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रोबोटिक सर्जरी में एम्स भोपाल बना मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल
BHOPAL, MP
रोबोटिक सर्जरी कराने के लिए अब मध्य प्रदेश के लोगों को प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत नहीं. एम्स भोपाल में शुरू हुईं जटिल सर्जरी.
मध्य प्रदेश के मरीजों को अब स्पाइन की रोबोटिक सर्जरी कराने के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरुरत नहीं है. यह सुविधा मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में शुरू हो गई है. अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने से रीढ़ की हड्डी की सर्जरी करना आसान हो जाएगा. इससे समय और संसाधनों की बचत भी होगी. खास बात यह है कि रोबोटिक सर्जरी अधिक सटीकता के साथ होती है और इसमें रक्तस्त्राव भी मैनुअल सर्जरी की बजाय कम होता है.
16 करोड़ रुपये से खरीदा गया रोबोट
बता दें कि एम्स भोपाल में पिछले 1 साल से रोबोटिक सर्जरी के लिए संसाधनों को जुटाने की व्यवस्था की जा रही थी. अस्पताल के डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है. अब एम्स में 16 करोड़ रुपये का रोबोट मंगाया गया है. जिससे रोबोटिक सर्जरी की जा रही है. इस रोबोट की सहायता से लेप्रोस्कोपिक, स्पाइन सहित अन्य सर्जरी की जाएगी. एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत रोबोट के भीतर सारा डाटा फीड कर दिया जाता है. इसके बाद कठिन सर्जरी रोबोट की मदद से डॉक्टर द्वारा या उनकी निगरानी में होती है. इस प्रकार की सर्जरी में गलती की संभावनाएं नहीं रहती हैं.

सर्जरी की संख्या बढ़ेगी, कम होगी वेटिंग
एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी की वजह से कम समय में ज्यादा सर्जरी हो सकेंगी, जिससे वेटिंग मरीजों की संख्या में कमी आएगी. एक अनुमान के मुताबिक रोबोट की मदद से चार गुना ज्यादा सर्जरी हो सकेंगी. दरअसल रोबोट की मदद से होने वाली सर्जरी में समय कम लगता है और सर्जरी में गलती कम होती है. मरीज को भी ज्यादा परेशानी नहीं होती. इसलिए अब एम्स भोपाल में रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे पहले एम्स भोपाल में लिवर, किडनी और बोनमेरो ट्रांसप्लांट भी हो चुका है.
एम्स भोपाल बना मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल
एम्स भोपाल के डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया कि "एम्स के डॉक्टरों ने मध्य प्रदेश में पहली रोबोटिक स्पाइन सर्जरी की है. रोबोट की सहायता से की जाने वाली स्पाइन सर्जरी न केवल शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ाती है. बल्कि रक्तस्त्राव को कम करने, मानवीय त्रुटियों को न्यूनतम करने और मरीजों के तेजी से स्वस्थ होने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है."
माइक्रोबायोलॉजी पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू
एम्स डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया कि "देश का पहला ऐसा संस्थान बन गया है कि जिसने माइक्रोबायोलॉजी पोस्टमार्टम की सुविधा भी शुरू कर दी है. पोस्टमॉर्टम माइक्रोबायोलॉजी का अर्थ है कि मृतक के शरीर में रोगाणुओं की उपस्थिति और संक्रमण की उपस्थिति की खोज करना. यह माइक्रोबियल स्थिति और मृत्यु के समय व्यक्ति के संक्रमण की स्थिति को दर्शाता है."
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रोबोटिक सर्जरी में एम्स भोपाल बना मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल
BHOPAL, MP
मध्य प्रदेश के मरीजों को अब स्पाइन की रोबोटिक सर्जरी कराने के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरुरत नहीं है. यह सुविधा मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में शुरू हो गई है. अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होने से रीढ़ की हड्डी की सर्जरी करना आसान हो जाएगा. इससे समय और संसाधनों की बचत भी होगी. खास बात यह है कि रोबोटिक सर्जरी अधिक सटीकता के साथ होती है और इसमें रक्तस्त्राव भी मैनुअल सर्जरी की बजाय कम होता है.
16 करोड़ रुपये से खरीदा गया रोबोट
बता दें कि एम्स भोपाल में पिछले 1 साल से रोबोटिक सर्जरी के लिए संसाधनों को जुटाने की व्यवस्था की जा रही थी. अस्पताल के डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है. अब एम्स में 16 करोड़ रुपये का रोबोट मंगाया गया है. जिससे रोबोटिक सर्जरी की जा रही है. इस रोबोट की सहायता से लेप्रोस्कोपिक, स्पाइन सहित अन्य सर्जरी की जाएगी. एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत रोबोट के भीतर सारा डाटा फीड कर दिया जाता है. इसके बाद कठिन सर्जरी रोबोट की मदद से डॉक्टर द्वारा या उनकी निगरानी में होती है. इस प्रकार की सर्जरी में गलती की संभावनाएं नहीं रहती हैं.

सर्जरी की संख्या बढ़ेगी, कम होगी वेटिंग
एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी की वजह से कम समय में ज्यादा सर्जरी हो सकेंगी, जिससे वेटिंग मरीजों की संख्या में कमी आएगी. एक अनुमान के मुताबिक रोबोट की मदद से चार गुना ज्यादा सर्जरी हो सकेंगी. दरअसल रोबोट की मदद से होने वाली सर्जरी में समय कम लगता है और सर्जरी में गलती कम होती है. मरीज को भी ज्यादा परेशानी नहीं होती. इसलिए अब एम्स भोपाल में रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे पहले एम्स भोपाल में लिवर, किडनी और बोनमेरो ट्रांसप्लांट भी हो चुका है.
एम्स भोपाल बना मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल
एम्स भोपाल के डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया कि "एम्स के डॉक्टरों ने मध्य प्रदेश में पहली रोबोटिक स्पाइन सर्जरी की है. रोबोट की सहायता से की जाने वाली स्पाइन सर्जरी न केवल शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ाती है. बल्कि रक्तस्त्राव को कम करने, मानवीय त्रुटियों को न्यूनतम करने और मरीजों के तेजी से स्वस्थ होने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है."
माइक्रोबायोलॉजी पोस्टमार्टम की सुविधा शुरू
एम्स डायरेक्टर अजय सिंह ने बताया कि "देश का पहला ऐसा संस्थान बन गया है कि जिसने माइक्रोबायोलॉजी पोस्टमार्टम की सुविधा भी शुरू कर दी है. पोस्टमॉर्टम माइक्रोबायोलॉजी का अर्थ है कि मृतक के शरीर में रोगाणुओं की उपस्थिति और संक्रमण की उपस्थिति की खोज करना. यह माइक्रोबियल स्थिति और मृत्यु के समय व्यक्ति के संक्रमण की स्थिति को दर्शाता है."
