शिशुकुंज स्कूल मामला: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद घर-घर पहुंची डॉक्टरों की टीम

इंदौर,(म.प्र.)

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लंच के बाद 150 से अधिक छात्रों में दिखे बीमारी के लक्षण, किचन सील; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी

इंदौर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद अब डॉक्टरों की टीमें प्रभावित बच्चों के घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही हैं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।मामला सामने आने के बाद मंगलवार को स्कूल का माहौल सामान्य दिनों से अलग नजर आया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को घर से टिफिन देकर स्कूल भेजा। कई छात्रों ने स्कूल का भोजन लेने के बजाय घर का बना खाना ही खाना उचित समझा। वहीं कुछ अभिभावकों ने एहतियात के तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जिसके चलते उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर फिलहाल बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है।

यह पूरा मामला शनिवार को सामने आया था। स्कूल में दोपहर का भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत की। धीरे-धीरे प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अभिभावकों को सूचना मिलने के बाद वे बच्चों को अस्पताल और क्लीनिक लेकर पहुंचे। देखते ही देखते यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या चौथी कक्षा तक के बच्चों की बताई जा रही है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने करीब 30 बच्चों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति का आकलन किया और अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित भोजन या पानी के सेवन से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। इस घटना के बाद सोमवार को अभिभावकों का गुस्सा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और पूरे मामले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।

जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सोमवार को दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब चार घंटे तक चली जांच के दौरान किचन और खाद्य भंडारण व्यवस्था की पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य सामग्री और मसालों की एक्सपायरी डेट समाप्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल के किचन को सील कर दिया। जांच दल ने किचन से विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय सामग्री के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, तैयार भोजन, मसाले और पानी के नमूने शामिल हैं। कुल 23 नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि विभाग को अब तक कई अभिभावकों की ओर से शिकायतें और जानकारी प्राप्त हुई हैं। स्कूल प्रशासन ने भी अस्वस्थ महसूस करने वाले करीब 85 विद्यार्थियों को एहतियातन घर भेजा था। फिलहाल किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अभिभावक, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। तब तक स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी जारी रखेगा और एहतियाती कदम उठाता रहेगा।

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24 Jun 2026 By Vaishnavi.J

शिशुकुंज स्कूल मामला: बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद घर-घर पहुंची डॉक्टरों की टीम

इंदौर,(म.प्र.)

इंदौर के प्रतिष्ठित शिशुकुंज स्कूल में छात्रों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने के मामले ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद अब डॉक्टरों की टीमें प्रभावित बच्चों के घर-घर जाकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही हैं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।मामला सामने आने के बाद मंगलवार को स्कूल का माहौल सामान्य दिनों से अलग नजर आया। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को घर से टिफिन देकर स्कूल भेजा। कई छात्रों ने स्कूल का भोजन लेने के बजाय घर का बना खाना ही खाना उचित समझा। वहीं कुछ अभिभावकों ने एहतियात के तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, जिसके चलते उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों को ई-मेल भेजकर फिलहाल बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है।

यह पूरा मामला शनिवार को सामने आया था। स्कूल में दोपहर का भोजन करने के कुछ समय बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत की। धीरे-धीरे प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अभिभावकों को सूचना मिलने के बाद वे बच्चों को अस्पताल और क्लीनिक लेकर पहुंचे। देखते ही देखते यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या चौथी कक्षा तक के बच्चों की बताई जा रही है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर डॉक्टरों की टीम गठित की गई। मंगलवार को टीम ने करीब 30 बच्चों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति का आकलन किया और अभिभावकों से बीमारी के लक्षणों तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य प्रभावित बच्चों के घर भी जाकर जांच की जाएगी ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित भोजन या पानी के सेवन से ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने और स्वास्थ्य पर नजर रखने की सलाह दे रहे हैं। इस घटना के बाद सोमवार को अभिभावकों का गुस्सा भी देखने को मिला। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और पूरे मामले को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कई अभिभावकों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।

जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सोमवार को दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। करीब चार घंटे तक चली जांच के दौरान किचन और खाद्य भंडारण व्यवस्था की पड़ताल की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ खाद्य सामग्री और मसालों की एक्सपायरी डेट समाप्त होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल के किचन को सील कर दिया। जांच दल ने किचन से विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय सामग्री के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें पनीर, दूध, आइसक्रीम, दाल, तैयार भोजन, मसाले और पानी के नमूने शामिल हैं। कुल 23 नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि विभाग को अब तक कई अभिभावकों की ओर से शिकायतें और जानकारी प्राप्त हुई हैं। स्कूल प्रशासन ने भी अस्वस्थ महसूस करने वाले करीब 85 विद्यार्थियों को एहतियातन घर भेजा था। फिलहाल किसी भी बच्चे को अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अभिभावक, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। तब तक स्वास्थ्य विभाग बच्चों की निगरानी जारी रखेगा और एहतियाती कदम उठाता रहेगा।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/shishu-kunj-school-case-team-of-doctors-reached-door-to/article-56784

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