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छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में खुलेआम शराबखोरी, प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे लोग
आशीष सिंह ठाकुर, छिन्दवाड़ा, MP
नशे में धुत कंप्यूटर ऑपरेटर की अभद्रता से परेशान हुए मरीज और परिजन
जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एक बार फिर शर्मनाक वजह से सुर्खियों में है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि अस्पताल के भीतर ही खुलेआम शराबखोरी होते हुए कैमरे में कैद हो गई है। यहां तक कि मौत का प्रमाण पत्र जारी करने वाले कक्ष में कर्मचारी टेबल पर शराब की बोतल रखकर नशे में धुत दिखाई दिए।
नशे में चूर ऑपरेटर, प्रमाण पत्र लेने आए लोगों से की अभद्रता
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर ए.के. पाल को शराब के नशे में प्रमाण पत्र जारी करते हुए पकड़ा गया। जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो उन्होंने टेबल पर शराब की बोतल साफ देखी। ऑपरेटर पाल बाबू नशे में इतने चूर थे कि ना तो कंप्यूटर सही से चला पा रहे थे और ना ही किसी से ठीक ढंग से बात कर पा रहे थे।
प्रमाण पत्र लेने आए अयूब खान नामक व्यक्ति ने बताया कि ऑपरेटर इतनी शराब पिए हुए थे कि सीधी बात तक नहीं कर पा रहे थे और दस्तावेज देने से इनकार कर रहे थे। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने उल्टा पत्रकारों पर ही चिल्लाना शुरू कर दिया और बदसलूकी पर उतर आए।
प्रशासन पर उठे सवाल, सिविल सर्जन की चुप्पी
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर में खुलेआम शराब पीना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ अस्पताल प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
पहले भी सामने आते रहे हैं विवाद
यह कोई पहली बार नहीं है जब छिंदवाड़ा का जिला अस्पताल इस तरह की घटनाओं को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी अस्पताल में अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी मामला केवल कागज़ों में जांच तक सीमित न रह जाए, यही आमजन की मांग है।
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छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में खुलेआम शराबखोरी, प्रमाण पत्र के लिए भटकते रहे लोग
आशीष सिंह ठाकुर, छिन्दवाड़ा, MP
जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एक बार फिर शर्मनाक वजह से सुर्खियों में है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि अस्पताल के भीतर ही खुलेआम शराबखोरी होते हुए कैमरे में कैद हो गई है। यहां तक कि मौत का प्रमाण पत्र जारी करने वाले कक्ष में कर्मचारी टेबल पर शराब की बोतल रखकर नशे में धुत दिखाई दिए।
नशे में चूर ऑपरेटर, प्रमाण पत्र लेने आए लोगों से की अभद्रता
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर ए.के. पाल को शराब के नशे में प्रमाण पत्र जारी करते हुए पकड़ा गया। जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची, तो उन्होंने टेबल पर शराब की बोतल साफ देखी। ऑपरेटर पाल बाबू नशे में इतने चूर थे कि ना तो कंप्यूटर सही से चला पा रहे थे और ना ही किसी से ठीक ढंग से बात कर पा रहे थे।
प्रमाण पत्र लेने आए अयूब खान नामक व्यक्ति ने बताया कि ऑपरेटर इतनी शराब पिए हुए थे कि सीधी बात तक नहीं कर पा रहे थे और दस्तावेज देने से इनकार कर रहे थे। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने उल्टा पत्रकारों पर ही चिल्लाना शुरू कर दिया और बदसलूकी पर उतर आए।
प्रशासन पर उठे सवाल, सिविल सर्जन की चुप्पी
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर में खुलेआम शराब पीना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ अस्पताल प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
पहले भी सामने आते रहे हैं विवाद
यह कोई पहली बार नहीं है जब छिंदवाड़ा का जिला अस्पताल इस तरह की घटनाओं को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी अस्पताल में अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी मामला केवल कागज़ों में जांच तक सीमित न रह जाए, यही आमजन की मांग है।
