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मुरैना में रेत नहीं पेट माफिया, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री का बड़ा बयान
BHOPAL, MP
मुरैना रेत माफियाओं को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री ऐंदल कंसाना ने बड़ा बयान दिया. वहीं कांग्रेस विधायक ने सरकार पर आरोप लगाए.
मुरैना जिले में रेत माफियाओं द्वारा वन विभाग के अधिकारियों पर हमले किए जाने के मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने कहा कि वहां रेत माफिया नहीं पेट माफिया हैं. पेट भरने के लिए लोग काम कर रहे हैं. वहां कोई रेत माफिया नहीं है. मंत्री कंसाना का जवाब देते हुए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा कि यह तो एक मंत्री की बात है. पूरी सरकार रेत माफिया को संरक्षण देने का काम कर रही है. सरकार इन माफिया को पेट माफिया बनाकर संरक्षण दे रही है.
कृषि विभाग की 25 योजनाएं बंद या बजट न के बराबर
पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि "इस बार के बजट में 25 से ज्यादा ऐसी योजनाएं हैं, जो या तो बंद हो चुकी हैं या फिर उनका नाम मात्र का बजट दिया गया है. सचिन यादव ने कहा कि कृषि विभाग की पौध अनुसंधान योजना, बलराम तालाब योजना, महिलाओं को किस क्षेत्र में भागीदारी देने के लिए शुरू की गई योजना, मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना और भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को या तो सरकार ने बंद कर दिया है, या इसके लिए नाम मात्र का बजट रखा है. ऐसे में खेती को किस प्रकार लाभ का धंधा बनाया जाएगा. आज मध्य प्रदेश में किसानों की वार्षिक आय ₹9000 है, जो आज राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है."
2003 का रोना ना रोये सरकार
कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि "सरकार के मंत्री 2003 के पहले क्या था यही रोना रो रहे हैं. जबकि आज के समय में लागत कहीं ज्यादा बढ़ गई है. सचिन यादव ने कहा कि उस समय डीएपी का मूल्य ₹400 था, जो आज 1450 रुपए है. वहीं सोयाबीन का बीज साल 2003 में ₹2500 प्रति क्विंटल था. जबकि वर्तमान में इसका मूल्य ₹7000 प्रति क्विंटल है. इसी प्रकार साल 2003 में डीजल की कीमत ₹20 प्रति लीटर थी, जो आज ₹100 तक पहुंच गई है.
सचिन यादव ने कहा कि साल 2003 तक सरकार 3 से 5 हॉर्स पावर तक किसानों का बिजली बिल माफ करती थी. आज उन किसानों के घर में बड़े-बड़े बिजली बिल आ रहे हैं. सचिन यादव ने कहा कि कृषि की लागत में जो वृद्धि हुई है, उसकी अपेक्षाकृत दाम नहीं बढ़े हैं."
पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली लागू करने वाला एमपी पहला राज्य
जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट में सदन में बताया कि "पाइप प्रणाली पर आधारित सिंचाई करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है. इसी प्रकार सिंचाई के दौरान जल प्रबंधन करने के मामले में मध्य प्रदेश को देश में पहला पुरस्कार मिल चुका है. मंत्री सिलावट ने कहा कि अगले 5 सालों में हम सिंचाई का रकबा50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं."
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मुरैना में रेत नहीं पेट माफिया, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री का बड़ा बयान
BHOPAL, MP
मुरैना जिले में रेत माफियाओं द्वारा वन विभाग के अधिकारियों पर हमले किए जाने के मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने कहा कि वहां रेत माफिया नहीं पेट माफिया हैं. पेट भरने के लिए लोग काम कर रहे हैं. वहां कोई रेत माफिया नहीं है. मंत्री कंसाना का जवाब देते हुए कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा कि यह तो एक मंत्री की बात है. पूरी सरकार रेत माफिया को संरक्षण देने का काम कर रही है. सरकार इन माफिया को पेट माफिया बनाकर संरक्षण दे रही है.
कृषि विभाग की 25 योजनाएं बंद या बजट न के बराबर
पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि "इस बार के बजट में 25 से ज्यादा ऐसी योजनाएं हैं, जो या तो बंद हो चुकी हैं या फिर उनका नाम मात्र का बजट दिया गया है. सचिन यादव ने कहा कि कृषि विभाग की पौध अनुसंधान योजना, बलराम तालाब योजना, महिलाओं को किस क्षेत्र में भागीदारी देने के लिए शुरू की गई योजना, मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना और भावांतर जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को या तो सरकार ने बंद कर दिया है, या इसके लिए नाम मात्र का बजट रखा है. ऐसे में खेती को किस प्रकार लाभ का धंधा बनाया जाएगा. आज मध्य प्रदेश में किसानों की वार्षिक आय ₹9000 है, जो आज राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है."
2003 का रोना ना रोये सरकार
कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि "सरकार के मंत्री 2003 के पहले क्या था यही रोना रो रहे हैं. जबकि आज के समय में लागत कहीं ज्यादा बढ़ गई है. सचिन यादव ने कहा कि उस समय डीएपी का मूल्य ₹400 था, जो आज 1450 रुपए है. वहीं सोयाबीन का बीज साल 2003 में ₹2500 प्रति क्विंटल था. जबकि वर्तमान में इसका मूल्य ₹7000 प्रति क्विंटल है. इसी प्रकार साल 2003 में डीजल की कीमत ₹20 प्रति लीटर थी, जो आज ₹100 तक पहुंच गई है.
सचिन यादव ने कहा कि साल 2003 तक सरकार 3 से 5 हॉर्स पावर तक किसानों का बिजली बिल माफ करती थी. आज उन किसानों के घर में बड़े-बड़े बिजली बिल आ रहे हैं. सचिन यादव ने कहा कि कृषि की लागत में जो वृद्धि हुई है, उसकी अपेक्षाकृत दाम नहीं बढ़े हैं."
पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली लागू करने वाला एमपी पहला राज्य
जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट में सदन में बताया कि "पाइप प्रणाली पर आधारित सिंचाई करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है. इसी प्रकार सिंचाई के दौरान जल प्रबंधन करने के मामले में मध्य प्रदेश को देश में पहला पुरस्कार मिल चुका है. मंत्री सिलावट ने कहा कि अगले 5 सालों में हम सिंचाई का रकबा50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं."
