- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- 'शारीरिक संबंध के लिए मौन स्वीकृति, रेप नहीं', जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय
'शारीरिक संबंध के लिए मौन स्वीकृति, रेप नहीं', जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय
JABALPUR, MP
शादी से पहले शारीरिक संबंध और फिर शादी को लेकर दोनों पक्षों के तैयार नहीं होने पर दर्ज कराया गया था रेप का मामला.
शादी के पहले शारीरिक संबंध स्थापित होना और फिर दोनों पक्षों के परिजनों में शादी की रजामंदी नहीं बनने के कारण याचिकाकर्ता के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया गया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट द्वारा तय किए आरोपों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट जस्टिस ए के पालीवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि शारीरिक संबंध स्थापित करने के दौरान शिकायतकर्ता की मौन स्वीकृति थी. बलात्कार का आरोप गठित करने में भौतिक तत्व होने चाहिये. एकलपीठ ने इसे कानून की दृष्टि में गलत मानने हुए तय आरोपों को खारिज कर दिया.
शहडोल निवासी ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
शहडोल जिले के बुढ़ार निवासी अजय चौधरी की तरफ से दायर पुनरीक्षण याचिका में जिला न्यायालय द्वारा बलात्कार के अपराध में आरोप तय किये जाने को चुनौती दी गई थी. याचिका में कहा गया था कि प्रेम संबंध होने के कारण दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित हुए थे. विवाह के लिए दोनों पक्ष के लोग तैयार नहीं हुए जिसके कारण शिकायतकर्ता ने उसके खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.
परिजनों को थी प्रेम संबंध की जानकारी
याचिकाकर्ता एसईसीएल में गार्ड की नौकरी करता था. 2019 में याचिकाकर्ता, अतिथि शिक्षिका के संपर्क में आया था. याचिकाकर्ता मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक शिकायतकर्ता के घर कई बार गया और इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए. इस दौरान शिकायतकर्ता की मां और दादी भी घर में थी. पहली बार शारीरिक संबंध स्थापित होने पर युवती ने इस संबंध में परिजनों को बताया था. इस दौरान याचिकाकर्ता ने शादी करने की बात कही थी. शिकायतकर्ता के माता-पिता मार्च 2021 में शादी की बात करने याचिकाकर्ता के घर गए थे. इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद हो गया और शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2021 में राजेन्द्र नगर थाने में रेप की एफआईआर दर्ज करवा दी थी.
'शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति, रेप नहीं'
हाईकोर्ट जस्टिस ए के पालीवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "शिकायतकर्ता ने मनोवैज्ञानिक दबाव में शारीरिक संबंध बनाने की मौन स्वीकृति प्रदान की थी. शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति के कारण प्रकरण में बलात्कार का आरोप गठित किये जाने के भौतिक साक्ष्यों का अभाव है. शिकायतकर्ता ने शादी का झूठा प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किए. शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति के कारण प्रकरण में बलात्कार का आरोप गठित किये जाने के भौतिक साक्ष्यों का अभाव है." एकलपीठ ने इस आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार की धाराओं के तहत तय किये गये आरोप को निरस्त कर दिया.
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
'शारीरिक संबंध के लिए मौन स्वीकृति, रेप नहीं', जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय
JABALPUR, MP
शादी के पहले शारीरिक संबंध स्थापित होना और फिर दोनों पक्षों के परिजनों में शादी की रजामंदी नहीं बनने के कारण याचिकाकर्ता के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया गया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट द्वारा तय किए आरोपों को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट जस्टिस ए के पालीवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि शारीरिक संबंध स्थापित करने के दौरान शिकायतकर्ता की मौन स्वीकृति थी. बलात्कार का आरोप गठित करने में भौतिक तत्व होने चाहिये. एकलपीठ ने इसे कानून की दृष्टि में गलत मानने हुए तय आरोपों को खारिज कर दिया.
शहडोल निवासी ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
शहडोल जिले के बुढ़ार निवासी अजय चौधरी की तरफ से दायर पुनरीक्षण याचिका में जिला न्यायालय द्वारा बलात्कार के अपराध में आरोप तय किये जाने को चुनौती दी गई थी. याचिका में कहा गया था कि प्रेम संबंध होने के कारण दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित हुए थे. विवाह के लिए दोनों पक्ष के लोग तैयार नहीं हुए जिसके कारण शिकायतकर्ता ने उसके खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.
परिजनों को थी प्रेम संबंध की जानकारी
याचिकाकर्ता एसईसीएल में गार्ड की नौकरी करता था. 2019 में याचिकाकर्ता, अतिथि शिक्षिका के संपर्क में आया था. याचिकाकर्ता मार्च 2020 से फरवरी 2021 तक शिकायतकर्ता के घर कई बार गया और इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुए. इस दौरान शिकायतकर्ता की मां और दादी भी घर में थी. पहली बार शारीरिक संबंध स्थापित होने पर युवती ने इस संबंध में परिजनों को बताया था. इस दौरान याचिकाकर्ता ने शादी करने की बात कही थी. शिकायतकर्ता के माता-पिता मार्च 2021 में शादी की बात करने याचिकाकर्ता के घर गए थे. इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद हो गया और शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2021 में राजेन्द्र नगर थाने में रेप की एफआईआर दर्ज करवा दी थी.
'शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति, रेप नहीं'
हाईकोर्ट जस्टिस ए के पालीवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "शिकायतकर्ता ने मनोवैज्ञानिक दबाव में शारीरिक संबंध बनाने की मौन स्वीकृति प्रदान की थी. शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति के कारण प्रकरण में बलात्कार का आरोप गठित किये जाने के भौतिक साक्ष्यों का अभाव है. शिकायतकर्ता ने शादी का झूठा प्रलोभन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किए. शारीरिक संबंध बनाने में मौन स्वीकृति के कारण प्रकरण में बलात्कार का आरोप गठित किये जाने के भौतिक साक्ष्यों का अभाव है." एकलपीठ ने इस आदेश के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ बलात्कार की धाराओं के तहत तय किये गये आरोप को निरस्त कर दिया.
