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सीनियर सिटीजंस की हाई कोर्ट से गुहार, हम लोग कानफोड़ू डीजे से तंग
Jabalpur, MP
जबलपुर के सीनियर सिटीजंस ने डीजे बजाने पर रोक लगाने के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से गुहार लगाई. सुनवाई जारी है.
ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी. याचिका में कहा गया कि डीजे के तेज आवाज मानव जीवन के लिए हानिकारक है और इसके बीमारियां बढ़ रही हैं. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा विनय सराफ की युगलपीठ ने जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
नाना देशमुख वैटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 साल), सेवानिवृत्त आईएएफ अधिकारी आर पी श्रीवास्तव (उम्र 100) सहित अन्य 4 लोगों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया "शादियों व धार्मिक आयोजन के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाये जाते है. डीजे की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है. इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. डीजे के तेज आवाज के कारण लोगों को हार्ट अटैक आते हैं या ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इसके अलावा तेज आवाज के कारण लोग बहरे हो रहे हैं."
ध्वनि प्रदूषण को लेकर जिम्मेदारों को हाईकोर्ट का नोटिस
याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है. जिसका विपरीत असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और वह बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. युगलपीठ ने केन्द्र सरकार, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक, निगमायुक्त तथा यातायात पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की.
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सीनियर सिटीजंस की हाई कोर्ट से गुहार, हम लोग कानफोड़ू डीजे से तंग
Jabalpur, MP
ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी. याचिका में कहा गया कि डीजे के तेज आवाज मानव जीवन के लिए हानिकारक है और इसके बीमारियां बढ़ रही हैं. याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा विनय सराफ की युगलपीठ ने जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
नाना देशमुख वैटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 साल), सेवानिवृत्त आईएएफ अधिकारी आर पी श्रीवास्तव (उम्र 100) सहित अन्य 4 लोगों की तरफ से दायर याचिका में कहा गया "शादियों व धार्मिक आयोजन के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाये जाते है. डीजे की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है. इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. डीजे के तेज आवाज के कारण लोगों को हार्ट अटैक आते हैं या ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इसके अलावा तेज आवाज के कारण लोग बहरे हो रहे हैं."
ध्वनि प्रदूषण को लेकर जिम्मेदारों को हाईकोर्ट का नोटिस
याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है. जिसका विपरीत असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और वह बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. युगलपीठ ने केन्द्र सरकार, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक, निगमायुक्त तथा यातायात पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गयी है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की.
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