मप्र विधानसभा में किसान मुआवजा विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज, सरकार ने तलब की जिलेवार रिपोर्ट

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हंगामे के अगले दिन विभागों को 72 घंटे में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश; कांग्रेस ने कहा—सरकार के दावों और ज़मीनी सच्चाई में अंतर।

भोपाल। किसानों को आर्थिक सहायता न मिलने को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को हुए हंगामे के बाद शुक्रवार को मामला और गर्मा गया। आज की ताज़ा ख़बरों में यह मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी स्थिति और तीखी की, जबकि सरकार ने सभी जिलों से मुआवजा वितरण की अद्यतन रिपोर्ट तलब कर ली है।

सहकारिता और कृषि विभाग को 72 घंटे के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि किन जिलों में कितने किसान सहायता के लिए लंबित हैं, और भुगतान प्रक्रिया में देरी का कारण क्या है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “किसानों को राहत में देरी बर्दाश्त नहीं होगी,” और दावा दोहराया कि राज्य सरकार पहले से अधिक मुआवजा दे रही है।

वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में “अधूरी और भ्रामक जानकारी” रखी। नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कई जिलों में किसानों ने पंजीयन के बावजूद अब तक एक भी किश्त प्राप्त नहीं की है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सदन में विशेष चर्चा की मांग की है।

सत्र में हुए हंगामे के बाद विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार सुबह घटना से जुड़ी रिपोर्ट स्पीकर को सौंप दी। रिपोर्ट में बताया गया है कि नारेबाजी के दौरान शिष्टाचार नियमों का उल्लंघन हुआ, और विपक्ष का सामूहिक बहिर्गमन औपचारिक रूप से दर्ज किया गया है। स्पीकर ने दोनों पक्षों से अगले सप्ताह “मर्यादा के भीतर” चर्चा करने की अपील की है।

इधर, मंत्रिमंडल की अनौपचारिक बैठक में यह भी तय किया गया कि सहकारी समितियों में किसानों के ऋण खातों से जुड़े गबन मामलों की जांच तेज की जाएगी। जिलों में संयुक्त टीमें भेजकर सत्यापन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि कई स्थानों पर लंबित मुआवजा फर्जीवाड़े या अधूरे दस्तावेज़ों के कारण अटका है।

किसानों के संगठनों ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार–विपक्ष की बहस से ज्यादा जरूरी है कि राहत राशि जल्दी पहुंचे। मध्य प्रदेश किसान मंच ने कहा कि “कागज़ी दावों के बीच किसान ब्याज और नुकसान झेल रहे हैं। सरकार को जिला स्तर पर कैंप लगाकर तत्काल भुगतान शुरू करना चाहिए।”

कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम तक 12 जिलों की प्रारंभिक रिपोर्ट मंत्रालय पहुंच चुकी है। इनमें कुछ जिलों में भुगतान गति बढ़ने के संकेत हैं, जबकि कुछ स्थानों पर डिजिटल एंट्री और मूल्यांकन में देरी की बात सामने आई है।

राज्य में अगले सप्ताह कृषि एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें लंबित मुआवजा, न्याय योजना और सहकारी समितियों में सुधार की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार आगामी सत्र में किसानों के लिए नई घोषणाएँ कर सकती है।

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www.dainikjagranmpcg.com
04 Dec 2025 By Nitin Trivedi

मप्र विधानसभा में किसान मुआवजा विवाद पर राजनीतिक टकराव तेज, सरकार ने तलब की जिलेवार रिपोर्ट

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भोपाल। किसानों को आर्थिक सहायता न मिलने को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को हुए हंगामे के बाद शुक्रवार को मामला और गर्मा गया। आज की ताज़ा ख़बरों में यह मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी स्थिति और तीखी की, जबकि सरकार ने सभी जिलों से मुआवजा वितरण की अद्यतन रिपोर्ट तलब कर ली है।

सहकारिता और कृषि विभाग को 72 घंटे के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि किन जिलों में कितने किसान सहायता के लिए लंबित हैं, और भुगतान प्रक्रिया में देरी का कारण क्या है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “किसानों को राहत में देरी बर्दाश्त नहीं होगी,” और दावा दोहराया कि राज्य सरकार पहले से अधिक मुआवजा दे रही है।

वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में “अधूरी और भ्रामक जानकारी” रखी। नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कई जिलों में किसानों ने पंजीयन के बावजूद अब तक एक भी किश्त प्राप्त नहीं की है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सदन में विशेष चर्चा की मांग की है।

सत्र में हुए हंगामे के बाद विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार सुबह घटना से जुड़ी रिपोर्ट स्पीकर को सौंप दी। रिपोर्ट में बताया गया है कि नारेबाजी के दौरान शिष्टाचार नियमों का उल्लंघन हुआ, और विपक्ष का सामूहिक बहिर्गमन औपचारिक रूप से दर्ज किया गया है। स्पीकर ने दोनों पक्षों से अगले सप्ताह “मर्यादा के भीतर” चर्चा करने की अपील की है।

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किसानों के संगठनों ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार–विपक्ष की बहस से ज्यादा जरूरी है कि राहत राशि जल्दी पहुंचे। मध्य प्रदेश किसान मंच ने कहा कि “कागज़ी दावों के बीच किसान ब्याज और नुकसान झेल रहे हैं। सरकार को जिला स्तर पर कैंप लगाकर तत्काल भुगतान शुरू करना चाहिए।”

कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम तक 12 जिलों की प्रारंभिक रिपोर्ट मंत्रालय पहुंच चुकी है। इनमें कुछ जिलों में भुगतान गति बढ़ने के संकेत हैं, जबकि कुछ स्थानों पर डिजिटल एंट्री और मूल्यांकन में देरी की बात सामने आई है।

राज्य में अगले सप्ताह कृषि एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें लंबित मुआवजा, न्याय योजना और सहकारी समितियों में सुधार की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार आगामी सत्र में किसानों के लिए नई घोषणाएँ कर सकती है।

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