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पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा, 9 दिन में तीसरी बढ़ोतरी, भोपाल में पेट्रोल 111.71 रुपये लीटर पहुंचा
भोपाल (म.प्र.)
पेट्रोलियम कंपनियों ने 9 दिन में तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए। भोपाल में पेट्रोल 111.71 रुपए प्रति लीटर पहुंचा।
देशभर में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। शनिवार सुबह नए दामों के ऐलान के बाद, भोपाल और मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत एक रुपए से ज्यादा बढ़ गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 111.71 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। कीमतों में लगातार हो रही इस वृद्धि ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। खासकर, जो लोग रोजाना गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे इसे लेकर काफी नाराज दिख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि यह मई में तीसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 15 मई को दाम में लगभग 3 रुपए और 19 मई को करीब 90 पैसे का इजाफा हुआ था। नए दामों के बाद इस महीने पेट्रोल-डीजल की कीमत लगभग 5 रुपए तक बढ़ चुकी है। सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोग नए रेट्स पर चर्चा करते नजर आए। कुछ ड्राइवरों का कहना था कि पहले से ही महंगाई का असर उनके घर के बजट पर पड़ रहा था, और अब ईंधन के महंगे होने से रोजाना के खर्चे बढ़ने की आशंका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में इन नई कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और बाजार पर पड़ सकता है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस वृद्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच का बढ़ता तनाव क्रूड ऑयल की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार ले गया है, जबकि कुछ हफ्ते पहले यही कीमत करीब 70 डॉलर थी। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था, इसलिए दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही, तो कीमतों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
भारत अपनी जरूरत के अधिकांश कच्चे तेल का आयात करता है। इसीलिए, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और वैश्विक बाजार का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। कच्चे तेल की खरीद के बाद उसे रिफाइनरी में प्रोसेस करना पड़ता है, और फिर उस पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट जोड़ा जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में दाम अलग-अलग होते हैं। मध्य प्रदेश में वैट अधिक होने के कारण यहां की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ऊंची रहती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2024 के बाद काफी समय तक ईंधन के दाम स्थिर रहे थे। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि, तेल कंपनियां लगातार घाटे की बात कह रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा है। इसलिए कंपनियों पर दाम बढ़ाने का काफी दबाव रहा है। अब आम जनता की नज़र इस पर है कि आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलेगी या फिर ईंधन और महंगा होगा।
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पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा, 9 दिन में तीसरी बढ़ोतरी, भोपाल में पेट्रोल 111.71 रुपये लीटर पहुंचा
भोपाल (म.प्र.)
देशभर में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। शनिवार सुबह नए दामों के ऐलान के बाद, भोपाल और मध्य प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत एक रुपए से ज्यादा बढ़ गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 111.71 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। कीमतों में लगातार हो रही इस वृद्धि ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। खासकर, जो लोग रोजाना गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे इसे लेकर काफी नाराज दिख रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि यह मई में तीसरी बार है जब दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 15 मई को दाम में लगभग 3 रुपए और 19 मई को करीब 90 पैसे का इजाफा हुआ था। नए दामों के बाद इस महीने पेट्रोल-डीजल की कीमत लगभग 5 रुपए तक बढ़ चुकी है। सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लोग नए रेट्स पर चर्चा करते नजर आए। कुछ ड्राइवरों का कहना था कि पहले से ही महंगाई का असर उनके घर के बजट पर पड़ रहा था, और अब ईंधन के महंगे होने से रोजाना के खर्चे बढ़ने की आशंका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में इन नई कीमतों का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और बाजार पर पड़ सकता है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस वृद्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच का बढ़ता तनाव क्रूड ऑयल की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार ले गया है, जबकि कुछ हफ्ते पहले यही कीमत करीब 70 डॉलर थी। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था, इसलिए दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही, तो कीमतों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
भारत अपनी जरूरत के अधिकांश कच्चे तेल का आयात करता है। इसीलिए, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और वैश्विक बाजार का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। कच्चे तेल की खरीद के बाद उसे रिफाइनरी में प्रोसेस करना पड़ता है, और फिर उस पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट जोड़ा जाता है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में दाम अलग-अलग होते हैं। मध्य प्रदेश में वैट अधिक होने के कारण यहां की कीमतें कई अन्य राज्यों की तुलना में ऊंची रहती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2024 के बाद काफी समय तक ईंधन के दाम स्थिर रहे थे। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। हालांकि, तेल कंपनियां लगातार घाटे की बात कह रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा है। इसलिए कंपनियों पर दाम बढ़ाने का काफी दबाव रहा है। अब आम जनता की नज़र इस पर है कि आने वाले दिनों में कुछ राहत मिलेगी या फिर ईंधन और महंगा होगा।
