- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- गुरु पूर्णिमा पर दर्दनाक हादसा: युवा भजन गायक की नर्मदा नदी में डूबकर मौत, रेलिंग में फंसा था पैर
गुरु पूर्णिमा पर दर्दनाक हादसा: युवा भजन गायक की नर्मदा नदी में डूबकर मौत, रेलिंग में फंसा था पैर
Anuppur, MP
अमरकंटक में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भजन संध्या की गूंज के बीच एक दर्दनाक हादसे ने श्रद्धालुओं को झकझोर दिया। 22 वर्षीय युवा भजन गायक राज भदौरिया की नर्मदा नदी में डूबकर मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब वे स्नान करते समय नदी के बीच बने फव्वारे की रेलिंग में फंस गए।
घटना शाम करीब 5:30 बजे रामघाट पर हुई, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए एकत्र थे। हादसे के बाद घाट पर अचानक सन्नाटा छा गया और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
भजन गायक राज का पैर रेलिंग में फंसा, बचाया नहीं जा सका
पुलिस के अनुसार, भिंड जिले के बालनपुर निवासी राज भदौरिया अपने बड़े भाई अर्जुन भदौरिया और जीजा के साथ अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल पर स्नान के लिए पहुंचे थे। स्नान के दौरान राज और उनके भाई नदी के बीच बने फव्वारे तक चले गए। इसी दौरान राज का पैर रेलिंग में फंस गया और वह खुद को बाहर नहीं निकाल सके।
स्थानीय श्रद्धालुओं और परिजनों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्हें अमरकंटक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
आश्रम का शिष्य था राज, था उभरता हुआ भजन गायक
राज भदौरिया अमरकंटक के एक स्थानीय आध्यात्मिक आश्रम में शिष्य के रूप में रहकर अध्ययन और साधना कर रहे थे। वह भजन गायन में निपुण और अत्यंत विनम्र स्वभाव के थे। आश्रम के संतों और श्रद्धालुओं में उनकी लोकप्रियता थी।
उनकी असमय मृत्यु ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को गहरे शोक में डुबो दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को परिजनों को सौंप दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
घटना ने घाट की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी के बीच बनाए गए फव्वारे और रेलिंग की सुरक्षा जांच, चेतावनी संकेत और गोताखोरों की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं की कमी उजागर हुई है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से स्थायी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
एक श्रद्धालु, एक गायक, एक साधक... चला गया
राज भदौरिया की यह असमय मृत्यु सिर्फ एक हादसा नहीं, एक पीढ़ी की आध्यात्मिक प्रतिभा का क्षय है। श्रद्धालु उन्हें एक भावपूर्ण भजन गायक के रूप में याद करेंगे, जो भक्ति में लीन रहते हुए नर्मदा मैया की गोद में समा गया।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
गुरु पूर्णिमा पर दर्दनाक हादसा: युवा भजन गायक की नर्मदा नदी में डूबकर मौत, रेलिंग में फंसा था पैर
Anuppur, MP
घटना शाम करीब 5:30 बजे रामघाट पर हुई, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान और दर्शन के लिए एकत्र थे। हादसे के बाद घाट पर अचानक सन्नाटा छा गया और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
भजन गायक राज का पैर रेलिंग में फंसा, बचाया नहीं जा सका
पुलिस के अनुसार, भिंड जिले के बालनपुर निवासी राज भदौरिया अपने बड़े भाई अर्जुन भदौरिया और जीजा के साथ अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल पर स्नान के लिए पहुंचे थे। स्नान के दौरान राज और उनके भाई नदी के बीच बने फव्वारे तक चले गए। इसी दौरान राज का पैर रेलिंग में फंस गया और वह खुद को बाहर नहीं निकाल सके।
स्थानीय श्रद्धालुओं और परिजनों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन जब तक उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्हें अमरकंटक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
आश्रम का शिष्य था राज, था उभरता हुआ भजन गायक
राज भदौरिया अमरकंटक के एक स्थानीय आध्यात्मिक आश्रम में शिष्य के रूप में रहकर अध्ययन और साधना कर रहे थे। वह भजन गायन में निपुण और अत्यंत विनम्र स्वभाव के थे। आश्रम के संतों और श्रद्धालुओं में उनकी लोकप्रियता थी।
उनकी असमय मृत्यु ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को गहरे शोक में डुबो दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को परिजनों को सौंप दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
घटना ने घाट की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी के बीच बनाए गए फव्वारे और रेलिंग की सुरक्षा जांच, चेतावनी संकेत और गोताखोरों की उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं की कमी उजागर हुई है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से स्थायी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।
एक श्रद्धालु, एक गायक, एक साधक... चला गया
राज भदौरिया की यह असमय मृत्यु सिर्फ एक हादसा नहीं, एक पीढ़ी की आध्यात्मिक प्रतिभा का क्षय है। श्रद्धालु उन्हें एक भावपूर्ण भजन गायक के रूप में याद करेंगे, जो भक्ति में लीन रहते हुए नर्मदा मैया की गोद में समा गया।
