अपने पक्ष में विभिन्न अदालतों के निर्णयों का भी उल्लेख किया है। ग्वालियर स्थित मेडिकल कॉलेज में इसी तरह की सीधी भर्ती को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने का उदाहरण दिया गया। खंडवा मेडिकल कॉलेज मामले में भी न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया था, जबकि रतलाम मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मामला अभी विचाराधीन है। इन उदाहरणों के आधार पर शिक्षकों ने वर्तमान प्रक्रिया को अवैध बताया है।
डीन को सौंपा गया बहिष्कार पत्र
बैठक के बाद शिक्षकों ने डीन कार्यालय पहुंचकर औपचारिक रूप से बहिष्कार पत्र सौंपा। कई शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई। उनका कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया लागू होने पर प्रमोशन व्यवस्था प्रभावित होगी और वेतन एवं सेवा लाभों में असमानता पैदा होगी।
सरकार तक पहुंचने की तैयारी
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को जल्द ही राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। एक अप्रैल को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें शिक्षक अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
