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छिंदवाड़ा मंडी में बारिश बनी कहर, भीग गया किसानों का खून-पसीने का अनाज
आशीष सिंह ठाकुर, छिन्दवाड़ा
प्रशासन की लापरवाही से खुले में पड़ा अनाज बहा, अन्नदाता बेबस
बेमौसम बारिश ने एक बार फिर किसानों पर कहर बरपा दिया। फसल लेकर मंडी पहुंचे किसानों का कीमती अनाज बारिश में भीग गया, कुछ हिस्सों में तो पानी के तेज बहाव में अनाज बह भी गया। इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर मंडी प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
शेड व्यापारियों के कब्जे में, किसान खुले आसमान के नीचे
किसानों का आरोप है कि मंडी परिसर में बने बड़े-बड़े शेड केवल दिखावे के लिए हैं। इन शेडों पर कब्जा व्यापारियों का है, जबकि नियमानुसार किसी भी व्यापारी को माल खरीदने के बाद 24 घंटे के भीतर शेड खाली करना होता है। लेकिन मंडी प्रशासन की अनदेखी के कारण शेड महीनों तक भरे रहते हैं और किसानों को मजबूरी में खुले में अनाज रखना पड़ता है।
बारिश ने सब किया तबाह
छिंदवाड़ा की मंडी पहाड़ी इलाके में स्थित है, जिससे पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है। अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। अनाज भीगता रहा और किसान लाचार होकर उसे बर्बाद होते देखते रहे। जो अनाज बहने से बच गया, वह भी अब बेचने लायक नहीं रहा।
ना तिरपाल, ना इंतज़ाम, किसान फिर हुए शिकार
ऐसे हालात से निपटने के लिए नियमानुसार मंडी प्रबंधन को तिरपाल व अन्य सुरक्षा व्यवस्था करनी होती है, लेकिन ना तो तिरपाल दिया गया और ना ही कोई आपात प्रबंधन। किसानों ने बताया कि पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहता है।
किसानों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
किसानों ने मांग की है कि मंडी में बनी व्यवस्थाओं की जांच हो, शेड पर कब्जा जमाए व्यापारियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वरना आने वाले समय में अन्नदाता का मंडी पर से भरोसा उठ जाएगा।
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छिंदवाड़ा मंडी में बारिश बनी कहर, भीग गया किसानों का खून-पसीने का अनाज
आशीष सिंह ठाकुर, छिन्दवाड़ा
बेमौसम बारिश ने एक बार फिर किसानों पर कहर बरपा दिया। फसल लेकर मंडी पहुंचे किसानों का कीमती अनाज बारिश में भीग गया, कुछ हिस्सों में तो पानी के तेज बहाव में अनाज बह भी गया। इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर मंडी प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
शेड व्यापारियों के कब्जे में, किसान खुले आसमान के नीचे
किसानों का आरोप है कि मंडी परिसर में बने बड़े-बड़े शेड केवल दिखावे के लिए हैं। इन शेडों पर कब्जा व्यापारियों का है, जबकि नियमानुसार किसी भी व्यापारी को माल खरीदने के बाद 24 घंटे के भीतर शेड खाली करना होता है। लेकिन मंडी प्रशासन की अनदेखी के कारण शेड महीनों तक भरे रहते हैं और किसानों को मजबूरी में खुले में अनाज रखना पड़ता है।
बारिश ने सब किया तबाह
छिंदवाड़ा की मंडी पहाड़ी इलाके में स्थित है, जिससे पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है। अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। अनाज भीगता रहा और किसान लाचार होकर उसे बर्बाद होते देखते रहे। जो अनाज बहने से बच गया, वह भी अब बेचने लायक नहीं रहा।
ना तिरपाल, ना इंतज़ाम, किसान फिर हुए शिकार
ऐसे हालात से निपटने के लिए नियमानुसार मंडी प्रबंधन को तिरपाल व अन्य सुरक्षा व्यवस्था करनी होती है, लेकिन ना तो तिरपाल दिया गया और ना ही कोई आपात प्रबंधन। किसानों ने बताया कि पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहता है।
किसानों की मांग: जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
किसानों ने मांग की है कि मंडी में बनी व्यवस्थाओं की जांच हो, शेड पर कब्जा जमाए व्यापारियों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वरना आने वाले समय में अन्नदाता का मंडी पर से भरोसा उठ जाएगा।
