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अंबेडकर जयंती पर सजा में छूट: रीवा केंद्रीय जेल से रिहा हुए तीन आजीवन कारावासी कैदी
Rewa, MP
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित विशेष सजा माफी योजना के तहत रीवा केंद्रीय जेल से तीन आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा किया गया है। इस रिहाई के साथ ही कैदियों ने भविष्य में सामाजिक समरसता और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देने की बात कही।
कौन हैं रिहा होने वाले कैदी?
रिहा किए गए कैदियों में मंगलू बैगा एवं जयलाल बैगा, जो कि आपस में सगे भाई हैं और कुठली, जिला शहडोल के निवासी हैं, वहीं तीसरे कैदी शंकर उर्फ रोशन कोल हैं, जो जिला रीवा से हैं। ये सभी कैदी लंबे समय से जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे।
कैदियों को मिला 6 वर्ष की माफी का लाभ
केंद्रीय जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि, “इन कैदियों ने जेल में 14 वर्ष की वास्तविक सजा काटी है और 6 वर्ष की माफी का लाभ मिलाकर कुल 20 वर्ष की सजा पूर्ण कर ली है। इनकी रिहाई का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई है।”

जेल में मिला प्रशिक्षण, अब समाज में नई शुरुआत
उपाध्याय ने बताया कि जेल में रहने के दौरान इन कैदियों को व्यावसायिक एवं जीवन कौशल संबंधी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे ये बाहर जाकर स्वावलंबन और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत कर सकें। रिहा होने के बाद सभी कैदियों ने संकल्प लिया कि वे अब परिवार के साथ मिलकर कानून का पालन करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जिएंगे।
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अंबेडकर जयंती पर सजा में छूट: रीवा केंद्रीय जेल से रिहा हुए तीन आजीवन कारावासी कैदी
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डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित विशेष सजा माफी योजना के तहत रीवा केंद्रीय जेल से तीन आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा किया गया है। इस रिहाई के साथ ही कैदियों ने भविष्य में सामाजिक समरसता और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देने की बात कही।
कौन हैं रिहा होने वाले कैदी?
रिहा किए गए कैदियों में मंगलू बैगा एवं जयलाल बैगा, जो कि आपस में सगे भाई हैं और कुठली, जिला शहडोल के निवासी हैं, वहीं तीसरे कैदी शंकर उर्फ रोशन कोल हैं, जो जिला रीवा से हैं। ये सभी कैदी लंबे समय से जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे।
कैदियों को मिला 6 वर्ष की माफी का लाभ
केंद्रीय जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि, “इन कैदियों ने जेल में 14 वर्ष की वास्तविक सजा काटी है और 6 वर्ष की माफी का लाभ मिलाकर कुल 20 वर्ष की सजा पूर्ण कर ली है। इनकी रिहाई का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई है।”

जेल में मिला प्रशिक्षण, अब समाज में नई शुरुआत
उपाध्याय ने बताया कि जेल में रहने के दौरान इन कैदियों को व्यावसायिक एवं जीवन कौशल संबंधी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे ये बाहर जाकर स्वावलंबन और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत कर सकें। रिहा होने के बाद सभी कैदियों ने संकल्प लिया कि वे अब परिवार के साथ मिलकर कानून का पालन करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जिएंगे।
