- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भगवान महाकाल के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और त्रिशूल, रजत मुकुट व रुद्राक्ष से भव्य श्रृंगार
भगवान महाकाल के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और त्रिशूल, रजत मुकुट व रुद्राक्ष से भव्य श्रृंगार
Dharm Desk
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर सोमवार सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट ब्रह्ममुहूर्त में 4 बजे खोले गए।
इसके साथ ही भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। आरती से पूर्व जलाभिषेक के बाद महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया।
इस पावन अवसर पर भगवान महाकाल के मस्तक पर चंदन से त्रिपुंड और त्रिशूल अंकित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाएं अर्पित की गईं। साथ ही ड्रायफ्रूट से विशेष श्रृंगार कर फल-मिष्ठान्न का भोग लगाया गया।
सुबह-सुबह आयोजित भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज के कान में जाकर अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं। जयकारों की गूंज से सम्पूर्ण मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर हो उठा।

-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
भगवान महाकाल के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और त्रिशूल, रजत मुकुट व रुद्राक्ष से भव्य श्रृंगार
Dharm Desk
इसके साथ ही भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। आरती से पूर्व जलाभिषेक के बाद महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया।
इस पावन अवसर पर भगवान महाकाल के मस्तक पर चंदन से त्रिपुंड और त्रिशूल अंकित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाएं अर्पित की गईं। साथ ही ड्रायफ्रूट से विशेष श्रृंगार कर फल-मिष्ठान्न का भोग लगाया गया।
सुबह-सुबह आयोजित भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज के कान में जाकर अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं। जयकारों की गूंज से सम्पूर्ण मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर हो उठा।

